पुराना नियम · 2 इतिहास · अध्याय 7 / 36
2 इतिहास 7
1जब सुलैमान प्रार्थना कर चुका, तब स्वर्ग से आग गिरी जिससे होमबलि तथा अन्य बलियां भस्म हो गईं और यहोवा का तेज भवन में भर गया।
2और याजक यहोवा के भवन में प्रवेश न कर सके, क्योंकि यहोवा का भवन यहोवा के तेज से भरा हुआ था।
3और जब आग गिरी और वह भवन यहोवा के तेज से भर गया, तब उसे देखकर समस्त इस्राएल भूमि की ओर मुंह किए हुए फ़र्श पर झुके और यह कहकर यहोवा की आराधना तथा स्तुति करने लगे, “निश्चय, वह भला है और उसकी करफ़णा सदा की है।”
4तब राजा और सब लोगों ने यहोवा के समक्ष बलि चढ़ाई।
5और राजा सुलैमान ने बाईस हजार बैलों, और एक लाख बीस हजार भेड़-बकरियाेंं कि बलि चढ़ाई। इस प्रकार राजा और सब लोगों ने परमेश्वर के भवन की प्रतिष्ठा की।
6और याजक अपने अपने स्थानों पर खड़े रहे, और लेवीय भी यहोवा के लिए गीत गाने हेतु उन बाजों को लिए हुए थे जिनको राजा दाऊद ने यहोवा की स्तुति करने के लिए बनाया था। राजा दाऊद यह कहकर कि उसकी करफ़णा सदा की है उनसे स्तुति करवाता था। याजक तुरहियां फूंकते रहे; और समस्त इस्राएल खड़े रहे।
7तब सुलैमान ने आंगन के उस बीच वाले भाग को जो यहोवा के भवन के सामने था, पवित्र करके होमबलियों तथा मेलबलियों की चर्बी वहीं चढ़ाई, क्योंकि कांसे की जो वेदी सुलैमान ने बनाई थी, वह होमबलि, अन्नबलि तथा चर्बी चढ़ाने के लिए छोटी थी।
8अतः सुलैमान और उसके संग हमाद के दर्रे से मिस्र के नाले तक के समस्त इस्राएलियों की एक बहुत बड़ी सभा ने उस अवसर पर सात दिन तक पर्व मनाया।
9आठवें दिन उनकी पवित्र सभा हुई, क्योंकि सात दिन तक वे वेदी की प्रतिष्ठा करते और सात दिन तक पर्व मनाते रहे।
10सातवें महीने के तेइसवें दिन उसने लोगों को अपने-अपने घर जाने के लिए विदा किया। और वे उस भलाई के कारण जो यहोवा ने दाऊद, सुलैमान और अपनी प्रजा इस्राएल के साथ की थी, हृदय से आनन्दित थे।
11इस प्रकार सुलैमान ने यहोवा के भवन और राजमहल को बनाकर समाप्त किया, और जो कुछ उसने यहोवा के भवन तथा अपने महल में करने की योजना बनाई थी, उसको सफलतापूर्वक पूरा किया।
12तब यहोवा ने रात में सुलैमान को दर्शन देकर उससे कहा, “मैंने तेरी प्रार्थना सुन ली है, और इस स्थान को अपने लिए ठहराया है कि इस भवन में बलिदान चढ़ाए जाए।
13यदि मैं आकाश को बन्द कर दूं कि वर्षा न हो, व टिड्डियों को देश उजाड़ने की आज्ञा दूं व अपने लोगों में महामारी भेजूं,
14और यदि मेरे लोग जो मेरे नाम के कहलाते हैं, दीन होकर प्रार्थना करें और मेरे दर्शन के खोजी होकर अपने बुरे मार्गों से फिरें, तब मैं स्वर्ग में से सुनकर उनका पाप क्षमा करूंगा और उनके देश को चंगा कर दूंगा।
15अब से इस स्थान में की जाने वाली प्रार्थना पर मेरी आंखों खुली और मेरे कान लगे रहेंगे।
16क्योंकि अब मैंने इस भवन को अपनाया और पवित्र किया है कि मेरा नाम सर्वदा इसमें बना रहे, और मेरी आंखें तथा मेरा मन दोनों निरन्तर यहीं लगेे रहेंगे।
17और यदि तू अपने पिता दाऊद के समान मेरे सम्मुख चलता रहे और जो कुछ मैंने तुझे आज्ञा दी है, उसके अनुसार किया करे और मेरी विधियों तथा मेरे नियमों को माना करे,
18तो मैं तेरे राजसिंहासन को सुदृढ़ करूंगा जैसा कि मैंने तेरे पिता दाऊद के साथ वाचा बांधी थी, कि तेरे वंश में इस्राएल की गद्दी पर विराजने वाला सदा बना रहेगा।
19“परन्तु यदि तुम फिर कर मेरी उन विधियों तथा आज्ञाओं को जो मैंने तुमको दी है त्याग दो और जाकर अन्य देवताओं की उपासना करो तथा उनको दण्डवत् करो,
20तो मैं तुमको अपने इस देश से जो मैंने तुमको दिया है समूल उखाड़ फेंकूंगा, और उस भवन को जिसे मैंने अपने नाम के लिए पवित्र किया है अपनी आंखों से दूर कर दूंगा। इस प्रकार सब जातियों में यह विनाश की उपमा और उदाहरण बनेगा।
21और यह भवन जो इतना विशाल है, इसके पास से होकर जाने वाला प्रत्येक व्यक्ति उस समय चकित होकर पूछेगा ‘यहोवा ने इस देश तथा इस भवन के साथ ऐसा क्यों किया?’
22और लोग उत्तर देंगे, ‘उन्होंने तो अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा को जो उनको मिस्र देश से निकाल लाया था त्यागकर पराए देवताओं को ग्रहण किया और उन्हें दण्डवत् करके उनकी उपासना की, इसीलिए उसने उन पर यह सब विपत्ति डाली है’।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)