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पुराना नियम · जकर्याह · अध्याय 6 / 14

जकर्याह 6

1मैंने अपनी आंखें उठाकर पुनः दृष्टि की, और देखो, चार रथ दो पर्वतों के मध्य से चले आ रहे थे और वे पर्वत कांसे के थे।

2प्रथम रथ में लाल घोड़े, दूसरे में काले,

3तीसरे में श्वेत, तथा चौथे में तगड़े चितकबरे घोड़े जुते थे।

4तब जो स्वर्गदूत मुझसे बातें कर रहा था उससे मैंने पूछा, “हे मेरे प्रभु, ये क्या हैं?”

5तो स्वर्गदूत ने मुझे उत्तर दिया, “ये आकाश की चार आत्माएं हैं जो सम्पूर्ण पृथ्वी के स्वामी की सेवा-टहल करने के पश्चात् चली आ रही है।

6उनमें से काले घोड़े वाला रथ उत्तरी प्रदेश की ओर जा रहा है, तथा श्वेत घोड़ों वाला उसके पीछे-पीछे जा रहा है और चितकबरे घोड़ों वाला दक्षिण प्रदेश की ओर जा रहा है।

7ये सब बलिष्ठ घोड़े निकलकर सम्पूर्ण पृथ्वी पर गश्त लगाने के लिए उतावले थे।” इसलिए, उसने कहा, “जाओ, पृथ्वी पर गश्त लगाओ।” अतः उन्होंने पृथ्वी पर गश्त लगाई।

8तब उसने पुकारकर मुझसे कहा, “देख, जो उत्तरी देश की ओर जा रहे हैं उन्होंने वहां मेरे क्रोध को ठंडा किया है।”

9यहोवा का यह वचन भी मेरे पास पहुंचा,

10“निर्वासित लोगों में हेल्दै, तोबिय्याह और यदायाह से कुछ भेंट ले, और उसी दिन सपन्याह के पुत्र योशियाह के घर जा, जहां वे बेबीलोन से पहुंचे है।

11और चांदी-सोना लेकर एक मुकुट बना, और उसे यहोसादाक महायाजक के पुत्र, यहोशू के सिर पर रख।

12उसके बाद उससे कहः सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः उस मनुष्य को देख जिसका नाम शाख है क्योंकि वह वहां से फूट निकलेगा जहां वह है, और वही यहोवा के मन्दिर को बनाएगा।

13हां, वह वही है जो यहोवा के मन्दिर को बनाएगा, वह आदर भी पाएगा, तथा उसके सिंहासन पर बैठकर शासन करेगा। इस प्रकार, वह अपने सिंहासन पर याजक भी होगा तथा दोनों पदों के बीच मेल की सम्मति होगी।”

14“वह मुकुट यहोवा के मन्दिर में हेलेम, तोबिय्याह, यदायाह और सपन्याह के पुत्र हेन का स्मरण चिह्न होगा।

15जो लोग दूर हैं वे आकर यहोवा के मन्दिर को बनाएंगे।” तब तुम जानोगे कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है। यदि तुम अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा का पूरी रीति से पालन करो तो यह बात पूरी होगी।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)