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पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 6 / 22

1 राजा 6

1फिर ऐसा हुआ कि इस्राएलियों के मिस्र देश से निकलने के बाद चार सौ अस्सीवें वर्ष में जो सुलैमान का इस्राएल पर राज्य करने का चौथा वर्ष था उसके जीव नामक दूसरे महीने में वह यहोवा का भवन बनाने लगा।

2वह भवन जिसे राजा सुलैमान ने यहोवा के लिए बनाया, उसकी लम्बाई साठ हाथ, चौड़ाई बीस हाथ और ऊंचाई तीस हाथ थी।

3और मन्दिर के मध्य भाग के सामने के ओसारे की लम्बाई बीस हाथ अर्थात् भवन की चौड़ाई के बराबर थी, और भवन के सामने उसकी चौड़ाई दस हाथ थी।

4फिर उसने भवन के लिए चौखट सहित जालीदार खिड़कियां भी बनवाईं।

5और उसने भवन के आसपास की दीवारों से सटे हुए अर्थात् मन्दिर और भीतरी पवित्र स्थान के आसपास कोठरियां और उपरौठी कोठरियां भी बनवाईं।

6सबसे नीचे की मंजिल की चौड़ाई पांच हाथ और बीच वाली की छः हाथ और तीसरी की सात हाथ थी। क्योंकि उसने भवन के आसपास दीवार को बाहर की ओर कुर्सीदार बनाया था जिससे कि कड़ियां भवन की दीवारों को पकड़े हुए न हो।

7और भवन बनाए जाते समय वह ऐसे पत्थरों से बनाया गया, जो ख़दान में पहले से गढ़कर तैयार किए गए थे और जब भवन बनाया जा रहा था तब हथौड़े, बसूली व लोहे के किसी भी प्रकार के औजार की आवाज सुनाई नहीं पड़ी।

8बाहर नीचे वाली कोठरियों का द्वार भवन की दाहिनी ओर था और वे चक्करदार सीढ़ियों से बीच वाली मंजिल में और उनसे तीसरी मंजिल में जाया करते थे।

9अतः उसने भवन को बनाना समाप्त किया, और उसकी छत देवदार की कड़ियों और तख़्तों से बनाई।

10और पूरे भवन से सटी हुई जो मंजिलें उसने बनाईं, प्रत्येक पांच हाथ ऊंची थी और वे देवदार की कड़ियों द्वारा भवन से कसी हुई थी।

11तब यहोवा का यह वचन सुलैमान के पास पहुंचा,

12“यह भवन जिसे तू बना रहा है, यदि तू मेरी विधियों पर चले और मेरे नियमों को माने और मेरी सब आज्ञाओं पर आचरण करके उनका पालन करे तो मैं अपने उस वचन को पूरा करूंगा जो तेरे विषय में मैंने तेरे पिता दाऊद को दिया था।

13और मैं इस्राएलियों के मध्य निवास करूंगा, और अपनी प्रजा इस्राएल को न त्यागूंगा।”

14अतः सुलैमान ने भवन को बनाकर पूरा किया।

15तब उसने भवन की दीवारों पर अन्दर की ओर देवदार के तख़्ते लगाए, और भवन के फ़र्श से छत तक की भीतर वाली दीवारों पर लकड़ी के तख़्ते जड़े और भवन के फ़र्श पर उसने सनौवर के तख़्तों को लगाया।

16फिर उसने भवन के पीछे कि ओर बीस हाथ तक फ़र्श से लेकर छत तक देवदार के तख़्ते लगाए; उसने इसे भवन के भीतरी भाग में पवित्रस्थान वरन् परमपवित्र स्थान के लिए बनाया।

17भवन अर्थात् पवित्रस्थान के सामने के मन्दिर की लम्बाई चालीस हाथ थी।

18और भवन के भीतरी भाग में देवदार के तख़्ते लगे थे, और उन पर इन्द्रायन और खिले हुए फूल खुदे थे। सब देवदार ही थाः पत्थर कहीें नहीं दिखाई देता था।

