नया नियम · प्रकाशितवाक्य · अध्याय 7 / 22
प्रकाशितवाक्य 7
1इसके पश्चात् मैंने चार स्वर्गदूतों को पृथ्वी के चार कोनों पर खड़े देखा, जो पृथ्वी की चारों हवाओं को थामे हुए थे कि पृथ्वी, समुद्र अथवा किसी वृक्ष पर हवा न चले।
2फिर मैंने एक और स्वर्गदूत को जीवित परमेश्वर की मुहर लिए हुए पूर्व से ऊपर आते देखा। उसने उन चारों स्वर्गदूूतों से, जिन्हें पृथ्वी और समुद्र को हानि पहुंचाने का अधिकार दिया गया था, ऊंची आवाज़ से पुकार कर कहा,
3“जब तक हम अपने परमेश्वर के दासों के माथों पर मुहर न लगा लें, तब तक पृथ्वी, समुद्र या वृक्षों को हानि न पहुंचाना।”
4तब मैंने उन लोगों की संख्या सुनी जिन पर छाप दी गई थी, अर्थात् एक लाख चौवालीस हज़ार। इस्राएली सन्तानों के प्रत्येक गोत्र में से इन पर मुहर लगाई गई थी।
5यहूदा के गोत्र से बारह हज़ार पर, रूबेन के गोत्र से बारह हज़ार पर, गाद के गोत्र से बारह हज़ार पर,
6आशेर के गोत्र से बारह हज़ार पर, नप्ताली के गोत्र से बारह हज़ार पर, मनश्शे के गोत्र से बारह हज़ार पर,
7शमौन के गोत्र से बारह हज़ार पर , लेवी के गोत्र से बारह हज़ार पर, इस्साकार के गोत्र से बारह हज़ार पर,
8जबूलून के गोत्र से बारह हज़ार पर, यूसुफ के गोत्र से बारह हज़ार पर, और बिन्यामीन के गोत्र से बारह हज़ार पर मुहर दी गई।
9इसके पश्चात् मैंने दृष्टि की, और देखो, प्रत्येक जाति, समस्त कुल, लोग और भाषा में से लोगों की एक विशाल भीड़ जिसे कोई गिन नहीं सकता था श्वेत वस्त्र पहिने तथा हाथों में खजूर की डाली लिए सिंहासन और मेमने के सामने खड़ी थी,
10और लोग ऊंची आवाज़ से पुकार कर कह रहे थे, “सिंहासन पर विराजमान हमारे परमेश्वर और मेमने से ही उद्धार है!”
11सिंहासन के , प्राचीनों के, और चारों प्राणियों के चारों ओर समस्त स्वर्गदूत खड़े हुए थे। उन्होंने सिंहासन के सामने मुंह के बल गिरकर और यह कहकर परमेश्वर की वन्दना की,
12“आमीन। हमारे परमेश्वर की स्तुति, महिमा, ज्ञान, धन्यवाद, आदर, सामर्थ्य, और शक्ति, युगानुयुग हो। आमीन।”
13इसके पश्चात् प्राचीनों में से एक ने मुझ से पूछा, “ये जो श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं, कौन हैं, और कहां से आए हुए हैं?”
14मैंने उत्तर दिया, “हे मेरे प्रभु, तू ही जानता है।” उसने मुझ से कहा, “ये वे हैं, जो उस महाक्लेश में से निकल कर आए है। इन्होंने अपने वस्त्र मेमने के लहू में धोकर -श्वेत किए है।
15इस कारण ये परमेश्वर के सिंहासन के सामने हैं और उसके मन्दिर में दिन-रात उसकी सेवा करते है। जो सिंहासन पर बैठा है वह उन पर अपनी छाया करेगा।
16वे फिर कभी भूखे और प्यासे न होंगे, उन पर न धूप और न ही तपन होगी,
17क्योंकि मेमना जो सिंहासन के मध्य है, उनका चरवाहा होगा। और जीवन-जल के सोतों के पास वह उनकी अगुवाई करेगा, और परमेश्वर उनकी आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)