पुराना नियम · लैव्यवस्था · अध्याय 26 / 27
लैव्यवस्था 26
1“तुम अपने लिए मूर्तियां न बनाना, न अपने लिए कोई प्रतिमा या लाट खड़ी करना, और न तुम अपने देश में कोई नक्काशीदार पत्थर रखना कि उसके सामने दण्डवत् करो, क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हू।
2तुम मेरे सब्तों को मानना और मेरे पवित्रस्थान का आदर करना, मैं यहोवा हू।
3यदि तुम मेरी विधियों पर चलो और मेरी आज्ञाओं को मानकर उनका पालन करो,
4तो मैं तुम्हारे लिए ठीक ट्टतु में वर्षा भेजूँंगा जिससे भूमि अपनी उपज उपजाएगी और मैदान के वृक्षों में फल लगेंगे।
5यहां तक कि तुम अंगूर तोड़ने के समय तक दावनी करते रहोगे, और जोतने-बोने के समय तक अंगूर एकत्र करोगे। इस प्रकार तुम भर पेट भोजन करोगे और अपने देश में सुरक्षित रहोगे।
6मैं देश में शान्ति स्थापित करूंगा जिससे तुम सोओगे और तुम्हारा कोई डराने वाला न होगा। मैं देश में से हानिकारक हिंसक पशुओं को भी नष्ट करूंगा और तुम्हारे देश पर कोई तलवार नहीं चलाएगा।
7परन्तु तुम अपने शत्रुओं का पीछा करोगे और वे तलवार से तुम्हारे सामने मारे जाएंगे,
8तुम में से पांच जन सौ को और सौ जन दस हजार को खदेड़ेंगे, और तुम्हारे शत्रु तुम्हारे सामने तलवार से मारे जाएंगे।
9अतः मैं तुम्हारी ओर उन्मुख होऊँगा और तुमको फलवन्त करूँगा और संख्या में बढ़ाऊँगा और तुम्हारे साथ अपनी वाचा को पक्की करूंगा।
10और तुम रखे हुए पुराने अनाज को खाओगे और नए के कारण पुराने को बाहर निकालोगे।
11इसके अतिरिक्त, मैं तुम्हारे मध्य अपना निवासस्थान बनाऊँगा और मेरा आत्मा तुम से घृणा नहीं करेगा।
12और मैं तुम्हारे मध्य चला-फिरा करूंगा और तुम्हारा परमेश्वर होऊँगा और तुम मेरी प्रजा होगे।
13मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुमको मिस्र देश से इसलिए निकाल लाया कि तुम उनके दास न बने रहो और मैंने तुम्हारे जुए को तोड़ दिया है और तुमको सीधा खड़ा करके चलाया है।
14“परन्तु यदि तुम मेरी नहीं मानोगे और इन सब आज्ञाओं का पालन नहीं करोगे,
15और इसके विपरीत यदि तुम मेरी विधियों को तुच्छ जानोगे और यदि तुम्हारी आत्मा मेरे नियमों से घृणा करे जिससे तुम मेरी आज्ञाओं का पालन न करो और इस प्रकार मेरी वाचा को तोड़ो!
16तो इसके बदले मैं तुमसे यह करूंगा कि मैं तुम्हें सहसा आतंक, क्षय रोग और ज्वर से पीड़ित करूंगा जिससे तुम्हारी आंखें जाती रहेंगी और तुम्हारा प्राण अति खेदित होगा, और तुम्हारा बीज बोना भी व्यर्थ होगा क्योंकि उसको तुम्हारे शत्रु खाएंगे।
17मैं तुमसे विमुख हो जाऊँगा जिससे तुम अपने शत्रुओं से हार जाओगे और जिनसे तुम घृणा करते हो वे ही तुम पर प्रभुता करेंगे, और जब तुमको कोई खदेड़ता भी न होगा तब भी तुम भागोगे।
18यदि इन बातों के बाद भी तुम मेरी न मानो तो मैं तुम्हारे पापों के लिए तुमको सातगुणा दण्ड दूँगा।
19और मैं तुम्हारे बल के गर्व को तोड़ डालूँगा, मैं तुम्हारे लिए आकाश को लोहे के समान और भूमि को कांसे के समान बना दूँगा,
20और तुम्हारा परिश्रम व्यर्थ जाएगा, क्योंकि तुम्हारी भूमि अपनी उपज न उपजाएगी और न मैदान के वृक्षों में फल लगेंगे।
21तब यदि तुम मेरे विरफ़द्ध चलते ही रहो और मेरा कहना न मानो, तो मैं तुम्हारे पापों के अनुसार तुम्हारे ऊपर सातगुना विपत्ति डालूँगा।
22और मैं तुम्हारे बीच जंगली जानवरों को छोड़ दूँगा जो तुम्हारे बच्चों को उठा ले जाएंगे और तुम्हारे पालतु पशुओं को मार डालेंगे और तुम्हारी संख्या इतनी कम कर देंगे कि तुम्हारी सड़कें सूनी हो जाएंगी।
23“और यदि तुम इन बातों से भी मेरी ओर न फिरो और मेरे विरफ़द्ध चलते रहो
24तो मैं भी तुम्हारे विरफ़द्ध चलूँगा और मैं, हां, मैं ही तुम्हारे पापों के कारण तुमको सातगुणा दण्ड दूँगा।
25मैं तुम्हारे ऊपर तलवार भी चलवाऊँगा जो वाचा तोड़ने का बदला चुकाएगी। और जब तुम अपने-अपने शहरों में इकट्ठे होेगे, मैं तुम्हारे मध्य महामारी भेजूँगा जिससे कि तुम अपने शत्रुओं के हाथ में कर दिये जाओ।
