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पुराना नियम · लैव्यवस्था · अध्याय 14 / 27

लैव्यवस्था 14

1तब यहोवा ने मूसा से कहा,

2“कोढ़ी के शुद्ध ठहराए जाने के दिन की व्यवस्था यह है। वह याजक के पास लाया जाए।

3याजक छावनी से बाहर जाए। इस प्रकार वह उस कोढ़ी को देखे और यदि उसके कोढ़ की व्याधि ठीक हो गई है,

4तो याजक आदेश दे कि शुद्ध ठहराए जाने वाले के लिए दो जीवित और शुद्ध पक्षी, देवदार की लकड़ी, और एक लाल डोरी तथा जूफा लाया जाए।

5याजक यह भी आदेश दे कि मिट्टी के पात्र में बहते जल के ऊपर एक पक्षी बलि किया जाए।

6तब वह उस जीवित पक्षी को ले ले और देवदार की लकड़ी, लाल डोरी, और जूफा को उस जीवित पक्षी के साथ बहते जल के ऊपर बलि किए गए पक्षी के लहू में डुबोए।

7तब वह उसे कोढ़ से शुद्ध ठहराए जाने वाले पर सात बार छिड़क कर शुद्ध ठहराए और उस जीवित पक्षी को मैदान में छोड़ दे।

8तब शुद्ध ठहरने वाला अपने वस्त्रों को धोए, अपने सब बालों को मुड़े और जल से स्नान करके शुद्ध हो जाए। इसके बाद वह छावनी में प्रवेश करे, परन्तु सात दिन तक अपने तम्बू से बाहर रहे।

9और सातवें दिन वह अपने सब बालों को मूड़े। वह अपने सिर, अपनी दाढ़ी और भौंहों, यहां तक कि अपने सब बाल मूड़े। तब वह अपने वस्त्र धोए और जल में स्नान करे और शुद्ध ठहरे।

10“तब आठवें दिन वह दोषरहित दो मेमने और एक वर्ष की दोषरहित एक भेड़ की बच्ची, अन्नबलि के लिए तेल से सना हुआ एपा का तीन दहाई-अंश मैदा और लोज भर तेल लाए।

11और शुद्ध ठहराने वाला याजक इन वस्तुओं के साथ शुद्ध होने वाले को यहोवा के समक्ष मिलापवाले तम्बू के द्वार पर खड़ा करे।

12तब याजक एक मेमने को ले और उसे दोषबलि के लिए लोज भर तेल के साथ यहोवा के सम्मुख हिलाने की भेंट के लिए उसको अर्पित करे।

13तब वह पवित्रस्थान में अर्थात् उस स्थान में जहां पापबलि और होमबलि के पशु बलि किए जाते हैं, उस मेमने को बलि करे। पापबलि के समान दोषबलि भी याजक का भाग होगा। वह परमपवित्र है।

14तब याजक दोषबलि के लहू में से कुछ लेकर शुद्ध ठहरने वाले के दाहिने कान की लौ और उसके दाहिने हाथ और दाहिने पांव के अंगूठों पर लगाए।

15याजक उस लोज भर तेल में से भी कुछ लेकर अपने बाएं हाथ की हथेली पर डाले,

16तब याजक अपने दाहिने हाथ की ऊंगली को बाएं हाथ की हथेली के तेल में डुबोए और अपनी उंगली से कुछ तेल यहोवा के सम्मुख सात बार छिड़के।

17और हथेली पर के शेष तेल में से याजक कुछ लेकर शुद्ध होने वाले के दाहिने कान के सिरे पर, और उसके दाहिने हाथ और दाहिने पांव के अंगूठों पर दोषबलि के लहू पर ही लगाए।

18याजक की हथेली पर बच रहे तेल को वह शुद्ध होने वाले के सिर पर डाल दे। अतः याजक उसके लिए यहोवा के सामने प्रायश्चित्त करे।

19इसके बाद याजक उसके लिए जो अपनी अशुद्धता से शुद्ध होने वाला है पापबलि चढ़ाकर प्रायश्चित्त करे। इसके पश्चात् वह होमबलि के पशु को बलि करे।

20और याजक वेदी पर होमबलि और अन्नबलि चढ़ाए। इस प्रकार याजक उसके लिए प्रायश्चित्त करे और वह शुद्ध ठहरेगा।

21“परन्तु यदि वह दरिद्र हो और उसके पास पर्याप्त धन न हो तो वह अपने प्रायश्चित्त के लिए एक मेमना दोषबलि हेतु हिलाने की भेंट-स्वरूप और अन्नबलि के लिए तेल से सना हुआ एपा का दसवां अंश भर मैदा और लोज भर तेल लाए।

22और वह दो पंडुक और कबूतर के दो बच्चे अपने सामर्थ्य के अनुसार लाए। इनमें से एक तो पापबलि के लिए और दूसरा होमबलि के लिए होगा।

23तब आठवें दिन वह इन सबको अपने शुद्ध ठहरने के लिए मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के सम्मुख याजक के पास ले आए।

24तब याजक दोषबलि वाले मेमने और लोज भर तेल को लेकर हिलाने की भेंट-स्वरूप यहोवा के समक्ष अर्पित करे।

25इसके पश्चात् वह दोषबलि के मेमने को बलि करे, तब याजक दोषबलि के लहू में से कुछ लेकर शुद्ध होने वाले व्यक्ति के दाहिने कान की लौ पर और दाहिने हाथ तथा दाहिने पैर के अंगूठों पर लगाए।

