पुराना नियम · न्यायियों · अध्याय 17 / 21
न्यायियों 17
1एप्रैम के पहाड़ी देश में एक पुरुष था जिसका नाम मीका था।
2और उसने अपनी माता से कहा, “चांदी के वे ग्यारह-सौ सिक्के जो तुझ से ले लिए गए थे, जिनके विषय में तू ने मेरे सुनते हुए शाप दिया था, देख, वह चांदी मेरे पास है। मैंने उसे ले लिया था। उसकी माता ने कहा, “यहोवा की ओर से मेरे बेटे पर आशिष हो।”
3तब उसने चांदी के ग्यारह-सौ सिक्के अपनी माता को लौटा दिए, और उसकी माता ने कहा, “मैं पूरी तरह से वह चांदी अपने हाथ से यहोवा को देती हूँ कि मेरा पुत्र उससे एक खुदी हुई मूर्ति और दूसरी ढली हुई मूर्ति बनाए। इसलिए अब मैं उन्हें तुझे दे दूंगी।”
4अतः जब उसने वह चांदी अपनी माता को लौटाई तो उसकी माता ने चांदी के दो-सौ सिक्के लेकर सुनार को दिए जिसने उनसे एक मूर्ति खोदकर और दूसरी ढालकर बनाई आैर वे मीका के घर में रही।
5मीका के पास एक देवस्थान था। उसने एक एपोद और कई गृहदेवता बनाए और उसने अपने बेटों में से एक का अभिषेक किया जिससे कि वह उसका पुरोहित ठहरे।
6उन दिनों में इस्राएल में कोई राजा न था। प्रत्येक मनुष्य वहीं करता था जो उसकी दृष्टि में ठीक जाना पड़ता था।
7यहूदा के बैतलहम में यहूदा के कुल का एक जवान लेवी रहता था।
8तब वह पुरुष यहूदा के बैतलहम नगर से निकला कि उसे जहां-कहीं स्थान मिले वहीं ठहर जाए। वह यात्रा करते हुए एप्रैम के पहाड़ी देश में मीका के घर जा पहुँचा।
9और मीका ने उससे कहा, “तू कहां से आ रहा है?” और उसने उससे कहा, “मैं यहूदा के बैतलहम का एक लेवी हूँ और मैं इसलिए निकला हूँ कि जहां-कहीं मुझे जगह मिल जाए वहीं ठहर जाऊँ।”
10तब मीका ने उससे कहा, “मेरे साथ रहकर मेरे लिए पिता और पुरोहित बन और मैं तुझे प्रतिवर्ष चांदी के दस सिक्के, एक जोड़ा कपड़ा और भोजन-वस्तु दूँगा।” अतः वह लेवी भीतर गया।
11वह लेवी उस व्यक्ति के साथ रहने के लए सहमत हो गया। और वह जवान उसके साथ एक पुत्र-सा बना रहा।
12तब मीका ने लेवी का अभिषेक किया और वह जवान उसका पुरोहित बना और मीका के घर में रहने लगा।
13तब मीका ने कहा, “अब मैं जानता हूँ कि यहोवा मुझे समृद्ध करेगा यह देखकर कि मैंने एक लेवी को अपना पुरोहित बना रखा है।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)