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पुराना नियम · श्रेष्ठगीत · अध्याय 6 / 8

श्रेष्ठगीत 6

1“तेरा प्रियतम कहां गया, हे स्त्रियों में सर्वसुन्दरी! तेरा प्रियतम किधर चला गया है कि हम भी तेरे साथ उसको ढूंढ़ने चलें?”

2मेरा प्रियतम अपने बाग में बलसान की क्यारियों की ओर गया है कि बाग में अपने झुंड चराए और सोसन पुष्प चुने।

3मैं अपने प्रियतम की हूं, मेरा प्रियतम मेरा है, हां, वही जो अपने झुंड सोसनों के बीच चराता है। वर

4मेरी प्रियतमा, तू तिरसा के समान सुन्दरी है, यरूशलेम के समान मनोहर और पताका फहराती हुई सेना के समान आक्रामक है।

5अपनी आंखें मेरी ओर से फेर ले क्योंकि उन्होंने मुझे व्याकुल कर दिया है। तेरे बाल गिलाद पर्वत से उतरती हुई बकरियों के समान है।

6तेरे दांत भेड़ों के झुंड के समान हैं जो नहाकर ऊपर आई हैं, जिनमें से प्रत्येक जुड़वां जनती और किसी का भी मेमना नहीं मरा।

7ओढ़नी के पीछे तेरी कनपटियां अनार की फांकों के समान है।

8यहां साठ रानियां और अस्सी रखैलें और कुंवारियां तो असंख्य है।

9पर मेरी कबूतरी, मेरी निष्कलंक प्रेमिका, वह तो अद्वितीय है। वह अपनी माता की इकलौती, और अपनी जननी की दुलारी है। कुंवारियों ने उसे देखा और धन्य कहा। रानियों और रखैलों ने देखकर उसकी प्रशंसा में कहाः

10“यह कौन है जो बढ़ती हुई उषा के समान है पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर, सूर्य के समान निर्मल, और पताका लिए सैनिकों के समान आक्रामक है?”

11मैं अखरोट के बाग में गई कि घाटी के फूलों को देखूं, और देखूं कि दाख-लताओं में कलियां, या अनारों में फूल लगे हैं या नही।

12मेरे सम्भलने से पूर्व मेरे मन ने मुझे मेरे वैभवशाली लोगों के रथों पर बिठा दिया।

13लौट आ, लौट आ, मेरी शूलेम्मिन! लौट आ, लौट आ कि हम तुझे एकटक देखे। जैसे दो दलों के नृत्य को वैसे शूलेम्मिन को एकटक क्यों देखो?

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)