19फिर उसने यहोवा की वाचा का सन्दूक रखने के लिए भवन के भीतर एक पवित्रस्थान बनाया।

20और भीतर वाले उस पवित्रस्थान की लम्बाई बीस हाथ, चौड़ाई बीस हाथ, और ऊंचाई बीस हाथ थी, और उसने उसे चोखे सोने से मढ़वाया और वेदी पर देवदार के तख़्ते लगवाए।

21फिर सुलैमान ने भवन को भीतर से चोखे सोने से मढ़वाया, और भीतरवाले पवित्रस्थान के सामने सोने की जंजीरें लगाईं और उसको भी सोने से मढ़वाया।

22और उसने पूरे भवन को सोने से मढ़वाकर उसका काम पूरा किया। और भीतर वाले पवित्रस्थान की पूरी वेदी को भी उसने सोने से मढ़वाया।

23उसने भीतर वाले पवित्रस्थान में जैतून की लकड़ी के दस-दस हाथ ऊंचे दो करूब भी बनाए।

24एक करूब का एक पंख पांच हाथ का और उसका दूसरा पंख भी पांच हाथ था का था, अर्थात् एक पंख के सिरे से दूसरे पंख के सिरे तक दस हाथ।

25और दूसरा करूब भी दस हाथ का था, दोनों करूब एक ही नाप और एक ही आकार के थे।

26एक करूब की ऊंचाई दस हाथ, और दूसरे की भी इतनी ही थी।

27और उसने करूबों को भीतर के भवन में रखवा दिया, और करूबों के पंख ऐसे फैले थे कि एक करूब का एक पंख एक दीवार को और दूसरे करूब के पंख दूसरी दीवार को स्पर्श करता था, इस प्रकार उनके दूसरे दो पंख भवन के मध्य में एक दूसरे से स्पर्श करते थे।

28और उसने करूबों को भी सोने से मढ़वाया।

29फिर उसने भवन के भीतरी और बाहरी कक्ष दोनों की सब दीवारों पर चारों ओर करूब, ख़जूर के वृक्ष, और खिले हुए फूल खुदवाए।

30और उसने भवन के भीतरी और बाहरी कक्ष, दोनों के फ़र्श सोने से मढ़वाए।

31पवित्रस्थान में प्रवेश करने के लिए उसने जैतून की लकड़ी के दरवाजे, सिरहाना और पंचकोणीय चौखट बनवाया।

32अतः उसने दो दरवाजे जैतून की लकड़ी से बनवाए और उन पर उसने करूब, खजूर के वृक्ष, और खिले हुए फूल खुदवाए और उन्हेंं सोने से मढ़ा; और करूबों और ख़जूरों के ऊपर सोना मढ़वा दिया।

33इसी प्रकार उसने मन्दिर के द्वार के लिए भी जैतून की लकड़ी के चौकोर चौखट बनवाए।

34दोनों दरवाजे सनौवर की लकड़ी के थे जिनमें एक दरवाजे के दो पट चूलों पर घूमते थे और दूसरे दरवाजे के पट भी दोनो चूल पर घूमते थे।

35और उसने उस पर भी करूब, खजूर के वृक्ष और खिले हुए फूलों की नक्काशी करवाई और उस नक्काशी के काम को उसने सोने की परत से मढ़ दिया।

36और उसने भीतर वाले आंगन के घेरे को गढ़े हुए पत्थरों के तीन रद्दों और एक परत देवदार की लकड़ी की कड़ियां लगा कर बनाया।

37चौथे वर्ष के जीव नामक महीने में यहोवा के भवन की नींव डाली गई।

38और गयारहवें वर्ष के बूल नाम आठवें महीने में वह भवन सब भागों सहित योजना के अनुसार बन कर तैयार हो गया। इस प्रकार सुलैमान को उसके बनाने में सात वर्ष लगे।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)