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पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 68 / 150

भजन संहिता 68

1परमेश्वर उठे, उसके शत्रु तितर-बितर हों, और उसके बैरी सामने से भाग जाए।

2जैसे धुआं उड़ जाता है वैसे ही तू उन्हें उड़ा दे; जैसे मोम आग से पिघल जाता है वैसे ही दुष्ट भी परमेश्वर की उपस्थिति से नष्ट हो जाए।

3परन्तु धर्मी आनन्दित हों, वे परमेश्वर के सम्मुख हर्षित हों; हां, वे आनन्द में मग्न हो।

4परमेश्वर के लिए गीत गाओ, उसके नाम का भजन गाओ; जो विस्तृत मरुभूमि से सवार होकर निकलता है, उसके लिए राजमार्ग बनाओ; उसका नाम याह है, उसके सम्मुख हर्षित हो!

5परमेश्वर अपने पवित्र निवासस्थान में अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है।

6अनाथ को परमेश्वर घर में बसाता है, वह बन्दियों को छुड़ाकर सम्पन्न करता है; हठीलों को ही मरुभूमि पर बसना पड़ता है।

7हे परमेश्वर, जब तू अपनी प्रजा के आगे आगे चला, जब तू निर्जन-प्रदेश में से कदम बढ़ाते हुए निकला, सेला।

8तब पृथ्वी कांप उठी, और परमेश्वर की उपस्थिति से आकाश भी टपकने लगा; परमेश्वर, हां, इस्राएल के परमेश्वर की उपस्थिति से सीनै पर्वत भी कांप उठा।

9हे परमेश्वर, तूने चारों ओर बहुतायत की वर्षा की, तूने अपनी सूखी हुई मीरास को हरा-भरा कर दिया।

10तेरे लोग उसमें बस गए; हे परमेश्वर, तूने अपनी भलाई से कंगाल के लिए व्यवस्था की है।

11प्रभु आज्ञा देता है, शुभ संदेश सुनाने वाली स्त्रियों की एक बड़ी सेना हैः

12“सेनाओं के राजा भाग जाते हैं, वे भाग जाते हैं; और जो घर में रह जाती है, वह लूट बांट लेती है।”

13भेड़ों के बाड़ों में लेटे हुए, तुम उस कबूतर के समान हो जिसके पंख मानों चांदी से, और पर चमचमाते सोने से मढ़े हुए हो।

14जब सर्वशक्तिमान ने राजाओं को वहां तितर-बितर किया तो मानो सल्मोन पर्वत पर हिमपात हुआ।

15बाशान का पर्वत परमेश्वर का पर्वत है; बाशान का पर्वत अनेक शिखरों वाला पर्वत है।

16हे शिखरों वाले पर्वतों, तुम क्यों ईर्ष्या से उस पर्वत को घूरते हो जिसे परमेश्वर ने अपने निवास के लिए चाहा है? निश्चय, यहोवा वहां सर्वदा वास करेगा।

17परमेश्वर के रथ बीस हजार, वरन् हजारों-हजार हैं; प्रभु अपनी पवित्रता में, जैसे सीनै पर्वत पर वैसे ही उनके मध्य है।

18तू ऊंचे पर चढ़ा, तू बन्दियों को बंधुवाई में ले गया। तूने लोगों से वरन् हठीले लोगों से भी भेंटें लीं, कि यह परमेश्वर वहां वास करे।

19धन्य हो प्रभु, जो प्रतिदिन हमारा बोझ उठाता है, परमेश्वर, जो हमारा उद्धार है। सेला।

20परमेश्वर, हमारे लिए छुटकारा देने वाला परमेश्वर है; मृत्यु से बचने की राहें भी प्रभु यहोवा की है।

21निश्चय, परमेश्वर अपने शत्रुओं के सिर को, और बार-बार अपराध करने वाले की बालदार खोपड़ी को चूर-चूर कर डालेगा।

22प्रभु ने कहा, “मैं उन्हें बाशान से लौटा लाऊंगा। मैं उन्हें सागर की गहराई से निकाल लाऊंगा;

23कि तू अपने शत्रुओं के लहू में पैर डुबोए, और तेरे कुत्तों की जीभ को भी उसमें भाग मिले।”

24हे परमेश्वर, लोगों ने तेरा आगमन देखा, पवित्रस्थान में मेरे परमेश्वर, मेरे राजा का आगमन।

25गाने वाले आगे-आगे, बजाने वाले पीछे पीछे चले, और उनके मध्य डप़फ़ बजाती कन्याए।

26तुम जो इस्राएल के सोते से निकले हो, यहोवा का धन्यवाद करो, हां, सभाओं में परमेश्वर का धन्यवाद करो।

27वहां सबसे छाेटा, बिन्यामीन, उनकी अगुवाई कर रहा है, वहां यहूदा के शासकों, और जबूलून व नप्ताली के शासकों के भी झुंड है।

28तेरे परमेश्वर ने आज्ञा दी कि तुझे सामर्थ्य मिले; हे परमेश्वर, तूने हमारे लिए महान् कार्य किए हैं: अब अपना सामर्थ्य प्रकट कर।

29यरूशलेम में तेरे मंदिर के कारण, राजा तेरे लिए भेंटें ले आएंगे।

30नरकटों के जंगली जानवरों को, हां, सांड़ों के उस झुंड को डांट जो देश-देश के बछड़ों के मध्य है। वे चांदी की छड़ों को लिए हुए चरणों में झुके। जो लोग युद्ध से प्रसन्न होते हैं उनको उसने तितर-बितर किया है।

31मिस्र के दूत आएंगे, इथियोपिया अपने हाथों को परमेश्वर की ओर फुर्ती से फैलाएगा।

32हे पृथ्वी के राज्य-राज्य के लोगो, परमेश्वर का स्तुतिगान करो; प्रभु का भजन गाओ, सेला।

33उसी का जो सनातन सर्वोच्च स्वर्ग में सवारी करता है; देखो वह अपनी वाणी में, शक्तिशाली वाणी में बोलता है।

34परमेश्वर के सामर्थ्य की स्तुति करो; उसका प्रताप इस्राएल पर छाया हुआ है, और उसका सामर्थ्य आकाशमंडल में है।

35हे परमेश्वर, तू अपने पवित्रस्थान में भययोग्य है। इस्राएल का परमेश्वर स्वयं अपनी प्रजा को शाक्ति और सामर्थ्य देता है। परमेश्वर धन्य हो!

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)