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पुराना नियम · लैव्यवस्था · अध्याय 24 / 27

लैव्यवस्था 24

1फिर यहोवा ने मूसा से कहा,

2“इस्राएलियों को आज्ञा दे कि वे तेरे पास कूटकर निकाला हुआ जैतून का शुद्ध तेल प्रकाश के लिए ले आएं जिससे दीपक निरन्तर जलाया जाए।

3हारून उसको मिलापवाले तम्बू में साक्षीपत्र के बीच वाले पर्दे के बाहर यहोवा के सामने संध्या से सवेरे तक निरन्तर सजाकर रखा करे। यह पीढ़ी-पीढ़ी में तुम्हारे लिए सदा की विधि ठहरे।

4वह दीपकों को चोखे सोने के दीवट पर यहोवा के सम्मुख नित्य सजाकर रखा करे।

5“तब तुम मैदा लेकर बारह रोटियां पकवाना। प्रत्येक रोटी में एपा का दो दसवां अंश मैदा हो।

6तुम उनको चोखे सोने की मेज़ पर दो पंक्तियों में यहोवा के सम्मुख रखना। प्रत्येक पंक्ति में छः रोटियां हो।

7और तुम प्रत्येक पंक्ति पर शुद्ध लोबान रखना जिससे यह रोटी के निमित्त स्मरण दिलाने वाला भाग बनकर यहोवा के लिए अग्निबलि ठहरे।

8यह प्रत्येक सब्त के दिन यहोवा के सम्मुख निरन्तर सजाकर रखा जाए। यह इस्राएलियों के लिए सदा की वाचा है।

9ये रोटियां हारून और उसके पुत्रों की होंगी। वे इनको किसी पवित्रस्थान में खाएं, क्योंकि यह हारून के लिए यहोवा की अर्पित की गई अग्निबलि में से सदा के लिए परमपवित्र भाग है।”

10और एक इस्राएली स्त्री का पुत्र जिसका पिता मिस्री था, इस्राएलियों के मध्य चला गया। छावनी में इस्राएली स्त्री का वह पुत्र और एक इस्राएली पुरफ़ष आपस में झगड़ने लगे।

11उस इस्राएली स्त्री के पुत्र ने यहोवा के नाम की निन्दा की और शाप दिया। अतः लोग उसे मूसा के पास ले गए। उसकी मां का नाम शलोमीत था जो दान के गोत्र के दिब्री की पुत्री थी।

12उन्होंने उसे तब तक हवालात में रखा जब तक कि इसके विषय में यहोवा की आज्ञा उन पर प्रकट न हो जाए।

13तब यहोवा ने मूसा से कहा,

14“उस शाप देने वाले को छावनी के बाहर ले जाओ, और जितनों ने उसे शाप देते सुना वे सब अपने हाथ उसके सिर पर रखें, तब मंडली के सब लोग उसका पथराव करे।

15और तू इस्राएलियों से कह कि जो कोई अपने परमेश्वर को शाप दे, वह अपने पाप का दण्ड भोगेगा।

16यहोवा के नाम की निन्दा करने वाला निश्चय ही मार डाला जाए। मंडली के सब लोग निश्चय उसका पथराव करे। चाहे वह देशी हो या परदेशी, यदि कोई परमेश्वर के नाम की निन्दा करे तो वह व्यक्ति मार डाला जाए।

17“और जो किसी मनुष्य का प्राण ले ले, वह निश्चय मार डाला जाए।

18और जो कोई किसी पशु का प्राण ले ले, वह क्षतिपूर्ति करे अर्थात् प्राण के बदले प्राण।

19फिर यदि कोई मनुष्य अपने पड़ोसी को चोट पहुँचाए तो जैसा उसने किया हो वैसा ही उसके साथ भी किया जाए,

20अर्थात् अंग-भंग के बदले अंग-भंग, आँख के बदले आँख, दाँत के बदले दाँत, जैसी चोट उसने किसी मनुष्य को पहुँचाई हो वैसी ही चोट उसको भी पहुँचाई जाए।

21इस प्रकार जो किसी पशु को मार डाले, वह उसके बदले दूसरा दे, परन्तु जो किसी मनुष्य को मार डाले उसको मार डाला जाए।

22जैसा देशी के लिए वैसा परदेशी के लिए तुम्हारा एक-सा न्याय हो, क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हू।”

23तब मूसा ने इस्राएलियों को यह बता दिया, और उन्होंने उस शाप देने वाले को छावनी से बाहर ले जाकर उसका पथराव किया। इस प्रकार जैसा यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी, इस्राएलियों ने वैसा ही किया।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)