पुराना नियम · न्यायियों · अध्याय 15 / 21
न्यायियों 15
1कुछ दिनों के पश्चात् गेहूं की कटनी के समय ऐसा हुआ कि बकरी का एक बच्चा साथ लेकर शिमशोन अपनी पत्नी से भेंट करने गया। उसने कहा, “मैं अपनी पत्नी के पास उसके कमरे में जाऊंगा।” परन्तु उसके पिता ने उसे अन्दर नहीं जाने दिया।
2और उसके पिता ने कहा, “मैंने वास्तव में यह सोचा कि तू उससे अत्यधिक घृणा करता है इसलिए मैंने उसे तेरे साथी को दे दिया। क्या उसकी छोटी बहन उससे अधिक सुन्दर नहीं है? कृपा करके बदले में उसी को ले ले।”
3तब शिमशोन ने उनसे कहा, “अब चाहे मैं पलिश्तियों को कितनी भी हानि पहुँचाऊँ तो भी मैं उनके विषय निर्दोष ही ठहरूंगा।
4तब शिमशोन ने जाकर तीन सौ लोमड़ियां पकड़ीं और मशालें लीं और लोमड़ियों की पूंछ से पूंछ बांधीं और दो पूंछों के बीच में एक मशाल बांधी।
5फिर उसने मशालों में आग लगा कर उन लोमड़ियों को पलिश्तियों के खड़े खेतों में छोड़ दिया। इस प्रकार दाख की बारियों और बगीचों के साथ पूलों के ढेर तथा खड़ी फसल दोनों ही जल गए।
6तब पलिश्तियों ने कहा, “यह किसने किया?” और उन्होंने कहा, “यह उस तिम्नी के दामाद शिमशोन ने किया क्योंकि उसने उसकी पत्नी को छीनकर उसके साथी को दे दिया।” अतः पलिश्तियों ने आकर उस स्त्री तथा उसके पिता को आग में जला दिया।
7तब शिमशोन ने उनसे कहा, “जबकि तुम ऐसा करते हो तो मैं अवश्य ही तुमसे बदला लेने के बाद ही दम लूंगा।”
8तब उसने बड़ी निष्ठुरता के साथ बड़ी मार से उन्हें मार डाला और जाकर एताम नामक चट्टान की दरार में रहने लगा।
9तब पलिश्तियों ने चढ़ाई कर यहूदा में डेरे डाले और लही में फैल गए।
10तब यहूदा के लोगां ने पूछा, “तुम ने हम पर आक्रमण क्यों किया है?” और उन्होंने कहा, “हम शिमशोन को बांधने के लिए आए हैं कि जैसा उसने हमारे साथ किया हम भी उसके साथ वैसा ही करे।”
11तब यहूदा के तीन हज़ार पुरुषों ने एताम की चट्टान की दरार में जाकर शिमशोन से कहा, “क्या तू नहीं जानता है कि पलिश्ती हम पर राज्य करते हैं? फिर तू ने हम से ऐसा क्यों किया है?” और उसने उनसे कहा, “जैसा उन्होंने मुझ से किया, वैसा ही मैंने भी उनसे किया है।”
12और उन्होंने उससे कहा, “हम तुझे बांधकर पलिश्तियों के हाथों में दे देने के लिए आए है।” और शिमशोन ने उनसे कहा, “मुझ से शपथ खाओ कि तुम मुझे मार नहीं डालोगे।”
13अतः उन्होंने उससे कहा, “नहीं, परन्तु हम तुझे कस कर बांधेंगे और उनके हाथों में दे देंगे; परन्तु निश्चय हम तुझे नहीं मारेगे।” तब उन्होंने उसे दो नई रस्सियों से बांधा और चट्टान में से ले आए।
14जब वह लही में आया तो पलिश्ती उसे देखकर ललकारने लगे। तब यहोवा का आत्मा उस पर बड़े बल के साथ उतरा और वे रस्सियां जो उसकी भुजाओं पर थीं वे आग से जले हुए सन की तरह हो गईं और उसके हाथ के बन्धन गल कर गिर पड़े।
15और उसे गदहे के जबड़े की एक नई हडóी मिल गई। अतः उसने हाथ बढ़ाकर उसे ले लिया और उससे एक हज़ार पुरुषों को मार डाला।
16तम शिमशोन ने कहा, “गदेहे के जबड़े की हडóी से ढेरों पर ढेर, गदहे के जबड़े की हडóी ही से मैंने हज़ार पुरुषों को मार डाला।”
17ऐसा कह कर उसने अपने हाथ से जबड़े की वह हडóी फेंक दी और उस स्थान का नाम रामत-लही रखा।
18तब उसको बहुत प्यास लगी और उसने यहोवा को पुकार कर कहा, “तू ने अपने दास के द्वारा यह बड़ा छुटकारा कराया है और क्या अब मैं प्यासा मर जाऊँ और ख़तना-रहितों के हाथ में पड़ जाऊँ?”
19तब परमेश्वर ने लही में इतना गहरा गड्ढा बना दिया कि उस में से पानी निकलने लगा। जब उसने पीया तो उसमें फिर से शक्ति और ताज़गी आ गई। इस कारण उसने उसका नाम एन-हक्कोरे रखा जो आज तक लही में है।
20इस प्रकार उसने पलिश्तियों के दिनों में बीस वर्ष तक इस्राएल का न्याय किया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)