पुराना नियम · लैव्यवस्था · अध्याय 18 / 27
लैव्यवस्था 18
1फिर यहोवा ने मूसा से कहा,
2“इस्राएलियों से बात कर और उनसे कहः मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हू।
3तुम जिस देश में रहते थे अर्थात् मिस्र देश के से कार्य न करना और न जिस देश में मैं तुम्हें लिए जाता हूं अर्थात् कनान देश के से कार्य करना। उन देशों की विधियों पर न चलना।
4तुमको मेरे ही नियमों को मानकर और मेरी ही विधियों का पालन करके उनके अनुसार चलना होगा।। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हू।
5अतः तुम मेरे नियमों और मेरी विधियों को मानना! जो व्यक्ति उनका पालन करेगा वह उनके द्वारा जीवित रहेगा। मैं यहोवा हूं ।
6“तुममें से कोई अपनी किसी निकट कुटुम्बिनी का तन उघाड़ने को उसके पास न जाए। मैं यहोवा हूं
7तू अपनी मां का तन जो मानो तेरे पिता का ही तन है, न उघाड़ना। वह तो तेरी मां है, इसलिए तू उसका तन न उघाड़ना।
8तू अपने पिता की पत्नी का भी तन न उघाड़ना; वह तो मानो तेरे पिता का ही तन है।
9तू अपनी बहन के तन को, चाहे वह तेरे पिता की पुत्री हो, चाहे तेरी मां की, चाहे वह घर में उत्पन्न हुई हो, चाहे कहीं और, उसका तन न उघाड़ना।
10तू अपनी पोती या अपनी नातिन का तन न उघाड़ना, क्योंकि उनका तन मानो तेरा ही है।
11तेरे पिता की पत्नी से उत्पन्न पुत्री जो तेरे पिता से उत्पन्न हुई है, तेरी बहन ही है। तू उसका तन न उघाड़ना।
12तू अपनी फूफी का तन न उघाड़ना, क्योंकि उसका तेरे पिता के साथ खून का सम्बन्ध है।
13तू अपनी मौसी का तन न उघाड़ना, क्योंकि उसका तेरी मां के साथ खून का सम्बन्ध है।
14तू अपने चाचा के तन को न उघाड़ना अर्थात् उसकी पत्नी के पास न जाना, वह तो तेरी चाची है।
15तू अपनी बहू का तन न उघाड़ना, वह तो तेरे पुत्र की पत्नी है। अतः तू उसके तन को न उघाड़ना।
16तू अपनी भाभी का तन न उघाड़ना, क्योंकि वह तो मानो तेरे भाई का तन है।
17तू किसी स्त्री और उसकी पुत्री दोनों का तन न उघाड़ना, और न तू उसकी पोती या नतिन को लेकर उनमें से किसी के तन को उघाड़ना। उनका परस्पर खून का सम्बन्ध है। ऐसा करना व्यभिचार है।
18तू अपनी पत्नी के जीते जी अपनी साली से विवाह करके उसे उसकी सौत न बनाना कि उसके तन को भी उघाड़े।
19“जब तक कोई स्त्री मासिक धर्म की अशुद्धता में रहे, तू उसके तन को उघाड़ने उसके पास न जाना।
20और तू अपने पड़ोसी की पत्नी से कुकर्म न करना जिससे उसके द्वारा अशुद्ध हो जाए।
21और न तू अपनी सन्तान में से किसी को मोलेक के लिए बलि चढ़ाकर अपने परमेश्वर का नाम अपवित्र ठहराना। मैं यहोवा हू।
22तू किसी पुरफ़ष के साथ सम्भोग न करना जैसे कि स्त्री के साथ। यह तो घृणित कार्य है।
23तू पशुगमन करके अशुद्ध न होना, और न कोई स्त्री किसी पशु के साथ सम्भोग करने की इच्छा से उसके आगे खड़ी हो। यह तो भ्रष्टता है।
24“ऐसे-ऐसे कामों के द्वारा अपने आप को अशुद्ध न करना, क्योंकि इन्हीं सब कार्यो के कारण वे सब जातियाँ जिन्हें मैं तुम्हारे सामने से निकालने पर हूं अशुद्ध हो गई है।
25और उनका देश भी अशुद्ध हो गया है, इस कारण मैं उसके अधर्म का दण्ड उसी को देता हूं जिससे वह देश अपने निवासियों को उगल देता है।
26अतः तुम मेरे नियमों और विधियों को मानना और तुममें से कोई भी चाहे वह देशी हो या तुम्हारे मध्य वास करने वाला परदेशी हो, ऐसा घिनौना काम न करे।
27क्योंकि जो लोग तुमसे पहले इस देश के निवासी थे, उन्होंने ये सब घिनौने काम किए जिससे देश अशुद्ध हो गया है।
28अतः ऐसा न हो कि तुम भी उसे अशुद्ध करो और जिस प्रकार उस देश ने उस जाति को जो तुमसे पहले वहां थी उगल दिया, उसी प्रकार वह तुम्हेें भी उगल दे।
29जितने लोग इन घृणित कार्यों में से किसी एक को करें वे सब अपने लोगों में से नष्ट किए जाए।
30इस प्रकार तुम लोग मेरी आज्ञा का पालन करते रहना और जो-जो घृणित रीतियां तुमसे पहले प्रचलित थीं उनमें से किसी पर न चलना कि उनके द्वारा अशुद्ध हो जाओ। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हू।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)