नया नियम · मरकुस · अध्याय 2 / 16
मरकुस 2
1कई दिनों के पश्चात् जब वह फ्रिफ़र कफरनहूम लौटा तो सुना गया कि वह घर में है।
2और बहुत से लोग एकत्र हो गए, यहां तक कि द्वार के पास भी जगह नहीं थी, और वह उन्हें वचन सुना रहा था।
3और लोग लकवे के एक रोगी को चार मनुष्यों द्वारा उठवाकर उसके पास लाए।
4पर जब भीड़ के कारण उसके पास तक न पहुंच सके, तो वे उस छत को जहां वह था हटाने लगे; और जब उन्होंने वहाँ जगह बना ली, तो उस खाट को जिस पर लकवे का रोगी पड़ा था, नीचे उतार दिया।
5और यीशु ने उनके विश्वास को देखकर लकवे के उस रोगी से कहा, “हे पुत्र, तेरे पाप क्षमा हुए।”
6वहां पर कुछ शास्त्री बैठे हुए अपने-अपने मन में तर्क-वितर्क कर रहे थे,
7यह मनुष्य ऐसा क्यों बोलता है? यह तो परमेश्वर की निन्दा करता है; परमेश्वर के अतिरिक्त और कौन पाप क्षमा कर सकता है?
8यीशु ने तुरन्त अपने आत्मा में यह जानकर कि वे अपने मन में इस तरह तर्क-वितर्क कर रहे हैं, उनसे कहा, “तुम क्यों अपने-अपने मन में इन बातों के विषय तर्क कर रहे हो?”
9सहज क्या है, इस लकवे के रोगी से यह कहना कि, ‘तेरे पाप क्षमा हुए’ या यह कि, ‘उठ और अपनी खाट उठाकर चल’?
10परन्तु इसलिए कि तुम जानो कि मनुष्य के पुत्र को इस पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है,” उसने लकवे के रोगी से कहा,
11“मैं तुझसे कहता हूँ, ‘उठ, अपनी खाट उठा और घर जा’।”
12वह उठा और तुरन्त अपनी ख्ााट उठाकर सब लोगों के देखते बाहर चला गया; और वे सब चकित हुए और परमेश्वर की महिमा करते हुए कहने लगे, “ऐसा तो हमने कभी नहीं देखा।”
13वह फ्रिफ़र बाहर निकलकर सागर-तट पर गया, और बड़ी भीड़ उसके पास आने लगी, और वह उन्हें उपदेश देने लगा।
14जाते समय उसने हलफ्रफ़ई के पुत्र लेवी को चुंगी-चौकी में बैठे देखा, और उसने उससे कहा, “मेरे पीछे आ।” वह उठा और उसके पीछे चल दिया।
15फिर ऐसा हुआ कि जब वह उसके घर में भोजन कर रहा था तो अनेक चुंगी लेने वाले और पापी भी यीशु और उसके चेलों के साथ भोजन कर रहे थे; क्योंकि वे बहुत थे, और उसके पीछे चल रहे थे।
16जब फ्रफ़रीसियों में से कुछ शास्त्रियों ने देखा कि वह पापियों और चुंगी लेने वालों के साथ भोजन कर रहा है तो उसके चेलों से कहने लगे, “वह चुंगी लेने वालों और पापियों के साथ क्यों खाता-पीता है?”
17यह सुनकर यीशु ने उनसे कहा, “भले-चंगों को चिकित्सक की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है। मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूँ।”
18यूहन्ना के चेले और फ्रफ़रीसी उपवास किया करते थे; और वे आकर उससे कहने लगे, “यूहन्ना के चेले और फ्रफ़रीसियों के चेले तो उपवास रखते हैं, परन्तु तेरे चेले क्यों उपवास नहीं रखते?”
19यीशु ने उनसे कहा, “जब तक दूल्हा बरातियों के साथ रहता है तो क्या बराती उपवास करते हैं? जब तक दूल्हा उनके साथ है वे उपवास नहीं कर सकते।
20परन्तु वे दिन आएंगे जब दूल्हा उनसे अलग किया जाएगा, और तब उस दिन वे उपवास करेंगे।
21कोरे कपड़े का पैवन्द पुराने वस्त्र पर कोई नहीं लगाता; नहीं तो पैवन्द उसमें से खींच लेगा अर्थात् नया पुराने में से और वह पहले से भी अधिक फ्रफ़ट जाएगा।
22नए दाखरस को पुरानी मशकों में कोई नहीं भरता, नहीं तो दाखरस मशकों को फ्रफ़ाड़ देगा और दाखरस और मशकें दोनों नष्ट हो जाएंगे; परन्तु नए दाखरस को नई मशकों में भरा जाता है।”
23ऐसा हुआ कि वह सब्त के दिन खेतों में से होकर जा रहा था, और उसके चेले चलते-चलते बालें तोड़ने लगे।
24और फ्रफ़रीसी उससे कहने लगे, “देख, ये ऐसा काम क्यों कर रहे हैं जो सब्त के दिन करना उचित नहीं?”
25तब उसने उनसे कहा, “क्या तुमने कभी यह नहीं पढ़ा कि जब दाऊद और उसके साथियों को भूख लगी और आवश्यकता पड़ी तो दाऊद ने क्या किया?
26उसने कैसे अबियातार महायाजक के समय में, परमेश्वर के भवन में जाकर अर्पण की रोटियां खाई जिनका खाना याजकों को छोड़ और किसी को उचित नहीं, और उसने अपने साथियों को भी दीं?”
27फ्रिफ़र उसने उनसे कहा, “सब्त मनुष्यों के लिए बनाया गया है, न कि मनुष्य सब्त के लिए।
28इसलिए मनुष्य का पुत्र सब्त का भी स्वामी है।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)