पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 102 / 150
भजन संहिता 102
1हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन! और सहायता के लिए मेरी पुकार तुझ तक पहुंचे।
2मेरे संकट के दिन अपना मुख मुझसे न छिपा; अपना कान मेरी ओर लगा; जिस दिन मैं पुकारूं मुझे शीघ्र उत्तर दे।
3क्याेंकि मेरे दिन धुएं के समान उड़े जाते हैं, और मेरी हड्डियां लुआठी के समान झुलस चुकी है।
4मेरा हृदय घास के समान मुरझाकर सूख गया है, यहां तक कि मैं अपनी रोटी खाना भूल जाता हू।
5मेरे जोर-जोर से कराहने के कारण, मेरा चमड़ा हड्डियों से चिपक गया है।
6मैं जंगल के धनेश के समान हो गया हूँ; मैं खंडहरों के उल्लू जैसा बन गया हूँ।
7मैं लेटे-लेटे जागता रहता हूँ, मैं घर की छत के एकाकी पक्षी के समान हो गया हूँ।
8मेरे शत्रु दिन भर मेरी निन्दा किया करते हैं, मेरे उपहास करने वाले मेरे नाम से शाप देते हैं,
9क्योंकि मैंने रोटी की भांति राख खाई, और आंसू मिलाकर पानी पिया है।
10यह तेरे कोप, हां, तेरे प्रकोप के कारण हुआ क्योंकि तूने मुझे उठाया और फिर पटक दिया।
11मेरे दिन ढलती हुई छाया के समान हैं; और मैं घास के समान मुरझा गया हू।
12परन्तु हे यहोवा, तू सदा विराजमान है; और तेरा नाम पीढ़ी से पीढ़ी तक बना रहता है।
13तू उठकर सिय्योन पर करुणा करेगा; क्योंकि उस पर अनुग्रह करने का समय यही है, हां, ठहराया हुआ समय आ पहुंचा है।
14निश्चय ही तेरे सेवक उसके पत्थरों की चाह करते हैं, और उसकी धूलि पर तरस खाते है।
15इसलिए जाति-जाति के लोग यहोवा के नाम का, और पृथ्वी के सब राजा तेरे प्रताप का भय मानेंगे।
16क्याेंकि यहोवा ने सिय्योन को फिर बनाया है; वह अपनी महिमा में प्रकट हुआ है।
17उसने दीन-हीनों की प्रार्थना पर ध्यान दिया, और उनकी प्रार्थना को तुच्छ नहीं जाना।
18यह आने वाली पीढ़ी के लिए लिखा जाएगा, कि एक जाति जो सृजी जाने को है, वह याह की स्तुति करे।
19क्योंकि उसने अपने पवित्र ऊंचे स्थान से दृष्टि की; हां, यहोवा ने स्वर्ग से पृथ्वी को निहारा है,
20कि बन्दियों का कराहना सुने, और मृत्यु-दण्ड के भागियों को मुक्त करे;
21जिससे कि लोग सिय्योन में यहोवा के नाम का वर्णन, और यरूशलेम में उसकी स्तुति करें;
22उस समय जाति-जाति और राज्य-राज्य के लोग, यहोवा की उपासना करने के लिए एकत्रित होंगे।
23उसने जीवन-यात्रा में मेरा बल घटा दिया; और मेरी आयु के दिन कम कर दिए।
24मैंने कहा, “हे मेरे परमेश्वर, मुझे अल्पायु में ही न उठा ले, तेरे वर्ष तो पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहते है।
25आदि में तूने पृथ्वी की नींव डाली, आकाश तेरे हाथ की कारीगरी है।
26वे तो नष्ट हो जाएंगे, परन्तु तू बना रहेगा; और सब कुछ कपड़े के समान पुराना हो जाएगा; तू उनको वस्त्र के समान बदलेगा, और वे बदल जाएंगे।
27परन्तु तू वही है, और तेरे वर्षों का अन्त ही नही।
28तेरे सेवकों की सन्तान बनी रहेगी, और उनका वंश तेरे सम्मुख स्थिर रहेगा।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)