1 इतिहास 16:34
यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, उसकी करफ़णा अनन्त है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: 1 इतिहास 16
31आकाश मग्न और पृथ्वी आनन्दित हो। जाति-जाति में कहा जाए, “यहोवा राज्य करता है।”
32समुद्र और उसमें की समस्त वस्तुएं हर्षनाद करें, मैदान और जो कुछ उसमें है सब प्रफुल्लित हो।
33तब वन के वृक्ष आनन्द से यहोवा के सामने जय-जयकार करेंगे, क्योंकि वह जगत का न्याय करने आ रहा है।
34यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, उसकी करफ़णा अनन्त है।
35तब कहो, “हे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, हमें बचा ले, और जाति-जाति में से इकट्ठा करके हमें छुड़ा ले, कि हम तेरे पवित्र नाम का धन्यवाद करें, और तेरी स्तुति करते हुए तेरी प्रशंसा करे।
36इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, अनादिकाल से अनन्तकाल तक धन्य हो! तब सारी प्रजा बोल उठी, “आमीन,” और यहोवा की स्तुति करने लगी।
37और उसने वहां यहोवा की वाचा के सन्दूक के सामने आसाप और उसके भाइयों को नियुत्तफ़ किया कि वे निर्धारित कार्य के अनुसार प्रतिदिन सन्दूक के आगे निरन्तर सेवा-टहल किया करें,
संबंधित पद
- 2 इतिहास 7:3
और जब आग गिरी और वह भवन यहोवा के तेज से भर गया, तब उसे देखकर समस्त इस्राएल भूमि की ओर मुंह किए हुए फ़र्श पर झुके और यह कहकर यहोवा की आराधना तथा स्तुति करने लगे, “निश्चय, वह भला है और उसकी करफ़णा सदा की है।”
- एज्रा 3:11
उन्होंने यहोवा की स्तुति करते हुए और उसको धन्यवाद देते हुए इस प्रकार गाया, “वह भला है और उसकी करुणा इस्राएल के ऊपर सदैव के लिए है।” तब सब लोग यहोवा की स्तुति करते हुए उच्च स्वर से जय-जयकार करने लगे, क्योंकि यहोवा के भवन की नींव डाली जा चुकी थी।
- 2 इतिहास 5:13
जब तुरही वादक और गायक एक स्वर में यहोवा की स्तुति और महिमा करने के लिए तुरहियों, झांझो और वाघों के साथ मिलकर एक स्वर में गा उठे और यह कहकर यहोवा की प्रशंसा करने लगे, “निश्चय वह भला है, क्योंकि उसकी करफ़णा सदा की है,” तब वह भवन अर्थात् यहोवा का भवन बादल से भर गया।
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