पुराना नियम · लैव्यवस्था · अध्याय 25 / 27
लैव्यवस्था 25
1फिर यहोवा ने सीनै पर्वत पर मूसा से कहा,
2“इस्राएलियों से कह कि जब तुम उस देश में पहुँचो जो मैं तुमको दूँगा, तब भूमि को यहोवा के नाम से सब्त का विश्राम मिला करे।
3छः वर्ष तक अपना-अपना खेत बोया करना और अपनी-अपनी दाख की बारी को छांटना और उनका फल इकट्ठा करना,
4परन्तु सातवां वर्ष भूमि के लिए परम विश्राम का हो। यह यहोवा के नाम से सब्त हो। इसमें न तो अपना खेत बोना, और न अपनी दाख की बारी छांटना।
5फसल काटने के बाद अपने खेत में उगे हुए अन्न को न काटना और न अपनी उन दाखलताओं के अंगूरों को इकट्ठा करना जो छांटी नहीं गई हो। यह भुमि के लिए परम विश्राम का वर्ष होगा।
6भूमि के विश्रामकाल की उपज से तुमको तथा तुम्हरे दास-दासी, मजदूर और परदेशी अर्थात् तुम्हारे साथ रहने वाले अन्य सभी लोगों को भोजन मिलेगा,
7और तुम्हारे देश के सब पशुओं और जीव-जन्तुओं को भी सारी उपज खाने के लिए उपलब्ध होगी।
8“तुम सात विश्राम वर्ष अर्थात् सात गुणा सात वर्ष गिनना जिससे तुम्हारे पास वर्षों में कुल सात सब्त अर्थात् उनचास वर्ष हो।
9तब तुम सातवें महीने के दसवें दिन अर्थात् प्रायश्चित्त के दिन अपने सारे देश में चारों ओर नरसिंगा फुंकवाना।
10इस प्रकार तुम पचासवें वर्ष को पवित्र मानना और देश के समस्त निवासियों के छुटकारे की घोषणा करना। यह वर्ष तुम्हारे लिए जुबली कहलाएगा। इसमें तुममें से प्रत्येक व्यक्ति अपनी निज भूमि और अपने निज परिवार में लौटे।
11तुम्हारे लिए यह पचासवां वर्ष जुबली का हो। तुम न तो बोना, न जो कुछ अपने आप उगे उसे काटना, और न बिना छँटी दाखलताओं से अंगूर तोड़ना।
12वह जुबली का वर्ष होगा। वह तुम्हारे लिए पवित्र होगा। उस वर्ष तुम उपज खेत से ही ले लेकर खाना।
13“इस जुबली वर्ष में तुम अपनी-अपनी निज भूमि को लौट जाना।
14यदि तुम अपने मित्र को कुछ बेचो या मित्र के हाथ से कुछ खरीदो तो एक दूसरे के साथ अन्याय न करना।
15जुबली के पश्चात् जितने वर्ष व्यतीत हुए हों उनकी गिनती के अनुसार तू अपने मित्र से भूमि खरीदना। वह उसे उपज के वर्षों की गिनती के अनुसार बेचे।
16जितने अधिक वर्ष शेष रहें उतना अधिक मूल्य बढ़ाना, और जितने कम वर्ष रहें उतना ही मूल्य घटाना। वर्षों की गिनती के अनुसार वह उनकी फसल तुमको बेचेगा।
17अतः तुम एक दूसरे के साथ अन्याय न करना, परन्तु अपने परमेश्वर का भय मानना। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हू।
18“इस प्रकार तुम मेरी विधियों को मानना और मेरे नियमों का यत्न से पालन करना कि तुम देश में सुरक्षित बसे रहो।
19फिर भूमि अपनी उपज उपजाया करेगी जिससे तुम पेट भर खाओ और उसमें सुरक्षित बसे रहो।
20परन्तु यदि तुम कहो कि हम न तो बोएंगे और न अपनी उपज इकट्ठा करेंगे तो सातवें वर्ष क्या खाएंगे?
