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पुराना नियम · 1 इतिहास · अध्याय 16 / 29

1 इतिहास 16

1तब परमेश्वर के सन्दूक को लाकर उन्होंने उस तम्बू के भीतर रखा जिसे दाऊद ने उसके लिए खड़ा किया था, और उन्होंने परमेश्वर के आगे होमबलि और मेलबलि चढ़ाए।

2जब दाऊद होमबलि और मेलबलि चढ़ा चुका, तब उसने यहोवा के नाम से प्रजा को आशीर्वाद दिया।

3तब उसने क्या पुरफ़ष क्या स्री सारे इस्राएलियों को एक-एक रोटी, एक-एक टुकड़ा मांस और किशमिश की एक-एक टिकिया बांट दी।

4तब उसने लेवियों मेें से कुछ को यहोवा के सन्दूक के आगे सेवा-टहल करने, और इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की चर्चा और उसका धन्यवाद और उसकी स्तुति करने के लिए नियुक्त कियाः

5उनका मुखिया तो आसाप था और उसके बाद जकर्याह, फिर यीएल, शमीरामोत, यहीएल, मत्तित्याह, एलीआब, बनायाह, ओबेद-एदोम, और यीएल थे जो वाघ, सारंगियां और वीणाएं लिए हुए थे, और आसाप जोर से बजने वाली झांझों को लिए हुए था,

6और बनायाह और यहजीएल नामक याजक परमेश्वर की वाचा के सन्दूक के आगे नित्य तुरहियां बजाया करते थे।

7तब उसी दिन दाऊद ने पहली बार यहोवा का धन्यवाद करने का काम आसाप और उसके कुटुम्बियों को सौंपा।

8यहोवा का धन्यवाद करो, उससेे प्रार्थना करो; जाति-जाति के बीच उसके कार्यों का प्रचार करो।

9उसके लिए गाओ, उसका स्तुतिगान करो; उसके समस्त अद्भुत कार्यों की चर्चा करो,

10उसके पवित्र नाम पर गर्व करो; यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो।

11यहोवा और उसके सामर्थ्य की खोज करो; निरन्तर उसके दर्शन के खोजी बने रहो।

12उसके किए हुए अद्भुत कार्यों को, वरन् उसके आश्चर्यकर्मों तथा उसके मुंह के वचनों को स्मरण करो,

13हे उसके दास इस्राएल के वंश, हे याकूब की सन्तान, तुम जो उसके चुने हुए हो!

14वही हमारा परमेश्वर यहोवा है; उसके न्याय के काम पृथ्वी भर में है।

15उसकी वाचा का सदा के लिए, हां, हजार पीढ़ियों तक उसके वचन को जो उसने ठहराया,

16वरन् उस वाचा को जो उसने इब्राहीम के साथ बांधी, और उसकी शपथ को जो उसने इसहाक के साथ खाई स्मरण करो।

17उसने उसको याकूब के लिए विधि करके, और इस्राएल के लिए सदा की वाचा बांधकर दृढ़ किया,

18क्योंकि उसने कहा था, “मैं कनान देश तुझको ही दूंगा, वह तेरा निज भाग होगा।”

19उस समय गिनती में वे थोड़े, वरन् बहुत ही थोड़े और देश में परदेशी थे।

20वे जाति-जाति में और राज्य-राज्य में फिरते रहे।

21फिर भी उसने किसी मनुष्य को उन पर अन्धेर करने न दिया, वरन् राजाओं को उसने यह कहकर उनके निमित्त चेतावनी दी

22कि “मेरे अभिषिक्तों को तुम मत छुओ, और न मेरे नबियों की हानि करो।”

23हे सारी पृथ्वी के लोगो, यहोवा के सामने गाओ, प्रतिदिन उसके किए हुए उद्धार का शुभ समाचार सुनाते रहो।

24देश-देश में उसकी महिमा का, और समस्त जातियों में उसके अद्भुत कार्यों का वर्णन करो।

25क्योंकि यहोवा महान् और अति प्रशंसायोग्य है, उसका भय सब देवताओं से अधिक माना जाए।

26क्योंकि देश-देश के सब देवता तो मूर्तियां ही हैं, परन्तु यहोवा ने आकाश मंडल को बनाया है।

27उसके सामने ऐश्वर्य और प्रताप है, उसके यहां सामर्थ्य और आनन्द है।

28हे जाति-जाति के कुलों, यहोवा का गुणानुवाद करो, यहोवा के सामर्थ्य और महिमा की वन्दना करो।

29यहोवा के नाम के योग्य उसकी महिमा करो, भेंट लेकर उसके सम्मुख आओ। पवित्रता से शोभायमान होकर यहोवा की अराधना करो।

30हे सारी पृथ्वी के लोगो, उसके सामने कांपते रहो। जगत निश्चय स्थिर है, वह टलने का नही।

31आकाश मग्न और पृथ्वी आनन्दित हो। जाति-जाति में कहा जाए, “यहोवा राज्य करता है।”

32समुद्र और उसमें की समस्त वस्तुएं हर्षनाद करें, मैदान और जो कुछ उसमें है सब प्रफुल्लित हो।

33तब वन के वृक्ष आनन्द से यहोवा के सामने जय-जयकार करेंगे, क्योंकि वह जगत का न्याय करने आ रहा है।

34यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, उसकी करफ़णा अनन्त है।

35तब कहो, “हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, हमें बचा ले, और जाति-जाति में से इकट्ठा करके हमें छुड़ा ले, कि हम तेरे पवित्र नाम का धन्यवाद करें, और तेरी स्तुति करते हुए तेरी प्रशंसा करे।

36इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, अनादिकाल से अनन्तकाल तक धन्य हो! तब सारी प्रजा बोल उठी, “आमीन,” और यहोवा की स्तुति करने लगी।

37और उसने वहां यहोवा की वाचा के सन्दूक के सामने आसाप और उसके भाइयों को नियुत्तफ़ किया कि वे निर्धारित कार्य के अनुसार प्रतिदिन सन्दूक के आगे निरन्तर सेवा-टहल किया करें,

38और ओबेद-एदोम और उसके अड़सठ भाइयों को भी, और द्वारपालों के लिए यदूतून के पुत्र ओबेद-एदोम और होसा को नियुत्तफ़ किया।

39और उसने सादोक याजक और उसके भाई याजकों को भी यहोवा के निवासस्थान के आगे जो गिबोन के ऊंचे स्थान में था, ठहरा दिया,

40कि जो कुछ यहोवा की व्यवस्था में लिखा है, जिसकी उसने इस्राएल को आज्ञा दी थी, उसके अनुसार वे निरन्तर भोर एवं संध्या को, होमबलि की वेदी पर यहोवा के लिए होमबलि चढ़ाया करे।

41और उनके साथ हेमान और यदूतून और अन्य लोग भी नाम लेकर चुने गए कि वे यहोवा की अनन्त करफ़णा के कारण उसका धन्यवाद करे।

42हेमान और यदूतून तो परमेश्वर के भजन के लिए तुरहियां और झांझें तथा अन्य बाजे लिए हुए उनके साथ के वादक थे, और यदूतून के वंशज द्वारपाल थे।

43तब सब लोग अपने-अपने घरों को चले गए, और दाऊद अपने घराने को आशीष देने लौट गया।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)