26याजक उस तेल में से कुछ अपने बाएं हाथ की हथेली पर डाले

27और अपने दाहिने हाथ की उंगली से अपने बाएं हाथ की हथेली पर के तेल में से कुछ लेकर यहोवा के सामने सात बार छिड़के।

28तब याजक अपनी हथेली पर के तेल में से कुछ लेकर शुद्ध ठहरने वाले के दाहिने कान की लौ पर और दाहिने हाथ तथा दाहिने पैर के अंगूठों पर, दोषबलि के लहू के स्थान पर ही लगाए।

29और जो तेल याजक की हथेली पर बच जाए उसे वह शुद्ध होने वाले व्यक्ति के प्रायश्चित्त के लिए यहोवा के सम्मुख उसके सिर पर डाल दे।

30तब वह अपने सामर्थ्य के अनुसार लाए गए पंडुक या कबूतर के बच्चों में से एक को बलि चढ़ाए।

31वह अपने सामर्थ्य के अनुसार अन्नबलि सहित एक को तो पापबलि और दूसरे को होमबलि के लिए चढ़ाए। इस प्रकार शुद्ध होने वाले व्यक्ति के लिए याजक, यहोवा के समक्ष प्रायश्चित्त करे।

32जिसे कोढ़ की व्याधि हो और जिसके पास शुद्ध ठहराए जाने के लिए पर्याप्त धन न हो उस व्यक्ति के लिए यही व्यवस्था है।”

33मूसा और हारून से यहोवा ने फिर कहा,

34“जब तुम कनान देश में प्रवेश करो जिसे मैं तुम्हें निज सम्पत्ति होने के लिए देता हूं, तब यदि मैं तुम्हें उत्तराधिकार में मिले देश के किसी घर पर कोढ़ का दाग भेजूँ

35तो उस घर का स्वामी आकर याजक को बताए, ‘मुझे अपने घर में कोढ़ के समान कोई दाग दिखाई देता है।’

36इससे पहले कि याजक उस घर में जाकर दाग को देखे, वह घर को खाली करने का आदेश दे जिससे घर की प्रत्येक वस्तु अशुद्ध न ठहरे। तत्पश्चात् याजक घर के भीतर जाकर देखे।

37अतः वह दाग को देखे, और यदि वह दाग घर की दीवारों पर हरी-हरी या लाल-लाल लकीरों के समान दीवार की सतह से नीचे गहराई तक दिखाई दे,

38तब याजक घर से बाहर द्वार पर आकर, घर को सात दिन के लिए बन्द कर दे।

39और सातवें दिन याजक आकर देखे। यदि वह दाग घर की दीवारों पर फैल गया हो

40तो याजक आदेश दे कि जिन पत्थरों में दाग हैं उन्हें निकालकर शहर के बाहर किसी अशुद्ध स्थान में फेंक दे।

41और वह घर को अन्दर से चारों ओर खुरचवाए। तब खुरची गई मिट्टी शहर से बाहर किसी अशुद्ध स्थान में डाल दी जाए।

42तब उन पत्थरों के स्थान पर दूसरे पत्थर लगाए जाएं और ताजा मसाला लेकर घर का पुनः पलस्तर कराया जाए।

43“फिर भी यदि पत्थरों के निकाले जाने, घर को खुरचे जाने, और पलस्तर कराए जाने के बाद वह दाग घर में पुनः फैल जाए

44तो याजक भीतर आकर जांच करे। यदि वह देखे कि दाग घर में सचमुच फैल चुका है तो उस घर में यह गलित कोढ़ है। वह घर अशुद्ध है।

45अतः वह उस घर को गिरा दे। वह उसके पत्थर लकड़ियां और घर का शेष मलवा शहर से बाहर किसी अशुद्ध स्थान में ले जाए।

46इसके अतिरिक्त, जब तक घर बन्द रहे तब तक यदि कोई उस घर में जाए तो वह सायंकाल तक अशुद्ध रहे।

47इसी प्रकार, जो कोई भी उस घर में सोए वह अपने वस्त्र धोए, और जो कोई उस घर में भोजन करे वह भी अपने वस्त्र धोए।

48“इसके विपरीत यदि याजक भीतर आकर जांच करे और देखे कि घर का पलस्तर पुनः कराने के पश्चात् सचमुच दाग नहीं फैला है तो याजक उस घर को शुद्ध ठहराए, क्योंकि दाग पुनः प्रकट नहीं हुआ है।

49तब वह उस घर को शुद्ध करने के लिए दो पक्षी, देवदार की लकड़ी, लाल डोरी, और जूफा ले।

50और वह मिट्टी के बर्तन में बहते जल के ऊपर एक पक्षी को बलि करे।

51तब वह उस जीवित पक्षी के साथ देवदार की लकड़ी, जूफा, और लाल डोरी को लेकर उनको बलि किये पक्षी के लहू में, और इसके साथ ही बहते जल में डुबोए और घर पर सात बार छिड़के।

52इस प्रकार वह उस घर को पक्षी के लहू, बहते हुए जल, जीवित पक्षी, देवदार की लकड़ी, जूफा, और लाल डोरी के द्वारा शुद्ध करे।

53तब वह जीवित पक्षी को शहर के बाहर खुले मैदान में छोड़ दे। वह घर के लिए प्रायश्चित्त करे, तब वह घर शुद्ध हो जाएगा।”

54किसी भी कोढ़ के दाग की व्यवस्था यह है, अर्थात् चकत्ते,

55और कोढ़ लगे वस्त्र, या घर,

56सूजन, पपड़ी, या श्वेत दाग के विषय में,

57शुद्ध या अशुद्ध ठहराने की शिक्षा देने के लिए कोढ़ की यही व्यवस्था है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)