21तो जान लो कि मैं छठवें वर्ष में तुम्हारे ऊपर ऐसी आशीष उंडेलूँगा कि भूमि की उपज तीन वर्ष के लिए पर्याप्त होगी।
22तुम जब आठवें वर्ष में बोआई करोगे तो पुरानी उपज में से खाते रहोगे और जब तक नवें वर्ष की नई उपज न आए तब तक पुरानी उपज में से खाते रहोगे।
23“भूमि को सदा के लिए न बेचा जाए, क्योंकि भूमि मेरी है और तुम मेरे साथ केवल परदेशी और प्रवासी हो।
24इस प्रकार तुम्हारे उत्तराधिकार के सारे देश में मूल्य चुकाकर भूमि को छुड़ा लेने का प्रबन्ध करना।
25और यदि तुम्हारा भाई ऐसा दरिद्र हो जाए कि उसे अपनी निज भूमि में से कुछ बेचना पड़े तो उसका जो सबसे निकट कुटुम्बी हो, वह आकर उस भूमि को जिसे उसके भाई ने बेच डाला है, छुड़ा ले।
26अथवा यदि उस मनुष्य का कोई नातेदार न हो जो उसे छुड़ाए परन्तु वह स्वयं समृद्ध हो जाए जिससे अपने भाग का छुड़ा सके,
27तो वह उसके बेचे जाने के पश्चात् के वर्षों को गिनकर शेष वर्षों की उपज का मूल्य उसको जिसने उसे खरीदा हो, दे और अपनी भूमि पर लौट जाए।
28यदि उसके पास इतना धन न हो कि उसे फिर खरीद सके, तो जो उसने बेच दिया है वह जुबली-वर्ष तक खरीददार के हाथ में रहे परन्तु जुबली-वर्ष में छूट जाए, जिससे वह मनुष्य अपनी भूमि पर लौट सके।
29“इसी प्रकार, यदि कोई मनुष्य शहरपनाह वाले नगर में रहने के घर को बेचे, तो वह उसके बेचे जाने के पश्चात् वर्ष भर के अन्दर उसे छुड़ा सकेगा, अर्थात् पूरे एक वर्ष तक उसे छुड़ाने का अधिकार रहेगा।
30परन्तु यदि वह पूरे एक वर्ष की अवधि में छुड़ाया न जाए, तो उस घर पर जो शहरपनाह के भीतर है, मोल लेने वाले का पीढ़ी से पीढ़ी के लिए स्थायी अधिकार हो जाए, और वह जुबली के वर्ष में न छूटे।
31परन्तु गांवों के घर, जिनके आसपास कोई शहरपनाह नहीं, उनकी गणना खेतों मेंं की जाए। उन पर छुड़ाए जाने का अधिकार लागू होगा और जुबली के वर्ष में वे छुट जाएंगे।
32जहां तक लेवियों के नगरों का सम्बन्ध है, लेवियों को अपने निज भाग के नगरों में घरों को छुड़ाने का स्थायी अधिकार होगा।
33इसलिए जो कुछ लेवियों का है उसे छुड़ाया जा सकता है, और उनके अपने नगरों में बेचा हुआ कोई भी घर जुबली के वर्ष में लौटा दिया जाए, क्योंकि इस्राएलियों के मध्य लेवियों का निज भाग तो उनके घर ही है।
34परन्तु उनके नगरों के चारों ओर के चरागाह न बेचे जाएं, क्योंकि इन पर उनका अधिकार सदा का है।
35“और यदि तुम्हारा कोई भाई कंगाल हो जाए और तुम्हारे सामने दुर्दशा में पड़ जाए तो तुम उसे परदेशी और प्रवासी के समान सम्भालना जिससे वह तुम्हारे साथ रह सके।
36तुम उससे अधिक ब्याज न लेना वरन् अपने परमेश्वर का भय मानना, जिससे तुम्हारे साथ तुम्हारा भाई जीवन निर्वाह कर सके।
37तुम उसको न तो ब्याज पर रफ़पया और न लाभ के विचार से भोजन-वस्तु देना।
38मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तुमको मिस्र देश से इसलिए निकालकर ले आया कि तुम्हें कनान देश दूं और तुम्हारा परमेश्वर ठहरूँ।
39“यदि तुम्हारा कोई भाई तुम्हारे सामने ऐसा दरिद्र हो जाए कि अपने को तुम्हारे हाथ बेच डाले, तो तुम उससे दास की-सी सेवा न करवाना।
40वह जुबली के वर्ष तक एक मजदूर और प्रवासी के समान तुम्हारे संग रहे।
41इसके पश्चात् वह अपने बाल-बच्चों के साथ तुम्हारे पास से निकलकर फिर अपने घराने में चला जाए कि अपने पूर्वजों के निज भाग में लौटकर रहे।
42क्योंकि वे मेरे ही दास हैं जिनको मैं मिस्र देश से निकाल लाया हू। वे दास के समान बेचे न जाए।
43ऐसों पर कठोरता से अधिकार न जताना, परन्तु अपने परमेश्वर का भय मानना।
44तुम्हारे जो दास-दासियां हों वे उन अन्य जातियों में से लिए जाएं जो तुम्हारे चारों ओर रहती है।
45और जो परदेशी तुम्हारे बीच में प्रवास करते हों उनमें से और उनके घरानों में से भी जो तुम्हारे आसपास हों और जो तुम्हारे देश में उत्पन्न हुए हों, उनमें से तुम दास और दासी मोल ले सकते हो, और वे तुम्हारी चल-सम्पत्ति ठहरेंगे।
46और तुम उन्हें अपने बाद अपने पुत्रों के लिए मीरास में दे देना कि वे उनको निज भागस्वरूप मिले। स्थायी दास तुम उन्हीं में से लिया करना, परन्तु अपने इस्राएली भाइयों में से किसी पर कठोरता से अधिकार न जताना।
47“और यदि कोई परदेशी या प्रवासी जो तुम्हारे साथ हो धनी हो जाए, और उसके सामने तेरा भाई दरिद्र होकर अपने आपको उस परदेशी या प्रवासी, अथवा परदेशी के वंश के किसी व्यक्ति के हाथ बेच डाले,
48तो बेचे जाने के बाद उसे फिर छुड़ाए जाने का अधिकार है उसके भाइयों में से कोई भी उसे छुड़ा सकता है,
49या उसका चाचा, चचेरा भाई, या उसका कोई भी कुटुम्बी उसे छुड़ा सकता है, या फिर उसकी दशा सुधर जाए तो वह आप ही अपने को छुड़ा सकता है।
50वह अपने खरीदने वाले के साथ अपने बेचे जाने के वर्ष से जुबली के वर्ष तक की गिनती करे। उसके बेचे जाने का मूल्य वर्षोंर् की गिनती के अनुसार हो अर्थात् उसके साथ उसका मूल्य मजदूर के दिनों के अनुसार होगा।
51यदि बहुत वर्ष शेष हों तो वह उनके अनुसार अपने खरीदे जाने के मूल्य में से छुड़ाने का दाम फेर दे।
52और यदि जुबली के वर्ष तक थोड़े ही वर्ष रह गए हों तो वह उन्हीं के अनुसार उसके साथ अपना हिसाब करे, और अपने छुटकारे का मूल्य उतने ही वर्षों के अनुसार उसे भर दे।
53वह अपने स्वामी के लिए एक वर्ष तक रखे जाने वाले मजदूर के समान रहे और यह तुम्हारे सामने उस पर कठोरता से अधिकार न जताने पाए।
54और यदि वह इन रीतियों के अनुसार छुड़ाया न जाए तो फिर भी जुबली के वर्ष में अपने बाल-बच्चों सहित छूट जाए।
55क्योंकि इस्राएली मेरे ही दास हैं, वे मेरे ही दास हैं जिनकाे मैं मिस्र देश से निकाल लाया हू। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)