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पुराना नियम · 1 इतिहास · अध्याय 19 / 29

1 इतिहास 19

1इसके पश्चात् ऐसा हुआ कि अम्मोनियों के राजा नाहाश की मृत्यृ हो गई, और उसके स्थान पर उसका पुत्र राजा हुआ।

2तब दाऊद ने कहा, “मैं नाहाश के पुत्र हानून पर कृपा करूंगा, क्योंकि उसके पिता ने मुझ पर कृपादृष्टि की थी।” अतः दाऊद ने उसके पिता की मृत्यु पर उसे सांत्वना देने के लिए दूत भेजे। और दाऊद के कर्मचारी अम्मोनियों के देश में हानून के पास उसे सांत्वना देने आए।

3परन्तु अम्मोनियों के राजकुमारों ने हानून से कहा, “क्या तू सोचता है कि दाऊद ने सांत्वना देनेवालों को तेरे पिता का आदर करने के लिए तेरे पास भेजा है? क्या उसके कर्मचारी तेरे पास इसलिए नहीं आए कि तेरे देश की छानबीन करें, तख्ता पलटें और भेद लें?”

4तब हानून ने दाऊद के कर्मचारियों को पकड़ा और उनकी दाढ़ी मुड़वाकर उनके आधे वस्र कूल्हे तक कटवा डाले और उन्हें भेज दिया।

5तब कई लोगों ने जाकर दाऊद को बता दिया कि उन पुरफ़षों के साथ कैसा व्यवहार किया गया है। अतः उसने उनसे मिलने के लिए लोगोें को भेजा क्योंकि उनका बहुत अपमान किया गया था। और राजा ने कहा, “जब तक तुम्हारी दाढ़ियां बढ़ न जाएं, यरीहो में ठहरे रहना और बाद में लौट आना।”

6जब अम्मोनियों ने देखा कि उन्होंने अपने आप को दाऊद के आगे घृणित बना दिया है तब हानून और अम्मोनियों ने चांदी की एक हजार मोहरें भेजीं कि अपने लिए मिसुपुतामिया, अरम्माका ओर सोबा से रथ और सवार किराए पर मंगवाए।

7अतः उन्होंने बत्तीस हजार रथों और माका के राजा और उसके लोगों को किराए पर बुलवा लिया जिन्होंने आकर मेदबा के सामने अपने डेरे खड़े किए। और अम्मोनी अपने-अपने नगरों से इकट्ठे होकर लड़ने को आए।

8यह सुनकर दाऊद ने योआब और शूरवीरों की पूरी सेना को भेजा।

9तब अम्मोनियों ने निकलकर नगर के फाटक के पास व्यूह-रचना की और जो राजा आए थे वे उनसे अलग मैदान में थे।

10जब योआब ने देखा कि उसके आगे और पीछे उनके विरफ़द्ध युद्ध के लिए व्यूह-रचना की गई है तब उसने इस्राएल वीरों में से छांटकर चुन लिए और उन्होंने सीरियाइयों के विरफ़द्ध व्यूह-रचना की।

11और शेष लोगों को अपने भाई अबीशै के हाथ सौंप दिया; और उन्होंने अम्मोनियों के विरफ़द्ध व्यूह-रचना की।

12और उसने कहा, “यदि सीरियाई मुझसे अधिक सामर्थी सिद्ध हों तो तू मेरी सहायता करना; पर यदि अम्मोनी तुझसे अधिक सामर्थी सिद्ध हों तो मैं तेरी सहायता करूंगा।

13हियाव बांध, और हम सब अपने लोगों और अपने परमेश्वर के नगरों के निमित्त पुरफ़षार्थ करे। और यहोवा जैसा उसको अच्छा लगे वैसा ही करेगा।”

14तब योआब और उसके साथ के लोग सीरियाइयों से युद्ध करने को आगे बढ़े और सीरियाई उसके सामने से भाग गए।

15यह देखकर कि सीरियाई भाग निकले, अम्मोनी भी उसके भाई अबीशै के सामने से भागकर नगर के भीतर घुस गए। तब योआब यरूशलेम को लौट आया।

16जब सीरीयाइयों ने देखा कि हम इस्राएलियों से हार गए हैं तो उन्होंने दूतों को भेजकर महानद के पार के सीरियाइयों को बुलवाया और हददेजेर का सेनापति शोपक उनकी अगुवाई कर रहा था।

17जब दाऊद को यह बताया गया तब वह समस्त इस्राएलियों को इकट्ठा करके यर्दन के पार गया, उनपर चढ़ाई की और उनके विरफ़द्ध व्यूह-रचना की, और जब दाऊद ने सीरियाइयों के विरुद्ध पांति बांधी तब वे उसके विरुद्ध लड़ने लगे।

18और सीरियाई लोग इस्राएलियों के सामने से भाग निकले, और दाऊद ने सीरियाइयों के सात हजार महारथियों और चालीस हजार प्यादों को मौत के घाट उतार दिया और सेनापति शोपक को भी मार डाला।

19जब हददेजेर के कर्मचारियों ने देखा कि वे इस्राएलियों से पराजित हो गए तो उन्होंने दाऊद से सन्धि कर ली और उसके अधीन हो गए; और इस प्रकार सीरियाई फिर कभी अम्मोनियों की सहायता करने को तैयार न हुए।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)