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पुराना नियम · श्रेष्ठगीत · अध्याय 3 / 8

श्रेष्ठगीत 3

1मैंने कई रात उसको अपने बिछौने पर खोजा जो मेरा प्राण-प्रिय है। मैंने उसको खोजा, परन्तु उसे नहीं पाया।

2अतः अब नगर में जाकर और गली-गली चौक-चौक घूम-घूमकर उसे खोजना अवश्य है जो मेरा प्राण-प्रिय है। मैंने उसको खोजा, परन्तु नहीं पाया।

3जो पहरेदार नगर के चारों ओर पहरा देते फिरते हैं वे मुझे मिले, और मैंने उनसे पूछा, “क्या तुमने मेरे प्राण-प्रिय को देखा है?”

4मैं उनसे कुछ आगे बढ़ी ही थी कि मैंने अपने प्राण-प्रिय को पा लिया। मैं उससे लिपट गई और मैंने उसको जाने नहीं दिया जब तक कि मैं उसको अपनी माता के घर में न ले आई, और उसके कमरे में न ले गई जिसने मुझे अपने गर्भ में रखा था।

5हे यरूशलेम की पुत्रियो, मैं तुमसे चिकारियों और मैदान की हरिणियों की शपथ दिलाकर कहती हूं, जब तक प्रेम स्वतः न जाग उठे तब तक तुम उसे न जगाना और न उकसाना।

6यह क्या है जो धुएं के खम्भे के समान गंधरस और लोबान से सुगन्धित, वरन् व्यापारियों के सब सुगन्धित द्रव्यों से सुशोभित वन में से चला आ रहा है?

7यह तो सुलैमान की पालकी है! इस्राएल के शूरवीरों में से चुने हुए साठ सामर्थी पुरुष उसको घेरे हुए है।

8वे सबके सब तलवार चलाने वाले हैं, युद्ध में कुशल है। प्रत्येक पुरुष की कमर में तलवार बंधी है, और वे रात्रिकाल के ख़तरों के विरुद्ध सतर्क होकर पहरा दे रहे है।

9राजा सुलैमान ने लेबनोन के देवदार की लकड़ी से अपने लिए एक पालकी बनवाई है।

10उसने उसके पाये चांदी के बनवाए और उसकी पीठ सोने की, तथा उसका आसन बैंजनी वस्त्र से बनवाया। उसका भीतरी भाग यरूशलेम की पुत्रियों के द्वारा बड़ी सुन्दरता से सजाया गया है।

11हे सिय्योन की पुत्रियो, आगे बढ़कर सुलैमान को देखो जो उसी मुकुट से सुसज्जित है जिसे उसकी माता ने उसके विवाह के दिन, हां, उसके हृदय के आनन्द के दिन पहनाया था।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)