नया नियम · 1 कुरिन्थियों · अध्याय 6 / 16
1 कुरिन्थियों 6
1जब तुम्हारे मध्य आपस में झगड़ा होता है तो क्या तुम में से ऐसा कोई है जो पवित्र लोगों के पास जाने के बदले अधर्मियों से न्याय करवाने का दुस्साहस करता है?
2क्या तुम नहीं जानते कि पवित्र लोग जगत का न्याय करेंगे? और यदि तुम्हारे द्वारा संसार का न्याय किया जाएगा तो क्या तुम इन छोटे-छोटे झगड़ों का निर्णय करने के योग्य नहीं?
3क्या तुम नहीं जानते कि हम स्वर्गदूतों का न्याय करेंगे? तो क्या हम इन सांसारिक बातों का न्याय करने के योग्य नहीं?
4फिर जब तुम्हारे मध्य सांसारिक बातों के लिए न्यायालय हैं, क्या तुम ऐसे व्यक्तियों को न्यायी नियुक्त करते हो जिनका कलीसिया में कोई महत्त्व नहीं?
5मैं तुम्हें लज्जित करने के लिए यह कह रहा हू। क्या यह सच है कि तुम्हारे मध्य एक भी बुद्धिमान नहीं जो अपने भाइयों के आपसी झगड़े सुलझा सके?
6क्या भाई अपने भाई पर मुकद्दमा चलाता है और वह भी अविश्वासियों के सम्मुख?
7तब तो वास्तव में तुम्हारी पहली हार यही है कि तुम्हारे आपस में मुकद्दमें चलते है। इसकी अपेक्षा तुम अन्याय क्यों नहीं सह लेते? तुम ही छल क्यों नहीं सह लेते?
8इसके विपरीत तुम स्वयं ही अन्याय और छल करते हो, और वह भी अपने भाइयों के साथ!
9क्या तुम नहीं जानते कि दुष्ट लोग परमेश्वर के राज्य के उत्तराधिकारी न होंगे? धोखा न खाओ: न व्यभिचारी, न मूर्तिपूजक, न परस्त्रीगामी, न कामातुर, न पुरुषगामी,
10न चोर, न लोभी, न पियक्कड़, न गालियां बकने वाले, और न लुटेरे, परमेश्वर के राज्य के उत्तराधिकारी होंगे।
11और तुम में से कुछ ऐसे ही थे, परन्तु तुम अब प्रभु यीशु मसीह के नाम में और हमारे परमेश्वर के आत्मा के द्वारा धोए गए, पवित्र किए गए और धर्मी ठहराए गए।
12सब वस्तुएं मेरे लिए उचित तो हैं, परन्तु मैं किसी वस्तु के अधीन न होऊंगा,
13भोजन पेट के लिए और पेट भोजन के लिए है, परन्तु परमेश्वर इन दोनों का अन्त कर देगा। फिर भी देह व्यभिचार के लिए नहीं, परन्तु प्रभु के लिए है, और प्रभु देह के लिए है।
14परमेश्वर ने न केवल प्रभु को ही जिला उठाया, वरन् वह हमें भी वैसे ही अपनी सामर्थ्य से जिला उठाएगा।
15क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारे शरीर मसीह के अंग हैं? तो क्या मैं मसीह के अंगों को लेकर वेशया के अंग बना दूं? कदापि नहीं!
16या क्या तुम यह नहीं जानते कि वह जो वेशया से संयोग करता है उसके साथ एक तन हो जाता है? क्योंकि कहा गया है, ‘‘वे दोनों एक तन होंगे।’’
17परन्तु वह जो प्रभु से संगति करता है उसके साथ एक आत्मा हो जाता है।
18व्यभिचार से भागो। अन्य सारे पाप जो मनुष्य करता है देह के बाहर होते हैं, परन्तु व्यभिचारी तो अपनी देह के विरुद्ध पाप करता है।
19क्या तुम नहीं जानते कि तुम में से प्रत्येक की देह पवित्र आत्मा का मन्दिर है जो तुम में है, और जिसे तुमने परमेश्वर से पाया है, और कि तुम अपने नहीं हो?
20क्योंकि तुम मूल्य देकर खरीदे गए होः इसलिए अपने शरीर के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)