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पुराना नियम · गिनती · अध्याय 30 / 36

गिनती 30

1तब मूसा ने इस्राएलियों के गोत्रों के प्रधानों से कहा, “यहोवा ने यह आज्ञा दी हैः

2यदि कोई पुरुष यहोवा की मन्नत माने, या शपथ खाकर अपने आपको किसी बंधन में बांधे, तो वह अपना वचन भंग न करे। जो कुछ उसके मुंह से निकला है, उसी के अनुसार वह करे।

3और जब कोई स्त्री यहोवा की मन्नत माने, और अपनी कुंवारी अवस्था में अपने पिता के घर में अपने आपको किसी शपथ में बांधे,

4और उसका पिता उसकी मन्नत को और उस शपथ को जिससे उसने अपने आपको बांधा है, सुनता है, पर उससे कुछ नहीं कहता है तो वे सब मन्नतें बनी रहें, और जिन शपथों में उसने अपने आपको बांधा है वे सब बनी रहे।

5परन्तु यदि उसका पिता, जिस दिन यह सुने, उसी दिन उसे मना करे तो जितनी मन्नतें उसने मानी हैं, और शपथ खाकर अपने आपको बांधा है, उनमें से एक भी बनी न रहे। यह यहोवा उसे क्षमा करेगा क्याेंकि उसके पिता ने उसे मना किया था।

6“परन्तु यदि वह अपनी मन्नतों या अपने होठों से निकले उतावली के वचन से बंधी हुई हो, और तब किसी पुरुष से विवाह करती है,

7और उसका पति जिस दिन यह सब सुने और सुनकर भी कुछ न कहे तो जितनी मन्नतें और शपथ के द्वारा उसने अपने आपको बांधा है वे बनी रहे।

8परन्तु यदि उसका पति जिस दिन यह सुने, उसी दिन उसे मना करे तो जो मन्नत उसने मानी है अथवा उतावली से कहे हुए अपने होंठों के जिन वचनों में अपने आपको बांधा है, उन सबको वह रद्द कर दे; और यहोवा उस स्त्री को क्षमा करेगा।

9“परन्तु विधवा अथवा तलाकशुदा स्त्री की वे सब बातें जिनसे उसने अपने आपको बांध लिया है, बनी रहे।

10यदि वह स्त्री अपने पति के घर में रहते हुए मन्नत मान चुकी हो अथवा किसी शपथ के द्वारा अपने आपको बांध चुकी हो,

11और उसके पति ने सुनकर उससे कुछ न कहा हो और न मना किया हो तो उसकी सब मन्नतें बनी रहें और प्रत्येक शपथ जिनसे वह अपने आपको बांध चुकी हो वे बनी रहे।

12परन्तु जिस दिन उसका पति सुने, उसी दिन उन सबको रद्द कर दे, तब जो कुछ उसके होंठों से उसकी मन्नतों और उसके बंधनों के विषय में निकला हो, वह बना न रहे; उसके पति ने उन सबको रद्द कर दिया है, और यहोवा उस स्त्री को क्षमा करेगा।

13“प्रत्येक मन्नत और स्वार्थ-त्याग के लिए प्रत्येक शपथ जिससे उसने अपने आपको बांध लिया हो, उन्हें उसका पति चाहे तो रख सकता या रद्द कर सकता है।

14परन्तु यदि उसका पति दिन प्रतिदिन उससे कुछ न कहे तब तो वह उन सब मन्नतों और बंधनों को जिनसे वह बंधी हुई है, मान लेता है; उसने उनको मान लिया है, क्योंकि जिस दिन उसने इन सबको सुना, उस दिन उसने कुछ न कहा।

15परन्तु यदि वह सुनकर उन्हें रद्द कर दे, तो वह उसका दोष स्वयं भोगेगा।”

16पति पत्नी के मध्य और पिता और उसके घर में रहती हुई कुंवारी पुत्री के मध्य, ये ही वे विधियां हैं जिनकी आज्ञा यहोवा ने मूसा को दी।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)