पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 9 / 22
1 राजा 9
1ऐसा हुआ कि जब सुलैमान यहोवा के भवन और राजभवन और जो कुछ उसने चाहा उसे बना चुका,
2तब यहोवा ने सुलैमान को जैसे गिबोन में दर्शन दिया था वैसे ही दूसरी बार भी दर्शन दिया।
3और यहोवा ने उससे कहा, “मैंने तेरी प्रार्थना और गिड़गिड़ाहट को जो तूने मुझसे की है, सुनी है; इस भवन को जिसे तूने बनाया है उसमें मैंने अपना नाम सदा के लिए रख कर उसे पवित्र किया है और मेरी आंखेें और मेरा मन नित्य वहीें लगे रहेंगे।
4और तुझसे यह कहना है, यदि तू मेरे सामने अपने पिता दाऊद के समान मन की खराई और सिधाई से चले और उन सब आज्ञाओं के अनुसार करता रहे जो मैंने तुझे दी हैं और मेरी सब विधियों अैर नियमों को मानता रहे,
5तो मैं तेरी राजगद्दी इस्राएल के ऊपर सदा के लिए स्थिर करूंगा, जैसा कि मैंने तेरे पिता को यह कहकर वचन दिया था, ‘तेरे कुल में इस्राएल की गद्दी पर विराजने वाले की कमी न होगी।’
6परन्तु यदि तुम लोग और तुम्हारे वंशज मेरे पीछे चलना छोड़ दें और मेरी आज्ञाओं और विधियों को जो मैंने तुम को दी हैं न मानें, और जाकर पराए देवताओं की सेवा और उपासना करें,
7तो मैं इस्राएल को इस देश में से जो मैंने उनको दिया है मिटा डालूंगा और इस भवन को जिसे मैंने अपने नाम के लिए पवित्र किया है अपनी दृष्टि से उतार दूंगा। इस प्रकार सब जातियों में इस्राएल विनाश की उपमा और उदाहरण बनेगा।
8और यह भवन मलबे का ढेर हो जाएगा; और जो कोई इसके पास से होकर चलेगा वह चकित होकर ताना मारेगा कि यहोवा ने इस देश और इस भवन के साथ ऐसा क्यों किया?
9और लोग कहेंगे, ‘क्योंकि उन्होंने अपने परमेश्वर यहोवा को जो उनके पूर्वजों को मिस्र देश से निकाल लाया था, त्याग दिया और पराए देवताओं को अपनाकर उनकी सेवा और उपासना की, इसलिए यहोवा ने यह सब भारी संकट उन पर डाला है’।”
10और ऐसा हुआ कि यहोवा के भवन और राजभवन दोनों को बनाने में सुलैमान को बीस वर्ष लग गए।
11इसके बाद राजा सुलैमान ने हीराम को गलील देश के बीस नगर दिए। क्योंकि सूर के राजा हीराम ने सुलैमान की सारी इच्छा के अनुसार उसको देवदार, सनौवर की लकड़ी और सोना दिया था।
12तब हीराम सूर से उन नगरों को देखने गया जो सुलैमान ने उसे दिए थे, और वे उसे अच्छे न लगे।
13और उसने कहा, “हे मेरे भाई, ये तूने कैसे नगर मुझे दिए हैं?” इसलिए वे नगर आज तक काबूल देश कहलाते है।
14हीराम तो राजा के पास एक सौ बीस किक्कार सोना भेज चुका था।
15राजा सुलैमान ने यहोवा के भवन, अपने भवन, मिल्लो, यरूशलेम की शहरपनाह, हासोर, मगिद्दो और गेजेर को बनवाने में जो बेगारी कराई उसका वर्णन इस प्रकार है।
16क्योंकि मिस्र के राजा फि़रौन ने गेजेर पर आक्रमण करके कब्जा कर लिया और उसे आग लगाकर फूंक दिया था और उस नगर में रहने वाले कनानियों को मार डाला था, उसने वह नगर अपनी बेटी अर्थात् सुलैमान की पत्नी को दहेज में दे दिया था।
17अतः सुलैमान ने गेजेर और नीचे वाले बथोरेन
18और बालात और तामार को फिर से बनाया जो उस देश के जंगल में थे,
19और उन सब भंडार वाले नगरों को जो सुलैमान के अपने थे, यहां तक कि रथों और घुड़सवारों के नगर वरन् जो कुछ सुलैमान ने यरूशलेम लेबनोन और अपने राज्य के सारे देश में बनवाना चाहा उन सब को बनवाया।
20और वे सब लोग जो एमोरी, हित्ती, परिज्जी, हिव्वी और यबूसियों में से बच गए थे, अर्थात् जो इस्राएलियों में के नहीं थे,
21उनके जो वंशज उनके बाद देश में रह गए थे और जिन्हें इस्राएल पूरी रीति से नष्ट नहीं कर पाए थे, उनसे सुलैमान ने आज तक बेगारी कराई।
22परन्तु सुलैमान ने इस्राएलियों को दास नहीं बनाया क्योंकि वे तो योद्धा और उसके कर्मचारी, उसके शासक, उसके सेनापति और उसके रथों और सवारों के प्रधान थे।
23जो प्रधान अधिकारी सुलैमान के काम पर और काम करने वालों पर नियुक्त थे उनकी संख्या पांच सौ पचास थी।
24जैसे ही फि़रौन की पुत्री दाऊदनगर से अपने उस घर में आई जिसे सुलैमान ने उसके लिए बनवाया था, उसने मिल्लो को बनाया।
25सुलैमान तो उस वेदी पर जो उसने यहोवा के लिए बनाई थी, वर्ष में तीन बार होमबलि और मेलबलि चढ़ाता था और इनके साथ ही यहोवा के सम्मुख धूप जलाया करता था; इस प्रकार उसने उस भवन को तैयार किया।
26राजा सुलैमान ने एस्योन-गेबेर में जो एदोम देश में लाल समुद्र के तट पर एलोत के पास है जहाजी बेड़ा भी बनवाया।
27और हीराम ने सुलैमान के सेवकों के साथ अपने उन सेवक मल्लाहों को जहाजों के साथ भेज दिया जो समुद्र की जानकारी रखते थे।
28और वे ओपीर को जाकर चार सौ बीस किक्कार सोना राजा सुलैमान के लिए ले आए।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)