मरकुस 12:30
और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे हृदय, और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि और अपनी सारी शक्ति से प्रेम करना।’
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: मरकुस 12
27वह मृतकों का नहीं, परन्तु जीवितों का परमेश्वर है। तुम बड़ी भूल में पड़े हो।”
28शास्त्रियों में से एक ने आकर उन्हें वाद-विवाद करते सुना, और यह जानकर कि उसने कैसे सुन्दर ढंग से उन्हें उत्तर दिया है, उससे पूछा, “सबसे प्रमुख आज्ञा कौन-सी है?”
29यीशु ने उत्तर दिया, “प्रमुख आज्ञा यह हैः ‘हे इस्राएल, सुन, प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है,
30और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे हृदय, और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि और अपनी सारी शक्ति से प्रेम करना।’
31और दूसरी यह है, ‘तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करना।’ इनसे बढ़कर कोई और आज्ञा नही।”
32शास्त्री ने उससे कहा, “हे गुरु, बिल्कुल ठीक, तूने सच ही कहा कि वह एक ही है; और उसको छोड़ कोई दूसरा नहीे;
33और उससे सारे हृदय, सारी बुद्धि, और सारी शक्ति से प्रेम करना, और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करना, सारे होमबलि और बलिदानों से बढ़कर है।”
संबंधित पद
- व्यवस्थाविवरण 6:5
तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, अपने सारे प्राण, तथा अपनी सारी शक्ति से प्रेम कर।
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