पुराना नियम · लैव्यवस्था · अध्याय 19 / 27
लैव्यवस्था 19
1तब यहोवा ने मूसा से कहा,
2“इस्राएलियों की सारी मंडली से बात कर और कहः तुम पवित्र बने रहो, क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा पवित्र हू।
3तुम सब अपनी-अपनी मां और अपने-अपने पिता का भय मानना और मेरे सब्त के दिनों को मानना। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं
4तुम मूरतों की ओर न फिरना और देवताओं की प्रतिमाएं ढालकर न बनाना। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हू।
5“जब तुम मुझ यहोवा के लिए मेलबलि का बलिदान चढ़ाओ तो ऐसे चढ़ाना कि ग्रहण किए जाओ।
6जिस दिन तुम उसे चढ़ाओ उसी दिन और दूसरे दिन भी वह खाया जाए, परन्तु तीसरे दिन यदि उसमें से कुछ बचा रहे तो वह आग में जला दिया जाए।
7अतः तीसरे दिन यदि उसमें से कुछ भी खाया जाए तो वह घृणित ठहरेगा। वह ग्रहणयोग्य न होगा।
8जो कोई उसे खाए उसको अपने अधर्म का भार स्वयं उठाना पड़ेगा, क्योंकि उसने यहोवा की पवित्र वस्तु को अपवित्र किया है। वह व्यक्ति अपने लोगों में से मिटा डाला जाए।
9“फिर जब तुम अपने देश में फसल काटो तब अपने खेत के कोने-कोने तक पूरा न काटना और न तुम काटी गई फसल में से गिरी हुई बालों को चुनकर इकट्ठðा करना।
10तुम न तो अपनी दाख की बारी में से दाना तोड़ना और न दाख की बारी में से गिरे अंगूरों को बटोरना। उनको दरिद्र और परदेशियों के लिए छोड़ देना। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं
11“तुम चोरी न करना, न धोखा देना, और न एक दूसरे से झूठ बोलना।
12तुम मेरे नाम से झूठी शपथ खाकर अपने परमेश्वर का नाम अपवित्र न ठहराना। मैं यहोवा हू।
13“तू अपने पड़ोसी पर अंधेर न करना और न उसे लूटना। मजदूर की मजदूरी रात भर अर्थात् प्रातःकाल तक तेरे पास न रहने पाए।
14बहरे व्यक्ति को तू शाप न देना और न अन्धे के आगे ठोकर रखना, वरन् अपने परमेश्वर का भय मानना। मैं यहोवा हूं
15“न्याय चुकाने में अन्याय न करना। न तो दरिद्र का पक्ष लेना और न बड़े मनुष्य का मुंह देखा विचार करना, परन्तु सच्चाई के साथ अपने पड़ोसी का न्याय चुकाना।
16तू अपने लोगों मे लुतराई करते न फिरना और न अपने पड़ोसी की हत्या के लिए युक्तियां बनाना। मैं यहोवा हूं
17“तू अपने मन में अपने जाति-भाई से बैर न रखना। अपने पड़ोसी को अवश्य डांटना, नहीं तो तू भी उसके अधर्म का दोषी ठहरेगा।
18तू अपना बदला न लेना और न अपने जाति-भाइयों से वैमनस्य रखना, परन्तु अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना, मैं यहोवा हू।
19“मेरी विधियों का पालन किया करना। तू अपने पालतू पशुओं को भिन्न जाति के पशुओं से मेल न खाने देना, अपने खेत में दो प्रकार के बीज एक साथ न बोना, और न दो प्रकार के मिले हुए सूत के वस्त्र पहनना।
20यदि कोई ऐसी स्त्री के साथ सम्भोग करे जो दासी हो और किसी दूसरे पुरफ़ष की मंगेतर हो, और न तो दाम देकर छुड़ाई गई और न स्वतंत्र की गई हो, तो उन दोनों को दण्ड दिया जाए, परन्तु मृत्यु-दण्ड नहीं, क्योंकि वह स्त्री स्वतंत्र न थी।
21और वह पुरफ़ष मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के पास दोषबलि ले आए अर्थात् दोषबलि के लिए एक मेढ़ा ले आए।
22और याजक उसके दोषबलि के मेढ़े से उसके लिए यहोवा के सामने प्रायश्चित्त करे, तब जो पाप उसने किया है वह उसके लिए क्षमा किया जाएगा।
23“जब तुम उस देश में प्रवेश करके विभिन्न प्रकार के फल के वृक्ष लगाओ तो उनके फलों को वर्जित समझना। तीन वर्ष तक वे तुम्हारे लिए वर्जित ठहरें और खाए न जाए।
24और चौथे वर्ष वृक्ष के सब फल पवित्र ठहरें और यहोवा के लिए स्तुति की भेंट हो।
25तब पांचवे वर्ष से तुम उसका फल खाने लगना जिससे तुम्हारे लिए फलों की वृद्धि हो। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हू।
26“तुम किसी भी चीज को लहू के साथ न खाना और न जादू-टोना करना या शकुन विचारना।
27तुम अपने सिर के बाल गोल न मुड़ाना और न अपनी दाढ़ी के किनारों को बिगाड़ना।
28तुम मृतकों के कारण अपने शरीर को न काटना और न अपने ऊपर कुछ गुंदवाना। मैं यहोवा हू।
29“तू अपनी पुत्री को वेश्या बनाकर अपवित्र न करना, ऐसा न हो कि देश में वेश्यावृति फैल जाए और सम्पूर्ण देश व्यभिचार से भर जाए।
30तुम मेरे सब्त के दिनों को मानना और मेरे पवित्रस्थान का आदर करना। मैं यहोवा हू।
31“ओझाओं और भूतसिद्धि करने वालों के पास न जाना और न उनकी खोज करना कि उनके द्वारा अशुद्ध हो जाओ। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हू।
32“सफेद बाल वालों के सामने उठ खड़े होना और वृद्ध का आदर करना, और अपने परमेश्वर का भय मानना। मैं यहोवा हू।
33“यदि कोई परदेशी तुम्हारे देश में तुम्हारे साथ रहता हो तो उसके साथ अन्याय न करना।
34जो परदेशी तुम्हारे साथ रहता हो वह तुम्हारे लिए देशी के समान ठहरे। उससे अपने ही समान प्रेम करना, क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी थे। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हू।
35“तुम न्याय करने में, तौल में, और नापने में कुटिलता न करना।
36सच्चा तराजू, धर्म के बांट, सच्चा एपा, और धर्म का हीन तुम्हारे पास रहे। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ जो तुमको मिस्र देश से निकाल ले आया।
37इसलिए तुम मेरी सब विधियों और सब नियमों को मानना और उनका पालन किया करना। मैं यहोवा हू।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)