नया नियम · प्रकाशितवाक्य · अध्याय 8 / 22
प्रकाशितवाक्य 8
1जब उसने सातवीं मुहर खोली तब स्वर्ग में आधे घण्टे तक सन्नाटा छा गया।
2तब मैंने सात स्वर्गदूत देखे जो परमेश्वर के समक्ष खड़े रहते हैं, और उन्हें सात तुरहियां दी गईं।
3फिर एक और स्वर्गदूत स्वर्ण-धूपदान लिए वेदी के समीप खड़ा हो गया। उसे बहुत धूप दिया गया कि वह उसे सिंहासन के समक्ष स्थित स्वर्ण-वेदी पर पवित्र लोगों की प्रार्थनाओं के साथ चढ़ाए।
4और धूप का धुआं, पवित्र लोगों की प्रार्थनाओं के साथ स्वर्गदूत के हाथ से ऊपर परमेश्वर के समक्ष पहुूंचा।
5तब स्वर्गदूत ने धूपदान लिया और वेदी की आग से भरकर उसे पृथ्वी पर फेंक दिया, फिर बादल का गर्जन, भीषण नाद, बिजली की चमक, तथा भूकम्प हुआ।
6तब सातों स्वर्गदूत जिनके पास सात तुरहियां थीं उन्हें फूंकने के लिए तैयार हुए।
7पहिले ने तुरही फूंकी, और लहू से मिश्रित ओले व आग उत्पन्न हुए, जो पृथ्वी पर फेंक दिए गए। इस से पृथ्वी का एक तिहाई तथा वृक्षों का एक तिहाई भस्म हो गया, तथा सारी घास भी भस्म हो गई।
8दूसरे स्वर्गदूत ने तुरही फूँकी, और मानो आग से जलते हुए महापर्वत के सदृश कोई वस्तु समुद्र में डाल दी गई, जिस से समुद्र का एक तिहाई लहू हो गया।
9समुद्र के एक तिहाई प्राणी मर गए और जहाज़ों का एक तिहाई नष्ट हो गया।
10तीसरे स्वर्गदूत ने तुरही फूँकी तो एक विशाल तारा मशाल के सदृश जलता हुआ आकाश से गिरा, और वह नदियों और जल के सोतों के एक तिहाई पर जा गिरा।
11वह तारा नागदौना कहलाता है। इस से जल का एक तिहाई नागदौना हो गया। इस जल के कडु-वे हो जाने के कारण बहुत-से मनुष्यों की मृत्यु हो गई।
12चौथे स्वर्गदूत ने तुरही फूँकी तो सूर्य के एक तिहाई, चन्द्रमा के एक तिहाई तथा तारों के एक तिहाई पर विपत्ति आई, जिस से इनका एक तिहाई अन्धकारमय हो गया कि दिन का एक तिहाई और वैसे ही रात्रि का भी एक तिहाई प्रकाशमान न हो।
13जब मैंने फिर देखा तो आकाश के बीच में एक उकाब को उड़ते और ऊंची आवाज़ में यह कहते सुना, “उन तीन स्वर्गदूतों के तुरही के शब्दों के कारण, जिनका फूंका जाना अभी शेष है, पृथ्वी के रहनेवालों पर हाय, हाय, हाय!”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)