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नया नियम · प्रकाशितवाक्य · अध्याय 12 / 22

प्रकाशितवाक्य 12

1फिर स्वर्ग में एक बड़ा चिह्न दिखाई दिया। एक स्त्री सूर्य पहिने थी। उसके पैरों के नीचे चन्द्रमा तथा सिर पर बारह तारों का एक मुकुट था।

2वह गर्भवती थी, तथा बच्चे को जन्म देने के लिए प्रसव-पीड़ा के कारण चिल्ला रही थी।

3एक और चिह्न स्वर्ग में दिखाई दियाः और देखो, लाल रंग का एक विशाल अजगर था। उसके सात सिर और दस सींग थे, तथा उसके सिरों पर सात मुकुट थे।

4उसकी पूंछ ने आकाश के तारों का एक तिहाई भाग खींचकर पृथ्वी पर फेंक दिया। वह अजगर उस स्त्री के समक्ष खड़ा हो गया जो बच्चे को जन्म देने वाली थी, कि जब बच्चे का जन्म हो तो वह उसको खा जाए।

5उसने एक पुत्र को जन्म दिया, जो लोहे के दण्ड से सब जातियों पर -शासन करेगा। उस स्त्री का वह बच्चा परमेश्वर और उसके सिंहासन के पास उठा लिया गया।

6जब वह स्त्री जंगल में भाग गई जहां परमेश्वर ने उसके लिए एक स्थान तैयार किया था कि एक हज़ार दो सौ साठ दिन तक वहां उसका पोषण किया जाए।

7फिर स्वर्ग में युद्ध हुआ। मीकाएल और उसके दूत अजगर से लड़े। अजगर और उसके दूत भी लड़े,

8परन्तु प्रबल न हुए और फिर उन्हें स्वर्ग में स्थान न मिला।

9तब वह बड़ा अजगर नीचे गिरा दिया गया, अर्थात् वही पुराना सांप जो इबलीस और -शैतान कहलाता है और जो सम्पूर्ण संसार को भरमाता है। वह पृथ्वी पर नीचे गिरा दिया गया और उसके साथ उसके दूत भी गिरा दिए गए।

10तब मैंने स्वर्ग में एक बड़ा शब्द यह कहते सुना, “अब हमारे परमेश्वर के समक्ष, सामर्थ्य और राज्य तथा उसके मसीह का अधिकार प्रकट हुआ है, क्योंकि हमारे भाइयों पर दोष लगाने वाला, जो हमारे परमेश्वर के समक्ष रात-दिन उनको दोषी ठहराता था, नीचे गिरा दिया गया है।

11और वे मेमने के लहू के कारण और अपनी साक्षी के वचन के कारण उस पर विजयी हुए हैं, क्योंकि मृत्यु सहने तक भी उन्होंने अपने प्राणों को प्रिय न जाना।

12इस कारण हे स्वर्गो और तुम जो उनमें रहते हो, आनन्दित हो। पृथ्वी और समुद्र पर हाय, क्योंकि शैतान अति क्रोधित होकर तुम्हारे पास उतर आया है, क्योंकि वह जानता है कि उस का समय थोड़ा ही है।”

13जब अजगर ने देखा कि मैं पृथ्वी पर गिरा दिया गया हूं, तो उस स्त्री को जिस ने पुत्र को जन्म दिया था सताने लगा।

14पर उस स्त्री को एक बड़े उकाब के दो पंख इसलिए दिए गए कि वह अजगर के सामने से जंगल में उस स्थान को उड़ जाए जहां एक काल,कालों और अर्द्ध-काल तक उसका पालन-पोषण किया जाए।

15फिर सांप ने उस स्त्री के पीछे अपने मुंह से नदी के सदृश जल बहाया कि उसे जल-प्रवाह में बहा ले जाए।

16पर पृथ्वी ने स्त्री की सहायता की और अपना मुंह खोलकर उस नदी को जिसे अजगर ने अपने मुंह से बहाया था पी लिया।

17और अजगर स्त्री पर क्रोधित हुआ; और उसकी -शेष सन्तान से जो परमेश्वर की आज्ञा मानती है, और यीशु की गवाही पर स्थिर है, युद्ध करने निकला।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)