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पुराना नियम · लैव्यवस्था · अध्याय 15 / 27

लैव्यवस्था 15

1यहोवा ने मूसा और हारून से यह भी कहा,

2“इस्राएलियों से कह कि यदि किसी पुरफ़ष को प्रमेह हो तो उसका प्रमेह अशुद्ध है।

3वरन् प्रमेह की दशा में उसकी अशुद्धता इस प्रकार होगीः चाहे उसके शरीर से प्रमेह बहता हो या बन्द हो जाए, यह उसकी अशुद्धता ठहरेगी।

4जिस किसी बिछौने पर प्रमेह का रोगी लेटे वह अशुद्ध ठहरे, और जिस किसी वस्तु पर बैठे वह भी अशुद्ध ठहरे।

5इसके अतिरिक्त, जो कोई उसके बिछौने को स्पर्श करे वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सायंकाल तक अशुद्ध ठहरे,

6और जो कोई उस वस्तु पर बैठे जिस पर प्रमेह का रोगी बैठा हो वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे और सायंकाल तक अशुद्ध ठहरे।

7जो कोई प्रमेह के रोगी को स्पर्श करे वह भी अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सायंकाल तक अशुद्ध ठहरे।

8यदि प्रमेह का रोगी किसी शुद्ध मनुष्य पर थूके तो वह भी अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सायंकाल तक अशुद्ध ठहरे।

9और प्रमेह का रोगी जिस जीन पर सवारी करे वह अशुद्ध ठहरे।

10जो कोई ऐसी वस्तु को छुए जो उसके नीचे रही हो, वह सायंकाल तक अशुद्ध ठहरे, और जो कोई उन वस्तुओं को उठाए वह भी अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सायंकाल तक अशुद्ध ठहरे।

11इसी प्रकार, जिस किसी व्यक्ति को प्रमेह का रोगी जल में हाथ धोए बिना छुए, वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सायंकाल तक अशुद्ध रहे।

12प्रमेह का रोगी मिट्टी के जिस किसी पात्र को छुए वह तोड़ डाला जाए, और काठ का प्रत्येक पात्र जल से धोया जाए।

13“और जब प्रमेह का रोगी प्रमेह से चंगा हो जाए तब वह अपने शुद्ध होने के सात दिन गिन ले। तत्पश्चात् वह अपने वस्त्र धोकर बहते हुए जल से स्नान करे, तब शुद्ध ठहरेगा।

14और आठवें दिन वह अपने लिए दो पंडुक या कबूतरी के दो बच्चे लेकर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के सम्मुख जाकर उन्हें याजक को दे।

15याजक उनमें से एक को पापबलि के लिए और दूसरे को होमबलि के लिए भेंट चढ़ाए। इस प्रकार याजक उस प्रमेह रोग के कारण उस व्यक्ति के लिए यहोवा के सम्मुख प्रायश्चित्त करे।

16“यदि किसी पुरफ़ष का वीर्यपात हो जाए तो वह अपने सम्पूर्ण शरीर को जल से धोए और सायंकाल तक अशुद्ध रहे।

17और जिस किसी वस्त्र या चमड़े की वस्तु पर वीर्य पड़ा हो, वह जल से धोई जाए और सायंकाल तक अशुद्ध ठहरे।

18जब स्त्री के साथ कोई पुरफ़ष सम्भोग करे और वीर्यपात हो जाए तो वे दोनों जल से स्नान करें और सायंकाल तक अशुद्ध ठहरे।

19“जब किसी स्त्री को स्त्रव हो और यदि यह उसके शरीर का रक्त-स्त्रव हो तो वह अपने मासिक धर्म में सात दिन तक अशुद्ध रहे, और जो कोई भी उसको छुए वह सायंकाल तक अशुद्ध रहे।

20अपने मासिक धर्म की अशुद्धता में वह जिस किसी वस्तु पर लेटे वह वस्तु अशुद्ध ठहरे अथवा जिस किसी वस्तु पर बैठे वह भी अशुद्ध ठहरे।

21और जो कोई उस स्त्री के बिछौने को छुए वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सायंकाल तक अशुद्ध रहे।

22और जो कोई ऐसी किसी वस्तु को छुए जिस पर वह बैठी हो, वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सायंकाल तक अशुद्ध ठहरे।

23चाहे बिछौना हो या कोई वस्तु जिस पर वह बैठती हो, इसे छूने वाला सायंकाल तक अशुद्ध ठहरे।

24और यदि कोई पुरफ़ष उसके साथ सम्भोग करे जिससे उस स्त्री के मासिक धर्म की अशुद्धता उसको लग जाए तो वह सात दिन तक अशुद्ध ठहरे, और जिस-जिस बिछौने पर वह लेटे, वह भी अशुद्ध ठहरे।

25“यदि किसी स्त्री को अपने मासिक धर्म के अतिरिक्त अधिक दिनों तक रक्त-स्त्रव होता रहे अथवा मासिक धर्म की अवधि से अधिक समय तक उसे रक्त-स्त्रव होता रहे, तो जब तक उसे ऐसा रक्त-स्त्रव होता रहे तब तक वह वैसे ही अशुद्ध ठहरे जैसे अपने मासिक धर्म के दिनों मे।

26जिस किसी बिछौने पर वह ऐसे रक्त-स्त्रव के दिनों में लेटे वह उसके मासिक धर्म के बिछौने के समान अशुद्ध ठहरे, और वह स्त्री जिस किसी वस्तु पर बैठे वह भी वैसे ही अशुद्ध ठहरे जैसे मासिक धर्म के दिनों मे।

27इसी प्रकार जो कोई उन वस्तुओं को छुए वह भी अशुद्ध ठहरे। वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सायंकाल तक अशुद्ध ठहरे।

28जब वह स्त्री अपने रक्त-स्त्रव से शुद्ध हो जाए, उस दिन से वह अपने लिए सात दिन गिन ले। उनके बीतने पर वह शुद्ध ठहरेगी।

29आठवें दिन वह अपने लिए दो पंडुक या कबूतर के दो बच्चे लेकर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर याजक के पास जाए।

30तब याजक एक को पापबलि और दूसरे को होमबलि करके चढ़ाए। इस प्रकार याजक उसके मासिक धर्म की अशुद्धता के कारण यहोवा के सम्मुख उसके लिए प्रायश्चित्त करे।

31“इस प्रकार तुम इस्राएलियों को उनकी अशुद्धता से अलग रखना, ऐसा न हो कि वे मेरे निवासस्थान को, जो उनके मध्य है, अशुद्ध करके अपनी अशुद्धता में ही मर जाए।”

32प्रमेह के रोगी, और जिस पुरफ़ष को वीर्यपात होता है जिससे वह अशुद्ध ठहरता है,

33और वह स्त्री जो मासिक धर्म की अशुद्धता के कारण बीमार है, और वह पुरफ़ष या स्त्री जिसको स्त्रव होता हो, अथवा वह पुरफ़ष जो अशुद्ध स्त्री से सम्भोग करे, इन सभों के लिए यही व्यवस्था है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)