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पुराना नियम · श्रेष्ठगीत · अध्याय 1 / 8

श्रेष्ठगीत 1

1श्रेष्ठगीत। जो सुलैमान का है

2काश! वह अधरों से मेरा चुम्बन करे! तेरा प्रेम तो दाखमधु से उत्तम है।

3तेरे इत्रें की सुगन्ध मोहक है; तेरा नाम उंड़ेले हुए इत्र के समान है। इसी कारण कुमारियां तुझसे प्रेम करती है।

4मुझे अपनी अनुगामिनी बना ले और हम साथ-साथ दौड़े। राजा मुझे अपने कक्ष में ले आया है। मित्र हम तुझमें आनन्दित और मग्न होंगे, हम दाखमधु से बढ़कर तेरे, प्रेम की प्रशंसा करेंगे। वधू इसलिए वे ठीक ही तुझसे प्रेम करती हैं!

5हे यरूशलेम की पुत्रियो, मैं काली तो हूं परन्तु सुन्दर हूं, केदार के तम्बुओं और सुलैमान के परदों के समान हू।

6मुझे घूर कर न देखो इसलिए कि मैं काली हू। सूर्य ने मुझे झुलसा दिया है। मेरी माता के पुत्र मुझसे क्रोधित थे, उन्होंने मुझे दाख की बारियों की रखवालिन बना दिया, परन्तु मैंने अपनी निज दाख-बारी की रखवाली नहीं की।

7हे मेरे प्राण प्रिय, मुझे बता, तू अपनी भेडं़े कहां चराता है? दोपहर को तू उन्हें कहां बैठाता है? मैं तेरे साथियों की भेड़ों के पास घूंघट वाली स्त्री के समान क्यों भटकूं?

8नारियों में सर्वांग सुन्दरी, यदि तू स्वयं नहीं जानती तो भेड़ों के खुरों के चिह्नों पर चली जा और चरवाहों के तम्बुओं के पास अपनी बकरियों के बच्चे चरा।

9मेरी प्रियतमा, तू मेरे लिए फि़रौन के रथों में जुती हुई, मेरी घोड़ी के समान है।

10तेरे गाल आभूषणों से और तेरा गला माला के दानों की कतार से कैसा सुन्दर लगता है।

11हम तेरे लिए चांदी के दाने लगे सोने के आभूषण बनाएंगे।

12जब राजा अपनी मेज पर बैठा था, मेरी जटामांसी की सुगन्ध फैल रही थी।

13मेरा प्रियतम मेरे लिए गन्धरस की थैली के समान है जो रात भर मेरे स्तनों के बीच पड़ी रहती है।

14मेरा प्रियतम मेरे लिए मेंहदी के फूलों के गुच्छों के समान है जो एनगदी के बागों में खिला रहता है।

15तू कितनी रूपवती है, मेरी प्रिया! तू कितनी रूपवती है! तेरी आंखें कबूतरी के समान है।

16तू कितना सुन्दर है, मेरे प्रियतम, और कितना मनभावना है! हमारा बिछौना कितना सुखद है। वर

17हमारे घरों की धरणें देवदार की और हमारे छतों की बल्लियां सनौवर की है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)