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नया नियम · प्रकाशितवाक्य · अध्याय 6 / 22

प्रकाशितवाक्य 6

1जब मैंने देखा कि मेमने ने उन सात मुहरों में से एक को खोला, तब मैंने उन चार प्राणियों में से एक को गर्जन के समान शब्द में कहते सुना, “आ!”

2मैंने दृष्टि की, और देखो, एक श्वेत घोड़ा था, और जो उस पर बैठा था वह धनुष लिए हुए था। उसे एक मुकुट दिया गया, और वह जय प्राप्त करता हुआ निकला कि और भी जय प्राप्त करे।

3जब उसने दूसरी मुहर खोली तो मैंने दूसरे प्राणी को यह कहते सुना, “आ!”

4तब लाल रंग का एक और घोड़ा निकला। उसके सवार को यह अधिकार दिया गया कि वह पृथ्वी पर से मेल-मिलाप उठा ले कि लोग एक दूसरे को घात करें, और उसे एक बड़ी तलवार दी गई।

5जब उसने तीसरी मुहर खोली, तो मैंने तीसरे प्राणी को यह कहते सुना, “आ!” तब मैंने दृष्टि की और देखो, एक काला घोड़ा था और उसके सवार के हाथ में एक तराजू था।

6मैंने उन चारों प्राणियों के मध्य से मानो एक शब्द को यह कहते सुना, “एक दीनार का किलो भर गेहूं तथा एक दीनार का तीन किलो जौ, पर तेल और दाखरस की हानि न करना।”

7जब उसने चौथी मुहर खोली, तो मैंने चौथे प्राणी का -शब्द यह कहते सुना, “आ!”

8मैंने दृष्टि की, और देखो, एक हल्के पीले रंग का घोड़ा था; उसके सवार का नाम था ‘मृत्यु’; और अधोलोक उसका अनुसरण कर रहा था। उन्हें पृथ्वी के एक चौथाई भाग पर यह अधिकार दिया गया था कि तलवार, दुर्भिक्ष, महामारी, और पृथ्वी के हिंसक पशुओं द्वारा संहार करे।

9जब उसने पांचवीं मुहर खोली, तो मैंने वेदी के नीचे उनके प्राणों को देखा जो परमेश्वर के वचन तथा उसकी निरन्तर गवाही के कारण वध किए गए थे।

10वे उच्च स्वर से पुकार कर कह रहे थे, “हे पवित्र और सच्चे प्रभु, तू कब तक न्याय न करेगा? तथा कब तक पृथ्वी के निवासियों से हमारे रक्त का प्रतिशोध न लेगा?”

11उनमें से प्रत्येक को श्वेत चोगा दिया गया, और उनसे कहा गया, “थोड़ी देर तक और विश्राम करो, जब तक कि तुम्हारे संगी दासों और भाइयों की, जो तुम्हारे सदृश वध होने वाले हैं, गिनती पूरी न हो जाए।”

12जब उसने छठवीं मुहर खोली, तब मैंने देखा कि एक बड़ा भूकम्प हुआ, और बाल से बने कम्बल के समान सूर्य काला और सम्पूर्ण चन्द्रमा लहू के सदृश हो गया।

13आकाश के तारे पृथ्वी पर ऐसे गिर पड़े जैसे बड़ी आंधी से हिलकर अंजीर के वृक्ष से कच्चे फल गिर पड़ते है।

14आकाश फटकर ऐसे हट गया जैसे चर्म-पत्र लिपट जाता है,और प्रत्येक पर्वत तथा द्वीप अपने स्थान से हट गया।

15तब पृथ्वी के राजा, प्रधान, सेनापति, धनवान, सामर्थी, और प्रत्येक दास और प्रत्येक स्वतंत्र व्यक्ति पहाड़ों की गुफाओं और चट्टानों में जा छिपे।

16और पर्वतों तथा चट्टानों से कहने लगे, “हम पर गिर पड़ो और हमें उसकी दृष्टि से जो सिंहासन पर बैठा है, तथा मेमने के प्रकोप से छिपा लो,

17क्योंकि उनके प्रकोप का भयानक दिन आ गया है, और कौन है जो उनका सामना कर सकता है?”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)