पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 5 / 22
1 राजा 5
1जब सूर के राजा हीराम ने सुना कि लोगों ने सुलैमान का उसके पिता के स्थान पर राज्याभिषेक किया है तो उसने उसके पास अपने सेवक भेजे, क्योंकि वह दाऊद के जीवन भर उसका मित्र रहा था।
2तब सुलैमान ने हीराम के पास संदेश भेजा,
3“तुझे मालूम है कि मेरा पिता दाऊद अपने परमेश्वर यहोवा के नाम का भवन बनवाने में असमर्थ रहा क्योंकि वह युद्ध में चारों ओर से उलझा रहा, जब तक कि यहोवा ने उन्हें उसके पांवों तले न कर दिया।
4परन्तु अब यहोवा मेरे परमेश्वर ने मुझे चारों ओर से विश्राम दिया है। अब न तो कोई विरोधी है और न विपत्ति।
5और देख, यहोवा ने मेरे पिता दाऊद से कहा था, ‘तेरा पुत्र जिसे मैं तेरे स्थान पर राजगद्दी पर बैठाऊंगा, वही मेरे नाम का भवन बनाएगा।’ अब मैं अपने परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनाना चाहता हू।
6इसलिए अब तू आज्ञा दे कि वे मेरे लिए लेबनोन से देवदार काटें और मेरे दास तेरे दासों के साथ रहेंगे; और मैं तेरे ठहराने के अनुसार तेरे दासों के लिए तुझे मजदूरी दूंगा, क्योंकि तू जानता है कि सीदोनियों के समान लकड़ी काटने का काम हममें से कोई भी नहीं जानता।”
7और ऐसा हुआ कि जब हीराम ने सुलैमान की ये बातें सुनीं तो उसने अति आनन्दित होकर कहा, “आज यहोवा धन्य हो, जिसने दाऊद को एक महान् प्रजा पर राज्य करने के लिए एक बुद्धिमान पुत्र दिया है।”
8तब हीराम ने सुलैमान के पास यह कहला भेजा, “मैंने तेरे भेजे हुए समाचार को सुना है। देख, देवदार और सनौवर की लकड़ी के सम्बन्ध में जैसा तू चाहता है वैसा ही मैं करूंगा।
9मेरे दास उन्हें लेबनोन से समुद्र तक पहुंचाएंगे, फिर मैं उनके बेड़े बनवाकर समुद्र से जहां तू बताए वहीं पहुंचवा कर खुलवा दूंगा, फिर तू उन्हें ले जाना। और तब तू मेरे घराने के लिए भोजन देकर मेरी इच्छा पूरी करना।”
10अतः हीराम ने सुलैमान को उसकी इच्छा के अनुसार देवदार और सनौवर की लकड़ी दी।
11तब सुलैमान ने हीराम के घराने के भोजन के लिए बीस हजार कोर गेहूं और बीस कोर पेरा हुआ तेल दिया; इस प्रकार सुलैमान प्रति वर्ष हीराम को दिया करता था।
12और यहोवा ने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार सुलैमान को बुद्धि दी; और हीराम तथा सुलैमान के बीच मेल बना रहा और दोनों ने आपस में वाचा भी बांधी।
13तब सुलैमान ने समस्त इस्राएल में से लोगों को बेगारी पर लगाया। और बेगार पुरफ़षों की संख्या तीस हजार थी।
14और वह प्रतिमाह दस हजार बेगार लेबनोन को बारी-बारी से भेजता था। वे एक माह तो लेबनोन पर और दो माह घर पर रहते थे। और बेगारों का मुखिया अदोनीराम था।
15और सुलैमान के पास बोझ ढोने वाले सत्तर हजार, और पहाड़ पर पत्थर काटने वाले अस्सी हजार लोग थे।
16इनके अतिरिक्त सुलैमान के पास तीन हजार तीन सौ मुखिए थे जो काम करने वालों के ऊपर थे।
17तब राजा ने आज्ञा दी और लोगों ने बड़े-बड़े और बहुमूल्य पत्थर खोद कर निकाले कि गढ़े हुए पत्थरों से भवन की नींव डाली जाए।
18तब सुलैमान के कारीगरों और हीराम के कारीगरों और गबालियों ने उनको काट कर गढ़ा और भवन बनाने के लिए लकड़ी और पत्थर तैयार किए।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)