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नया नियम · लूका · अध्याय 5 / 24

लूका 5

1एक समय, जबकि भीड़ यीशु को चारों ओर से घेरे हुए परमेश्वर का वचन सुन रही थी, वह गन्नेसरत की झील के किनारे खड़ा हुआ था।

2उसने झील के किनारे लगी हुई दो नावें देखीं, क्योंकि मछुए उनमें से उतरकर अपने-अपने जाल धो रहे थे।

3वह उनमें से एक नाव जो शमौन की थी पर चढ़ गया और उससे कहा कि नाव को किनारे से कुछ दूरी पर हटा ले। तब वह नाव पर बैठकर भीड़ को उपदेश देने लगा।

4जब उसने उपदेश देना समाप्त किया तो शमौन से कहा, “नाव को गहरे पानी में ले चल और मछली पकड़ने के लिए अपने जाल डालो।”

5शमौन ने उत्तर दिया, “हे स्वामी, हमने सारी रात बड़ा परिश्रम किया परन्तु कुछ भी हाथ न लगा; फिर भी तेरे कहने से मैं जाल डालूंगा।”

6जब उन्होंने ऐसा किया तो बड़ी संख्या में मछलियां घेर लाए और उनके जाल फटने लगे।

7इसपर उन्होंने अपने साथियों को जो दूसरी नाव पर थे संकेत किया कि आकर हमारी सहायता करो। और उन्होंने आकर दोनों नावों को यहां तक भर दिया कि वे डूबने लगी।

8पर जब शमौन पतरस ने यह देखा तो वह यीशु के पैरों पर यह कहते हुए गिर पड़ा, “हे प्रभु, मेरे पास से चला जा, क्योंकि मैं पापी मनुष्य हूँ!”

9क्योंकि इतनी मछलियों को घेर लाने के कारण उसे और उसके साथियों को आशचर्य हुआ।

10इसी प्रकार जब्दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना भी जो शमौन के साझीदार थे आशचर्यचकित हुए। यीशु ने शमौन से कहा, “मत डर, अब से तू मनुष्यों को पकड़ा करेगा।”

11जब वे अपनी नावों को किनारे पर लाए तो सब कुछ वहीं छोड़कर उसके पीछे चल पड़े।

12ऐसा हुआ कि जब वह किसी नगर में था तो देखो, वहां कुष्ठ-रोग से ग्रसित एक मनुष्य था। जब उसने यीशु को देखा तो मुंह के बल गिरकर उससे यह कहते हुए अनुनय-विनय करने लगा, “हे प्रभु, यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।”

13उसने अपना हाथ बढ़ाया और उसे छूकर कहा, “मैं चाहता हूँ-तू शुद्ध हो जा।” और तुरन्त उसका कुष्ठ-रोग चला गया।

14उसने उसे आज्ञा दी किसी से न कहना, “परन्तु जाकर अपने आप को याजक को दिखा और अपने शुद्ध हो जाने के विजय में जैसा मूसा ने आज्ञा दी है, भेंट चढ़ा कि इससे उन पर गवाही हो।”

15परन्तु उसकी चर्चा दूर-दूर तक फैलती चली जा रही थी, और बड़ी भीड़ उसकी सुनने और अपनी बीमारियों से चंगाई पाने के लिए इकट्ठी हो रही थी।

16परन्तु वह स्वयं प्रायः निर्जन स्थान में चुपचाप चला जाता और प्रार्थना किया करता था।

17एक दिन की बात है कि वह उपदेश दे रहा था, और कुछ फरीसी और व्यवस्था के शिक्षक वहां बैठे थे जो गलील और यहूदिया के प्रत्येक गांव तथा यरूशलेम से आए थे, और चंगा करने के लिए प्रभु की सामर्थ्य उसके साथ थी।

18और देखो, कुछ लोग लकवे के मारे हुए एक मनुष्य को खाट पर उठाकर ला रहे थे। वे उसे भीतर लाकर यीशु के सामने रखने का प्रयत्न कर रहे थे।

