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पुराना नियम · श्रेष्ठगीत · अध्याय 4 / 8

श्रेष्ठगीत 4

1मेरी प्रियतमा, तू कितनी सुन्दर है! सचमुच, तू कितनी सुन्दर है! चुनरी के भीतर तेरी आंखें कबूतरी के समान है। तेरे केश गिलाद पर्वत से उतर रही बकरियों के झुंड के समान है।

2तेरे दांत अभी-अभी ऊन कतरी हुई उन भेड़ों के झुंड के समान हैं जो नहा कर ऊपर आई हैं, जिनमें से प्रत्येक जुड़वां जनती तथा कभी किसी का भी मेमना नहीं मरा।

3तेरे होंठ लाल धागे के समान हैं, तेरा मुख मनोहर है। चुनरी के पीछे तेरी कनपटियां अनार की फांकों के समान दिखाई देती है।

4तेरी गरदन दाऊद के मीनार के समान है जो पत्थरों के रद्दों से बनायी गयी है, जिस पर हजार ढालें टंगी हैं, और सब गोल ढालें शूरवीरों की है।

5तेरे दो स्तन मानों हरिणी के दो बच्चे हैं, जो सोसन के मध्य चरते हुए चिकारिनी के जुड़वा बच्चों के समान है।

6जब तक दिन ठंडा न हो और छाया लम्बी होकर मिट न जाए तब तक मैं अपने मार्ग में गन्धरस के पर्वतों पर और लोबान की पहाड़ियों पर न जाऊंगा।

7मेरी प्रियतमा, तू सर्वांग सुन्दरी है, तुझमें कोई कलंक नही।

8मेरी दुल्हन, लेबनोन से मेरे साथ चल। काश तू लेबनोन से मेरे साथ आए! अमाना के शिखर से, शनीर और हर्मोन की चोटियों से, सिंहों की मांदों से, चीतों के पर्वतों से दृष्टि कर।

9मेरी बहन, मेरी दुल्हन, तूने मेरे हृदय की धड़कन तेज कर दी है। तूने अपनी एक ही नजर से, तथा अपनी कंठमाला के एक ही हीरे से मेरे हृदय को मोह लिया है।

10मेरी बहन, मेरी दुल्हन, तेरा प्रेम कितना मधुर है! तेरा प्रेम दाखमधु से कितना अधिक बढ़ कर है, और तेरे इत्रें की सुगन्ध भांति-भांति के मसालों से कितनी अधिक है!

11मेरी दुल्हन, तेरे होंठों से मधु टपकता है, तेरी जीभ के नीचे मधु और दूध की मिठास है, और तेरे वस्त्रों की सुगन्ध लेबनोन की सुगन्ध-सी है।

12मेरी बहन, हां, मेरी दुल्हन तो एक बन्द फुलवारी-सी है, चट्टानों से रूंधा हुआ बाग और बन्द किया हुआ सोता है।

13तेरी नई शाखाएं अनार के बाग हैं जिनमें सर्वोत्तम फल लगते और जिनमें मेंहदी और जटामांसी के पौधे,

14हां, जटामांसी और केसर, मुश्क और दालचीनी, लोबान के सब प्रकार के वृक्ष, गन्धरस, अगर, और सब सर्वोत्तम मसालों के वृक्ष है।

15तू उघान का सोता है, जीवनदायक जल का कुआँ और लेबनोन से बहती हुई जलधारा है। वधू

16हे उत्तरी वायु, जाग, और हे दक्षिणी वायु, आ। मेरे बाग पर बह, कि उससे सौरभ बिखरे। उसके मसालों का सौरभ दूर-दूर तक फैले। मेरा प्रियतम मेरे बाग में आए और मनचाहे फल खाए।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)