पुराना नियम · जकर्याह · अध्याय 3 / 14
जकर्याह 3
1फिर उसने मुझे यह दिखाया कि यहोशू महायाजक यहोवा के दूत के सामने खड़ा हुआ है, तथा शैतान उसके दाहिने हाथ की ओर खड़ा है कि उस पर दोष लगाए।
2तब यहोवा ने शैतान से कहा, “हे शैतान, यहोवा तुझे डांटे। निःसन्देह यहोवा, जिसने यरूशलेम को अपना लिया है, तुझे डांटे। क्या यह आग से निकली हुई लुकटी-सी नहीं?”
3यहोशू तो स्वर्गदूत के सामने मैले-कुचैले वस्त्र पहने खड़ा था।
4जो लोग उसके सामने खड़े थे उनसे उसने कहा, “उसके मैले वस्त्र उतार फेंको।” तब उसने उससे कहा, “देख, मैंने तेरा अधर्म तुझसे दूर कर दिया है कि तुझे उत्सव का वस्त्र पहनाऊ।”
5फिर मैंने कहा, “वे उसके सिर पर साफ पगड़ी रखे।” अतः उसके सिर पर एक स्वच्छ पगड़ी रखी गई, तथा उसे पोशाक पहनाई गई। यहोवा का दूत उसके समीप खड़ा रहा।
6तब यहोवा के दूत ने यहोशू को चिताते हुए कहा,
7सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः “यदि तू मेरे मार्गों पर चले, और मेरी आज्ञा माने तो तू मेरेे घर पर शासन करेगा और मेरे आंगनों का रक्षक होगा, और जो लोग यहां खड़े हैं मैं तुझे उन सबके मध्य आने-जाने का अधिकार दूंगा।
8अब सुन, हे यहोशू महायाजक, तू और तेरे सामने बैठे तेरे ये मित्रगण-जो वास्तव में प्रतीक हैं; देखो, मैं अपने दास अर्थात् शाख को लाने वाला हूं,
9उस पत्थर को देखो जिसे मैंने यहोशू के सामने रखा है। उस एक ही पत्थर पर सात आंखें है। यहोवा की यह वाणी है कि, देख, मैं उस शिला पर एक लेख अंकित कर दूंगा, तथा उस देश का अधर्म एक ही दिन में दूर कर दूंगा।
10सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है कि उस दिन तुममें से प्रत्येक अपने पड़ोसी को अपनी दाखलता तथा अपने अंजीर के वृक्ष के नीचे आमंत्रित करेगा।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)