मत्ती 6:25
इस कारण मैं तुमसे कहता हूँ कि अपने प्राण के लिए यह चिन्ता न करना कि हम क्या खाएंगे या क्या पीएंगे; और न ही अपनी देह के लिए कि क्या पहनेंगे। क्या प्राण भोजन से या देह वस्त्र से बढ़कर नहीं?
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: मत्ती 6
22देह का दीपक आंख है। इसलिए यदि तेरी आंख निर्मल है तो तेरी समस्त देह प्रकाशमान होगी।
23परन्तु यदि तेरी आंख बुरी हो तो तेरी समस्त देह अन्धकारमय होगी। इसलिए जो ज्योति तुझ में है यदि वही अन्धकार है तो यह अन्धकार कैसा घोर होगा!
24कोई भी व्यक्ति दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह या तो एक से बैर और दूसरे से प्रेम करेगा, या एक से घनिष्टता रखेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा। तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।
25इस कारण मैं तुमसे कहता हूँ कि अपने प्राण के लिए यह चिन्ता न करना कि हम क्या खाएंगे या क्या पीएंगे; और न ही अपनी देह के लिए कि क्या पहनेंगे। क्या प्राण भोजन से या देह वस्त्र से बढ़कर नहीं?
26आकाश के पक्षियों को देखो कि वे न तो बोते हैं, न काटते हैं और न ही खलिहानों में इकट्ठा करते है, फिर भी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उनको खिलाता है। क्या तुम्हारा मूल्य उनसे बढ़कर नहीं?
27तुम में से कौन है जो चिन्ता करके अपनी आयु एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?
28वस्त्र के लिए तुम क्यों चिन्ता करते हो? वन के फूलों को देखो कि वे कैसे बढ़ते है! वे न तो परिश्रम करते और न कातते हैं,
संबंधित पद
- फिलिप्पियों 4:6
किसी भी बात की चिन्ता न करो, परन्तु प्रत्येक बात में प्रार्थना और निवेदन के द्वारा तुम्हारी विनती धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख प्रस्तुत की जाए।
- रोमियों 8:32
वह जिसने अपने पुत्र को भी नहीं छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिए दे दिया, तो वह उसके साथ हमें सब कुछ उदारता से क्यों न देगा?
- 1 पतरस 5:7
अपनी समस्त चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि वह तुम्हारी चिन्ता करता है।
- लूका 12:22–31
फिर उसने अपने चेलों से कहा, “इस कारण मैं तुमसे कहता हूँ, अपने जीवन के लिए यह कहकर चिन्ता न करो कि हम क्या खाएंगे; न अपने शरीर के लिए चिन्ता करो कि क्या पहनेंगे।
- मत्ती 6:31
इसलिए यह कहकर चिन्ता न करो, ‘हम क्या खाएंगे?’ अथवा ‘क्या पीएंगे?’ या, ‘हम क्या पहनेंगे?’
Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).