पुराना नियम · जकर्याह · अध्याय 5 / 14
जकर्याह 5
1मैंने अपनी आंखें उठाकर पुनः दृष्टि की, तो देखो, एक उड़ता हुआ चर्मपत्र है।
2उसने मुझसे कहा, “तू क्या देखता है?” तब मैंने उत्तर दिया, “मुझे एक उड़ता हुआ चर्मपत्र दिखाई पड़ता है जिसकी लम्बाई बीस हाथ और चौड़ाई दस हाथ है।”
3उसने मुझसे फिर कहा, “यह वह शाप है जो सम्पूर्ण देश पर पड़ने वाला है। एक ओर लिखे हुए लेख के अनुसार प्रत्येक चोर नष्ट कर दिया जाएगा, तथा दूसरी ओर लिखे हुए लेख के अनुसार प्रत्येक झूठी शपथ खाने वाला नष्ट कर दिया जाएगा।
4सेनाओं के यहोवा की यह वाणी हैः मैं इसे भेजूंगा, और यह चोरी करने वाले के घर में तथा मेरे नाम से झूठी शपथ खाने वाले के घर में प्रवेश करेगा-और उस घर में रात बिताएगा तथा उसको लकड़ी-पत्थर सहित भस्म कर डालेगा।”
5तब जो स्वर्गदूत मुझसे बात कर रहा था वह बाहर चला गया, और उसने मुझसे कहा, “अब अपनी आंखें उठाकर देख, यह क्या है जो निकला आ रहा है?”
6मैंने पूछा, “यह क्या है?” उसने कहा, “यह तो एक एपा का नाप है जो निकला आ रहा है।” उसने पुनः कहा, “यह तो सारे देश के लोगों का प्रतीक है।
7और देखो, उस पर से शीशे का ढक्कन उठा लिया गया और एपा के अन्दर एक स्त्री बैठी हुई थी।”
8फिर उसने कहा, “यह स्त्री दुष्टता है।” तब उसने उस स्त्री को एपा के भीतर दबा दिया, तथा शीशे के भारी ढक्कन से एपा को ढांप दिया।
9इसके बाद मैंने अपनी आंखें उठाईं, और देखा कि दो स्त्रियां अपने पंखों से हवा में उड़ती आ रही है। उनके पंख लगलग के पंखों के समान है। वे एपा को उठाकर आकाश और पृथ्वी के बीच उड़ाए लिए जा रही है।
10तब मैंने उस स्वर्गदूत से जो मुझसे बात कर रहा था, पूछा, “वे एपा को कहां ले जा रही हैं?”
11उसने मुझसे कहा, “शिनार देश में, उसके लिए मन्दिर बनाने। जब वह बन जाएगा तब एपा अपने ही पाए पर खड़ा कर दिया जाएगा।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)