नया नियम · 1 कुरिन्थियों · अध्याय 5 / 16
1 कुरिन्थियों 5
1यह वास्तव में सुनने में आया है कि तुम्हारे मध्य व्यभिचार होता है, और ऐसा व्यभिचार जो गै़रयहूदियों में भी नहीं होता, अर्थात् एक मनुष्य अपने पिता की पत्नी को रखता है।
2पर तुम घमण्ड से फूल गए हो, और तुम इसके बदले शोकित नहीं होते, जिससे कि ऐसा कार्य करने वाला तुम्हारे मध्य से निकाला जाता।
3जहां तक मेरा सम्बन्ध है यघपि मैं शरीर में तो नहीं फिर भी आत्मा में तुम्हारे मध्य उपस्थित हूं, और मानो उपस्थित रहकर ऐसे घृणित कार्य करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध अपनी ओर से यह निर्णय दे चुका हूं कि
4जब तुम हमारे प्रभु यीशु के नाम में एकत्रित हो, और आत्मा में मैं भी तुम्हारे साथ, तो हमारे प्रभु यीशु के सामर्थ्य से
5ऐसा मनुष्य शरीर के विनाश के लिए शैतान को सौंपा जाए, कि उसकी आत्मा प्रभु यीशु के दिन में उद्धार पाए।
6तुम्हारा घमण्ड करना अच्छा नहीं है। क्या तुम नहीं जानते कि थोड़ा-सा ख़मीर पूरे गूंधे आटे को ख़मीरा कर देता है?
7पुराना ख़मीर निकालकर अपने आप को शुद्ध करो कि ऐसा नया गूंधा अर्थात् अख़मीरी आटा बन जाओ जैसा कि तुम वास्तव में हो। क्योंकि हमारे फसह का मेमना मसीह भी बलिदान हुआ है।
8इसलिए हम न तो पुराने ख़मीर से, न बुराई व दुष्टता के ख़मीर से, परन्तु निष्कपटता और सच्चाई की अख़मीरी रोटी से फसह मनाए।
9मैंने अपनी पत्री में तुम्हें लिखा है कि व्यभिचारी लोगों की संगति न करना।
10यह नहीं कि तुम इस संसार के व्यभिचारियों, लोभियों, लुटेरों या मूर्तिपूजकों से संगति न रखो, तब तो तुम्हें संसार से निकल जाना पड़ता।
11परन्तु मैंने वास्तव में यह लिखा है कि यदि कोई व्यक्ति भाई कहला कर व्यभिचारी, लोभी, मूर्तिपूजक, गाली देने वाला, पियक्कड़ या लुटेरा हो तो उसकी संगति न करना, वरन् ऐसे व्यक्ति के साथ भोजन भी न करना।
12क्योंकि मुझे बाहर वालों का न्याय करने से क्या काम? क्या तुम्हें उन्हीं का न्याय नहीं करना है जो कलीसिया में हैं?
13बाहर वालों का न्याय तो परमेश्वर करता है। परन्तु तुम ऐसे कुकर्मी को अपने बीच में से निकाल दो।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)