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नया नियम · मरकुस · अध्याय 1 / 16

मरकुस 1

1परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह के सुसमाचार का आरम्भ।

2जैसा कि तैयार करेगा;

3जंगल में पुकारने वाले की यशायाह नबी ने लिखा है, देख मैं तेरे यह आवाज़ ‘प्रभु का मार्ग तैयार करो,

4यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला पापों की क्षमा के लिए मन-परिवर्तन के बपतिस्मा का प्रचार करता हुआ जंगल में आया।

5और यहूदिया का सारा प्रदेश और यरूशलेम के समस्त निवासी उसके पास आने, और अपने पापों का अंगीकार करके यरदन नदी में उससे बपतिस्मा लेने लगे।

6यूहन्ना तो ऊंट के रोएं का वस्त्र पहना करता और कमर में चमड़े का कटिबन्ध बान्धा करता तथा टिड्डियां और वनमधु खाया करता था।

7और यह कहते हुए प्रचार किया करता था, “मेरे पश्चात् एक आता है जो मुझसे अधिक सामर्थी है, और मैं इस योग्य भी नहीं कि झुककर उसकी जूती के बन्ध खोलू।

8मैंने तो तुम्हें पानीसे बपतिस्मा दिया है, परन्तु वह तुम्हें पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देगा।”

9उन दिनों ऐसा हुआ कि यीशु ने गलील के नासरत से आकर यूहन्ना से यरदन में बपतिस्मा लिया।

10और जैसे ही वह पानी में से निकला तो उसने आकाश को खुलते हुए और आत्मा को कबूतर की भांति अपने ऊपर उतरते देखाः

11तब स्वर्ग से यह आवाज आईः “तू मेरा प्रिय पुत्र है, मैं तुझसे अति प्रसन्न हूँ।”

12और आत्मा ने तुरन्त उसे जंगल की ओर जाने को प्रेरित किया।

13और चालीस दिन तक जंगल में उसकी परीक्षा शैतान द्वारा होती रही। वह वहां जंगली जन्तुओं के साथ रहा और स्वर्गदूत उसकी सेवा-टहल करते रहे।

14यूहन्ना के बन्दी बना लिए जाने के बाद यीशु परमेश्वर का सुसमाचार सुनाता हुआ गलील में आया

15और यह कहने लगा, “समय पूरा हुआ है, और परमेश्वर का राज्य सन्निकट है, मन फ्रिफ़राओ और सुसमाचार पर विश्वास करो।”

16जब वह गलील सागर के किनारे-किनारे जा रहा था, तो उसने शमौन तथा उसके भाई अन्द्रियास को सागर में जाल डालते देखा, क्योंकि वे मछुए थे।

17यीशु ने उनसे कहा, “मेरे पीछे आओ, और मैं तुम्हें मनुष्यों के मछुए बनाऊंगा।”

18वे तुरन्त जालों को छोड़कर उसके पीछे चल पड़े।

19कुछ आगे बढ़ने पर उसने जब्दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्ना को नाव में जालों को सुधारते देखा।

20उसने तुरन्त उन्हें बुलाया और वे अपने पिता जब्दी को मज़दूरों के साथ नाव पर छोड़कर उसके पीछे चल पड़े।

21फ्रिफ़र वे कफ्रफ़रनहूम में आए, और तुरन्त सब्त के दिन वह आराधनालय मेें जाकर उपदेश देने लगा।

22और लोग उसके उपदेश से चकित हुए क्योंकि वह उन्हें शास्त्रियों के समान नहीं, वरन् अधिकार पूर्वक उपदेश दे रहा था।

23उसी समय उनके आराधनालय में एक मनुष्य था जिसको अशुद्ध आत्मा लगी थी। वह यह कहकर चिल्ला उठी,

24“हे यीशु नासरी, हमें तुझसे क्या काम? क्या तू हमें नाश करने आया है? मैं जानती हूँ तू कौन हैं-परमेश्वर का पवित्र जन!”

25यीशु ने उसे डांटकर कहा, “चुप रह, और उसमें से निकल जा।”

26तब अशुद्ध आत्मा उसको मरोड़कर ऊंचे स्वर से चिल्लाते हुए उसमें से निकल गई।

27वे सब आशचर्यचकित रह गए और आपस में वाद-विवाद करते हुए कहने लगे, “यह क्या बात है? अधिकारपूर्ण नई शिक्षा! वह अशुद्ध आत्माओं तक को आज्ञा देता है, और वे उसकी मानती है।”

28अतः उसके बारे में यह समाचार तुरन्त ही गलील के आसपास के सारे क्षेत्र में फ्रफ़ैल गया।

29वे आराधनालय से निकलने के पश्चात् तुरन्त याकूब और यूहन्ना के साथ शमौन और अन्द्रियास के घर आए।

30वहां शमौन की सास ज्वर से पीड़ित पड़ी थी और उन्होंने तुरन्त उसके विषय में उसे बताया।

31उसने उसके पास आकर उसे हाथ पकड़कर उठाया। उसका ज्वर उतर गया, और वह उनकी सेवा-टहल करने लगी।

32संध्या समय, सूर्यास्त के पश्चात्, लोग सब बीमारों और उनको जिनमें दुष्टात्माएं समाई हुई थीं यीशु के पास लाने लगे।

33और सारा नगर द्वार पर इकट्ठा हो गया।

34उसने बहुतों को जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों से पीड़ित थे, चंगा किया, और बहुत-सी दुष्टात्माओं को निकाला, और वह दुष्टात्माओं को बोलने की अनुमति नहीं देता था, क्योंकि वे उसे जानती थीं कि वह कौन है।

35भोर को जब अन्धेरा ही था वह उठा और बाहर निकलकर एकान्त में गया और वहां प्रार्थना करने लगा।

36तब शमौन और उसके साथी उसको खोजने लगे,

37और उन्होंने उसे पाकर कहा, “सब लोग तुझे ढूँढ़ रहे है।”

38उसने उनसे कहा, “आओ, हम और कहीं आसपास की बस्तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार कर सकूँ, क्योंकि मैं इसीलिए निकला हूँ।”

39अतः वह सारे गलील में उनके आराधनालयों में जाकर प्रचार करता और दुष्टात्माओं को निकालता रहा।

40एक कुष्ठ-रोगी उसके पास आया और उसके सम्मुख घुटने टेककर उससे विनती करके कहने लगा, “यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।”

41उसने उस पर तरस खाकर अपना हाथ बढ़ाया, और उसे छूकर उससे कहा, “मैं चाहता हूँ; शुद्ध हो जा।”

42और तुरन्त उसका कुष्ठ-रोग जाता रहा और वह शुद्ध हो गया।

43फ्रिफ़र उसने कड़ी चेतावनी देकर उसे तुरन्त भेज दिया,

44और उससे कहा, “देख, किसी से कुछ न कहना, परन्तु जाकर अपने आप को याजक को दिखा और शुद्ध होने के विषय में मूसा ने जो कुछ आज्ञा दी है उसे भेंट चढ़ा जिससे उनपर साक्षी हो।”

45परन्तु वह बाहर जाकर इस विषय का यहां तक प्रचार करने लगा कि यीशु अब सार्वजनिक रूप से किसी नगर में प्रवेश न कर सका, परन्तु जंगली स्थानों में रहा, और चारों ओर से लोग उसके पास आते रहे।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)