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पुराना नियम · जकर्याह · अध्याय 2 / 14

जकर्याह 2

1फिर मैंने आंखें उठाकर देखा, तो देखो, एक मनुष्य अपने हाथ में नापने की डोरी लिए खड़ा है।

2अतः मैंने पूछा, “तू कहां जा रहा है?” उसने मुझसे कहा, “यरूशलेम को नापने, कि देखूं, उसकी चौड़ाई कितनी और लम्बाई कितनी है।”

3तब देखो जो स्वर्गदूत मुझसे बातें कर रहा था वह जाने लगा, और एक दूसरे स्वर्गदूत ने उससे मिलने के लिए आकर

4कहा, “दौड़, उस जवान से बात कर, और कह, मनुष्यों और पशुओं की बहुतायत के कारण यरूशलेम शहरपनाह-रहित नगरों के समान बसेगा क्योंकि

5यहोवा की यह वाणी है कि मैं स्वयं उसके चारों ओर अग्नि की दीवार तथा उसके मध्य महिमा ठहरूंगा।”

6यहोवा की यह वाणी हैः “सुनो, सुनो! उत्तर के देश से भाग आओ, यहोवा की यह वाणी है, क्योंकि मैंने तुमको आकाश के चारों ओर से वायु के समान तितर-बितर किया था, यहोवा की यही वाणी है।

7हे सिय्योन, तू जो बेबीलोन की पुत्री के साथ वास करती है, निकल भाग।

8क्योंकि सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः वैभव के बाद उसने मुझे सम्मानित करके उन जातियों के पास भेजा है जो तुम्हें लूटते हैं क्योंकि जो तुम्हें छूता है वह मेरी आंख की पुतली को छूता है।

9क्योंकि देखो, मैं अपना हाथ उन पर उठाऊंगा जिससे वे अपने ही दासों के द्वारा लूट लिए जाएंगे। तब तुम जान लोगे कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे भेजा है।

10हे सिय्योन की पुत्री, आनन्द से गा, और हर्षित हो; क्योंकि देख, मैं आ रहा हूं और तेरे मध्य वास करूंगा, यहोवा की यही वाणी है।

11उस दिन अनेक जातियां यहोवा से आ मिलेंगी, और मेरी प्रजा हो जाएंगी। तब मैं तेरे मध्य वास करूंगा, और तू जान लेगी कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे तेरे पास भेजा है।

12फिर यहोवा पवित्र देश में यहूदा को अपना निज भाग बना लेगा तथा यरूशलेम को पुनः अपना लेगा।

13हे सब प्राणियों, यहोवा के सामने चुप रहो। क्योंकि वह अपने पवित्र निवासस्थान से जागकर निकला है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)