पुराना नियम · जकर्याह · अध्याय 1 / 14
जकर्याह 1
1दारा के शासनकाल के दूसरे वर्ष के आठवें महीने में बेरेक्याह के पुत्र और इद्दो के पोते जकर्याह नबी के पास यहोवा का यह वचन आया,
2“यहोवा तुम्हारे पूर्वजों से अति क्रोधित था।
3अतः उनसे कह कि सेनाओं का यहोवा कहता हैः तुम मेरी ओर फिरो, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है, तो मैं तुम्हारी ओर फिरूंगा। सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।
4अपने पूर्वजों के समान मत बनो जिनसे पूर्वकाल के नबियों ने पुकार-पुकार कर कहा था कि सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः अब अपने बुरे मार्गों से और अपने बुरे कार्यों से फिरो। परन्तु उन्होंने न तो सुना न मेरी ओर ध्यान दिया, यहोवा की यही वाणी है।
5तुम्हारे पूर्वज कहां हैं? और नबी भी? क्या वे सदा जीवित रहते हैं?
6क्या मेरे वचन और मेरे नियम जो मैंने अपने सेवक नबियों को दिए थे, तुम्हारे पूर्वजों में पूरे नहीं हुए? तब उन्होंने पश्चात्ताप किया और कहा कि सेनाओं के यहोवा ने हमारे मार्गों और कार्यों के अनुसार व्यवहार करने का जैसा विचार प्रकट किया था उसी के अनुसार उसने हमें बदला दिया है।”
7दारा के दूसरे वर्ष के शबात नामक ग्यारहवें महीने के चौबीसवें दिन यहोवा का यह वचन इद्दो के पोते, और बेरेक्याह के पुत्र जकर्याह नबी के पास इस प्रकार पहुंचाः
8मैंने रात को दर्शन में देखा कि देखो एक व्यक्ति लाल घोड़े पर सवार है, और घाटी में लगी हुई मेंहदियों के बीच खड़ा है, तथा उसके पीछे लाल, भूरे और श्वेत घोड़े है।
9तब मैंने कहा, “हे मेरे प्रभु, ये क्या है!” तब जो स्वर्गदूत मुझसे बातें कर रहा था उसने मुझसे कहा, “मैं तुझे दिखाऊंगा कि ये क्या है?”
10तब जो व्यक्ति मेंहदियों के बीच खड़ा था उसने उत्तर देते हुए कहा, “ये वे हैं जिनको यहोवा ने पृथ्वी की गश्त लगाने के लिए भेजा है।”
11इस पर उन्होंने यहोवा के उस स्वर्गदूत से जो मेंहदियों के बीच खड़ा था, उत्तर देते हुए कहा, “हमने पृथ्वी की गश्त लगा ली है और देखो, सम्पूर्ण पृथ्वी सुख-चैन से है।”
12तब यहोवा के स्वर्गदूत ने कहा, “हे सेनाओं के यहोवा, तू जो यरूशलेम और यहूदा के नगरों से इन सत्तर वर्षों तक क्रोधित रहा है, उन पर और कब तक दया नहीं करेगा?”
13इस पर यहोवा ने उस स्वर्गदूत को जो मुझसे बातें कर रहा था, मधुर और शान्तिपूर्ण वचनों में उत्तर दिया।
14अतः जो स्वर्गदूत मुझसे बातें कर रहा था उसने मुझसे कहा, “यह घोषणा कर कि सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः मुझे यरूशलेम और सिय्योन के प्रति अत्यधिक जलन है।
15परन्तु मैं उन जातियों से अति क्रोधित हूं जो सुख-चैन से रह रही है। मैंने तो थोड़ा-सा क्रोध किया था, परन्तु उन्होंने विपत्तियों को बहुत बढ़ा दिया।”
16इसलिए यहोवा यों कहता हैः मैं तरस के साथ यरूशलेम लौटूंगा, मेरा घर उसमें बनाया जाएगा, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है, और यरूशलेम पर नापने की डोरी डाली जाएगी।
17फिर से घोषणा कर कि सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः मेरे नगर सम्पन्नता से पुनः भरपूर हो जाएंगे, और यहोवा सिय्योन को पुनः शान्ति देगा तथा यरूशलेम को पुनः अपना लेगा।”
18तब मैंने आंखें उठाकर देखा, तो देखो, चार सींग है।
19अतः मैंने उस स्वर्गदूत से, जो मुझसे बातें कर रहा था, कहा, “ये क्या हैं?” उसने उत्तर दिया, “ये वे सींग हैं जिन्होंने यहूदा, इस्राएल और यरूशलेम को तितर-बितर कर दिया है।”
20इसके पश्चात् यहोवा ने मुझे चार कारीगर दिखाए।
21तब मैंने कहा, “ये क्या करने आ रहे हैं?” उसने उत्तर दिया, “सींगों ने तो यहूदा को ऐसा तितर-बितर कर दिया था कि कोई सिर न उठाए। परन्तु कारीगर उनको आतंकित करने तथा उन जातियाें के सींगों को काटने आए हैं जिन्होंने यहूदा देश के विरुद्ध अपने सींग इसलिए उठाए हैं कि वह तितर-बितर हो जाए।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)