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पुराना नियम · नहेमायाह · अध्याय 1 / 13

नहेमायाह 1

1ऐसा हुआ कि बीसवें वर्ष के किसलेव महीने में मैं शूशन नामक राजधानी में था,

2तब हनानी, जो मेरे भाइयों में से एक था, तथा अन्य कुछ लोग यहूदा से आए, और मैंने उनसे उन बचे और बन्धुवाई से छूटे हुए यहूदियों और यरूशलेम के विषय में पूछा।

3उन्होंने मुझसे कहा, “जो बचे हुए लोग बन्धुवाई से छूटकर उस प्रान्त में रहते हैं वे महाक्लेश और निन्दा सह रहे है। यरूशलेम की शहरपनाह टूटी पड़ी है और उसके नगर-द्वार आग से जला दिए गए है।”

4ऐसा हुआ कि इन बातों को सुनते ही मैं बैठकर रोने लगा और कई दिन तक विलाप करता और स्वर्ग के परमेश्वर के सम्मुख उपवास व प्रार्थना करता रहा।

5और मैंने कहा, “हे स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा, हे महान् और भययोग्य परमेश्वर, तू जो अपने प्रेम रखने और आज्ञापालन करने वालों के लिए अपनी वाचा पूरी करता और उन पर करुणा करता है, मैं तुझसे विनती करता हूं,

6तेरे कान अब ध्यान दें और तेरी आंखे खुली रहें कि मैं तेरा दास जो प्रार्थना इस समय तेरे सम्मुख तेरे दास इस्राएलियों के लिए दिन और रात करता हूं, उसे तू सुन ले। मैं इस्राएलियों के उन पापों का जो हम लोगों ने तेरे विरुद्ध किए हैं, अंगीकार करता हू। मैं और मेरे पिता के घराने दोनों ने पाप किया है।

7“हमने तेरे विरुद्ध बहुत ही अधर्म का व्यवहार किया है कि उन आज्ञाओं, विधियों और नियमों का पालन नहीं किया, जिनकी आज्ञा तूने अपने दास मूसा को दी थी,

8उस वचन को स्मरण कर जिसकी आज्ञा तूने अपने दास मूसा को दी थी; ‘यदि तुम लोग विश्वासघात करोगे तो मैं तुमको देश-देश के लोगों में तितर-बितर कर दूंगा।

9परन्तु यदि तुम मेरी ओर फिरो और मेरी आज्ञाओं को मानकर उनका पालन करो, तो मैं तुममें से तितर-बितर किए गए लोगों को आकाश के छोर से भी इकट्ठा करके उस स्थान में पहुंचाऊंगा जिसे मैंने अपने नाम के निवास के लिए चुन लिया है।’

10वे तेरे दास और तेरी प्रजा के लोग हैं जिनको तूने अपने महान् सामर्थ्य और बलवन्त हाथ के द्वारा छुड़ा लिया है।

11हे प्रभु, मैं तुझसे विनती करता हूं कि तू अपने दास की ओर तथा अपने उन दासों की प्रार्थना पर, जो तेरे नाम का भय मानने से आनन्दित होते हैं, कान लगा, और आज अपने इस दास का काम सफल कर, और इसके प्रति उस मनुष्य के हृदय में दया उत्पन्न कर।” मैं तो राजा का पियाऊ था।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)