पुराना नियम · श्रेष्ठगीत · अध्याय 7 / 8
श्रेष्ठगीत 7
1हे कुलीन की पुत्री, तेरे पैरों की चाल कितनी मोहिनी है! तेरे नितम्बों की गोलाई आभूषणों के समान है, जो किसी कुशल कारीगर के हाथ की कारीगरी है।
2तेरी नाभी गोल प्याले के समान है जिसमें कभी मिश्रित मदिरा का अभाव नहीं होता। तेरा उदर गेहूं की ढेरी के समान है जिसके चारों ओर सोसन पुष्प है।
3तेरे दोनों स्तन मृगी के दो बच्चों के समान, हां, चिकारिनी के जुड़वां बच्चों के समान है।
4तेरी गरदन हाथीदांत की मीनार के समान, तेरी आंखें हेशबोन के उन कुंडों के समान हैं जो बेत-रब्बीम के द्वार के समीप है। तेरी नाक लेबनोन की उस मीनार के समान है जिसका मुख दमिश्क की ओर है।
5तेरा सिर तेरे शरीर पर मानो कर्मेल पर्वत के समान शोभायमान है। और तेरे सिर की फहराती लटें बैंजनी धागों के समान है। राजा तेरी वेणियों पर मुग्ध है।
6मेरी प्रेमिका, मन भावनी! तू कितनी सुन्दर, कितनी आनन्दप्रद है!
7तेरा डील खजूर के वृक्ष के समान और तेरे वक्ष उसके गुच्छों के समान है।
8मैंने कहा, “मैं खजूर के वृक्ष पर चढ़ जाऊंगा, मैं उसके गुच्छों के डंठल को पकड़ लूंगा।” काश! तेरे वक्ष दाख के गुच्छों के समान, और तेरी सांस की सुगन्ध़्ा सेब के समान हो।
9तेरा चुम्बन सर्वोत्तम दाखमधु के समान है! वधू यह मेरे प्रियतम के भीतर सरलता से चली जाती है नींद में पड़े हुओं के होंठों से धीरे धीरे बहती रहती है।
10मैं अपने प्रियतम की हूं, वह मेरी लालसा करता रहता है।
11मेरे प्रियतम आ, हम खेतों में निकल चलें, आ, गांव में अपनी रात व्यतीत करे।
12हम तड़के उठकर, दाख की बारियों में चलें, देखें, दाखों में फूल लगे है या नहीं, उनकी कलियां खिली हैं या नही। अनार फूले हैं या नहीं, वहीं मैं तुझे अपना प्यार दूंगी।
13दोदाफलों की सुगन्ध फैल चुकी है, हमारे द्वारों पर नए और पुराने उत्तम-उत्तम फल लगे है। मेरे प्रियतम, मैंने उनको तेरे लिए बचा रखे है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)