26जब मैं तुम्हारी रोटी के आधार को तोड़ दूँगा, तब दस स्त्रियां एक ही तन्दूर पर रोटी बनाएंगी और वे तुम्हें तौल-तौलकर रोटी देंगी जिससे तुम खाओगे तो, परन्तु तृप्त नहीं होगे।
27“इतना सब होने पर भी यदि तुम मेरी न सुनो और मेरे विरफ़द्ध चलते रहो
28तब मैं कुपित होकर तुम्हारे विरफ़द्ध चलूँगा और मैं, हां, मैं ही तुम्हारे पापों का सातगुणा दण्ड दूँगा।
29तुमको अपने पुत्रों और अपनी पुत्रियों का मांस खाना पड़ेगा।
30और मैं तुम्हारे पूजा के ऊँचे स्थानों को गिरा दूँगा और तुम्हारी धूप-वेदियों को नष्ट कर दूँगा और तुम्हारे शवों को तुम्हारी मूर्तियों के अवशेषों पर डाल दूँगा। मेरा आत्मा तुमसे घृणा करेगा।
31मैं तुम्हारे नगरों को भी खंडहर बना दूँगा और तुम्हारे पवित्रस्थान उजाड़ दूँगा और तुम्हारी सुखदायक सुगन्धबलि को ग्रहण नहीं करूंगा।
32और मैं देश को निर्जन कर दूँगा और उसमें रहने वाले तुम्हारे शत्रु इस बात से आश्चर्यचकित होंगे।
33और मैं तुमको जाति-जाति के मध्य तितर-बितर करूंगा। तुम्हारा देश निर्जन हो जाएगा और तुम्हारे नगर उजाड़ हो जाएंगे।
34“और यह भूमि जब तक उजाड़ रहेगी और तुम शत्रुओं के देश में रहोगे तब तक वह अपना विश्राम मानती रहेगी तब ही इस देश को विश्राम मिलेगा और वह अपने विश्रामकालों को मानता रहेगा।
35और वह जितने दिन निर्जन रहेगा वह विश्राम करेगा, जो उसे तुम्हारे वहां रहते विश्राम-कालों में प्राप्त नहीं हुआ था।
36तुममें से जो बचे रहेंगे और अपने शत्रुओं के देश में रहेंगे उनके हृदयों को मैं कायर बना दूँगा। उड़ती हुई पत्ती के खड़कने की आवाज से वे भागेंगे। जबकि कोई उनका पीछा भी नहीं करता होगा वे ऐसे भागेंगे जैसे कोई तलवार के भय से भागता हो, और गिर-गिर पड़ेंगे।
37वे एक दूसरे से टकरा-टकराकर ऐसे गिरेंगे मानो कोई तलवार से बचने के लिए भाग रहा हो, यघपि कोई भी उनका पीछा नहीं करता, और शत्रुओं का सामना करने के लिए तुममें सामर्थ्य नहीं रहेगा।
38तब तुम अन्य जातियों के सामने नष्ट हो जाओगे। तुम्हारे शत्रुओं की भूमि तुमको खा जाएगी।
39अतः तुममें जो बच जाएंगे, वे अपने शत्रुओ के देशों में अपने अधर्म के कारण गल जाएंगे और अपने पूर्वजों के अधर्म के कारण भी वे उन्हीं के समान गल जाएंगे।
40“यदि वे अपने और अपने पूर्वजों के अधर्म का अंगीकार करें जिसे उन्होंने अपने विश्वासघात और शत्रुता के कारण मेरे विरफ़द्ध किया है-
41मैं भी उनके विरफ़द्ध शत्रुता का व्यवहार कर रहा था कि उनको उनके शत्रुओं के देश में ले आया-यदि उनका ख़तनारहित हृदय नम्र बन जाए जिससे कि वे अपने अधर्म के दण्ड को स्वीकार करें,
42तब मैं याकूब के साथ बांधी गई अपनी वाचा को स्मरण करूंगा, और जो वाचा मैंने इसहाक के साथ और वैसे ही जो वाचा मैंने इब्राहिम के साथ बांधी थी, उसको भी स्मरण करूंगा और मैं इस देश को भी स्मरण करूंगा।
43क्योंकि उनके द्वारा उस भूमि का परित्याग किया जाएगा और जब तक वह भूमि उनके न रहने से निर्जन रहेगी वह अपने विश्राम कालों को मानती रहेगी इसी समय वे अपने अधर्म के दण्ड को स्वीकार करेंगे, क्योंकि उन्होंने मेरे नियमों का उल्लंघन किया और उनकी आत्माओं को मेरी व्यवस्था से घृणा हो गई थी।
44इतने पर भी जब वे अपने शत्रुओं के देश में होंगे, मैं उनको त्याग नही दूँगा और न ही उनसे ऐसी घृणा करूंगा कि उनके साथ बांधी गई अपनी वाचा को तोड़कर उनका सर्वनाश कर दूँ, क्योंकि मैं उनका परमेश्वर यहोवा हू।
45परन्तु मैं उनके लिए उनके पूर्वजों के साथ बांधी गई वाचा को स्मरण करूंगा जिनको मैं अन्य जातियों के देखते हुए मिस्र देश से बाहर निकाल लाया जिससे कि मैं उनका परमेश्वर ठहरूँ। मैं यहोवा हू।”
46यही वे विधियाँ, नियम और व्यवस्था हैं जिन्हें यहोवा ने सीनै पर्वत पर अपने तथा इस्राएलियों के मध्य मूसा के द्वारा स्थापित की थी।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)