नया नियम · प्रकाशितवाक्य · अध्याय 10 / 22
प्रकाशितवाक्य 10
1फिर मुझे एक और शक्तिशाली स्वर्गदूत बादल ओढ़े हुए स्वर्ग से उतरते दिखाई दिया। उसके सिर पर मेघ-धनुष था। उसका मुख सूर्य जैसा और उसके पांव अग्नि के खम्भे के सदृश थे।
2उसके हाथ में खुली हुई एक छोटी सी पुस्तक थी। उसने अपना दाहिना पांव समुद्र पर तथा बायां पृथ्वी पर रखा।
3वह ऊंची आवाज़ से ऐसे चिल्लाया जैसे सिंह दहाड़ा हो। जब वह चिल्लाया तो गर्जन के सात शब्द सुनाई दिए।
4जब गर्जन के सातों शब्द हो चुके तो मैं लिखने पर था, परन्तु मुझे आकाश से एक शब्द यह कहते सुनाई दिया, “जो बातें गर्जन के सातों शब्दों ने कही हैं उन पर मुहर लगा दे और उन्हें न लिख।”
5तब जिस स्वर्गदूत को मैंने समुद्र और पृथ्वी पर खड़ा देखा था उसने अपना दाहिना हाथ स्वर्ग की ओर उठाया,
6और उसकी शपथ खाकर जो युगानुयुग जीवित है और जिसने स्वर्ग और उसकी सब वस्तुओं, पृथ्वी और उसकी सब वस्तुओं तथा समुद्र और उसकी सब वस्तुओं को सृजा है, कहा कि अब और देर न होगी।
7पर सातवें स्वर्गदूत के आवाज़ देने के दिनों में जब वह तुरही फूंकने पर होगा तो परमेश्वर का वह रहस्य पूरा हो जाएगा-जिसकी सूचना उसने अपने दास नबियों को दी थी।
8तब मैंने उस आवाज़ को जो स्वर्ग से सुनाई दी थी, मुझ से फिर यह कहते सुना, “जा, उस स्वर्गदूत के हाथ से जो समुद्र और पृथ्वी पर खड़ा है, उस खुली हुई पुस्तक को ले ले।”
9तब मैंने उस स्वर्गदूतक के पास जाकर कहा कि यह छोटी पुस्तक मुझे दे दे। उसने मुझ से कहा, “ले, इसे खा ले। यह तेरा पेट तो कडुवा कर देगी, पर तेरे मुंह में मधु-सी मीठी लगेगी।”
10मैंने उस पुस्तक को स्वर्गदूत के हाथ से लेकर खा लिया। वह मेरे मुंह में मधु जैसी मीठी लगी; पर जब मैं उसे खा चुका, तो मेरा पेट कड़ुवा हो गया।
11इसके पश्चात् मुझ से कहा गया कि तुझे बहुत से लोगों, जातियों, भाषाओं और राजाओं के समक्ष फिर नबूवत करनी पड़ेगी।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)