19भीड़ के कारण उसे भीतर लाने का जब कोई उपाय न मिला तो उन्होंने छत पर चढ़ कर और खपरैल हटाकर चारपाई सहित उसे बीच में यीशु के ठीक सामने उतार दिया।

20उनका विश्वास देखकर उसने कहा, “मित्र, तेरे पाप क्षमा हुए।”

21तब शास्त्री और फरीसी तर्क-वितर्क करके कहने लगे, “यह मनुष्य कौन है जो परमेश्वर की निन्दा करता है? परमेश्वर को छोड़ और कौन पापों को क्षमा कर सकता है?”

22पर यीशु ने उनके तर्क-वितर्क को जानकर उत्तर दिया, “तुम अपने मनों में क्यों तर्क कर रहे हो?

23क्या कहना सरल है, ‘तेरे पाप क्षमा कर दिए गए’ अथवा यह कि ‘उठ और चल-फिर’?

24परन्तु इसलिए कि तुम जान जाओ कि मनुष्य के पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है,” उसने लकवे के रोगी से कहा, “मैं तुझसे कहता हूँ उठ, और अपनी खाट उठाकर घर चला जा।”

25वह तत्काल उनके सामने उठ खड़ा हुआ, और जिस खाट पर वह पड़ा हुआ था उसे उठाकर परमेश्वर की महिमा करते हुए घर चला गया।

26वे सबके-सब अचम्भे में पड़कर परमेश्वर की महिमा करने और अत्यन्त भयभीत होकर कहने लगे, “आज हमने अनोखी बातें देखी हैं!”

27इसके बाद वह बाहर गया और उसने लेवी नामक एक चुंगी लेने वाले को चुंगी-चौकी पर बैठे देखा और उसने उससे कहा, “मेरे पीछे आ।”

28इस पर वह सब कुछ छोड़कर उठा और उसके पीछे चल पड़ा।

29तब लेवी ने अपने घर पर उसके लिए एक बड़ा भोज दिया और वहां पर चुंगी लेने वालों तथा अन्य लोगों की जो उसके साथ भोजन करने बैठे थे, एक बड़ी भीड़ थी।

30इसपर फरीसी और उनके शास्त्री उसके चेलों से यह कहकर कुड़कुड़ाने लगे, “तुम चुंगी लेने वालों और पापियों के साथ क्यों खाते-पीते हो?”

31यीशु ने उत्तर दिया, “भले-चंगों को चिकित्सक की आवश्यकता नहीं परन्तु रोगियों को होती है।

32मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को पश्चात्ताप करने के लिए बुलाने आया हूँ।”

33उन्होंने उससे कहा, “यूहन्ना के चेले प्रायः उपवास रखते और प्रार्थना किया करते हैं और फरीसियों के चेले भी ऐसा ही करते हैं, पर तेरे चेले तो खाते-पीते है।”

34यीशु ने उनसे कहा, “जब तक दूल्हा उनके साथ है, क्या तुम उसके बरातियों से उपवास करवा सकते हो?

35परन्तु वे दिन आएंगे जबकि दूल्हा उनसे छीन लिया जाएगा। तब उन दिनों में वे उपवास करेंगे।”

36उसने उनसे एक दृष्टान्त भी कहाः “कोई भी मनुष्य नए वस्त्र में से टुकड़े फाड़कर पुराने वस्त्र में पैवन्द नहीं लगाता, अन्यथा नया तो फटेगा ही पर पुराने वस्त्र पर नया पैवन्द मेल भी नहीं खाएगा।

37और कोई नया दाखरस पुरानी मशकों में नहीं भरता, अन्यथा नया दाखरस मशकें फाड़कर बह जाएगा और मशकें नष्ट हो जाएंगी।

38पर नए दाखरस को नई मशकों में ही भरना चाहिए।

39पुराना दाखरस पीकर कोई नए की इच्छा नहीं करता, क्योंकि वह कहता है, “पुराना ही अच्छा है’।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)