नया नियम · प्रकाशितवाक्य · अध्याय 19 / 22
प्रकाशितवाक्य 19
1इन बातों के पश्चात् मैंने स्वर्ग में मानो एक बड़े जनसमूह को उच्च स्वर से यह कहते सुनाः “हल्लिलूयाह! उद्धार, महिमा और सामर्थ्य हमारे परमेश्वर ही के हैं,
2क्योंकि उसके निर्णय सच्चे और धर्ममय हैं, क्योंकि उसने उस बड़ी वेश्या का जो अपने व्यभिचार से संसार को भ्रष्ट करती थी, न्याय किया है और अपने दासों के लहू का बदला उस से लिया है।”
3उन्होंने फिर दूसरी बार कहा, “हल्लिलूयाह! उस का धुंआ अनन्तकाल तक ऊपर उठता रहेगा।”
4तब चौबीसों प्राचीनों और चारों प्राणियों ने परमेश्वर को जो सिंहासन पर बैठा था, गिर कर दंडवत् किया और कहा, “आमीन। हल्लिलूय्याह!”
5और सिंहासन से यह कहते हुए एक आवाज़ सुनाई दी, “हे सब उसके दासो, चाहे छोटे हो या बड़े, जो उसका भय मानते हो, हमारे परमेश्वर की स्तुति करो।”
6फिर मैंने मानो एक विशाल जनसमूह की आवाज़ तथा समुद्र की लहरों और बादल के घोर गर्जन को यह कहते सुना, “हल्लिलूय्याह! क्योंकि प्रभु हमारा सर्वशक्मिान परमेश्वर राज्य करता है।
7आओ, हम आनन्दित और हर्षित हों और उसकी स्तुति करें, क्योंकि मेमने का विवाह आ पहुंचा है और उस की दुल्हिन ने अपने आप को तैयार कर लिया है।
8उसे चमकदार, स्वच्छ और महीन मलमल पहिनने को दिया गया है”-यह मलमल तो संतों के धर्मिकता के कार्य है-
9फिर उसने मुझ से कहा “लिख, ‘धन्य हैं वे जो मेमने के विवाह के भोज में आमंत्रित हैं’।” उसने मुझ से कहा, “ये परमेश्वर के सत्य वचन है।”
10तब मैं उसकी उपासना करने के लिए उसके पैरों पर गिर पड़ा। परन्तु उसने मुझ से कहा, “ऐसा न करः मैं तो तेरा और तेरे उन भाइयों का संगी दास हूं जो यीशु की साक्षी में स्थिर है। परमेश्वर की उपासना कर, क्योंकि यीशु की गवाही भविष्यद्वाणी की आत्मा है। ”
11फिर मैंने आकाश को खुला देखा, और देखो, एक श्वेत घोड़ा है, और उसका सवार विश्वासयोग्य और सत्य कहलाता है। वह धार्मिकता से न्याय और युद्ध करता है।
12उसके नेत्र आग की ज्वाला है। उसके सिर पर बहुत से राजमुकुट है। और उसका एक नाम उस पर लिखा हुआ है जिसे उसके अतिरिक्त और कोई नहीं जानता।
13वह लहू में डुबोया हुआ वस्त्र पहिने है, और उसका नाम ‘परमेश्वर का वचन’ है।
14स्वर्ग की सेनाएं श्वेत, स्वच्छ और महीन मलमल पहिने, श्वेत घोड़ों पर उसके पीछे पीछे चलती है।
15उसके मुख से एक चोखी तलवार निकलती है कि वह उस से जाति-जाति का संहार करे। वह लौह-दंड से शासन करेगा, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के भयानक प्रकोप की मदिरा का रसकुंड रौंदेगा।
16उसके वस्त्र और जांघ पर यह नाम लिखा हैः “राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु।”
17फिर मैंने एक स्वर्गदूत को सूर्य में खड़े देखा। उसने आकाश के मध्य उड़ने वाले सब पक्षियों से ऊंचे शब्द से चिल्लाकर कहा, “आओ, परमेश्वर के बड़े भोज के लिए एकत्रित हो जाओ,
18कि तुम राजाओं, सेनापतियों और -शक्तिशाली पुरफ़षों का मांस, घोड़ों और उनके सवारों का मांस, तथा स्वतंत्र और दासों, छोटों व बड़ों, सब मनुष्यों का मांस खा सको।”
19फिर मैंने पशु और पृथ्वी के राजाओं और उनकी सेनाओ को एकत्रित होते देखा कि उन घोड़े के सवार और उसकी सेना से युद्ध करे।
20वह पशु पकड़ा गया, और उसके साथ वह झूठा नबी भी जो उसकी उपस्थिति में चमत्कार दिखा कर उनको छलता था जिन पर पशु की छाप थी तथा जो उसकी प्रतिमा की पूजा करते थे। ये दोनों उस गंधक से धधकती आग की झील में जीवित डाल दिए गए।
21बाकी सब उस घुड़सवार के मुख से निकलती तलवार से मारे गए और सब पक्षी उनका मांस खाकर तृप्त हुए।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)