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पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 16 / 31

1 शमूएल 16

1यहोवा ने शमूएल से कहा, “जब मैंने शाऊल को इस्राएल पर राजा होने के लिए अस्वीकार कर दिया है, तू कब तक शाऊल के विषय में शोक करता रहेगा? सींग में तेल भर, और चल। मैं तुझेे बैतलहमी यिशै के पास भेजूँगा क्याेंकि मैंने अपने लिए उसके पुत्रों में से एक राजा चुन लिया है।”

2परन्तु शमूएल ने कहा, “मैं कैसे जा सकता हूँ? जब शाऊल इसके विषय में सुनेगा, वह मुझे मार डालेगा।” तब यहोवा ने कहा, “अपने साथ एक बछिया लेकर जा, और कहना, ‘मैं यहोवा के लिए बलि चढ़ाने आया हूँ।’

3बलिदान में यिशै को निमन्त्रण देना और मैं बताऊगा कि तुझको क्या करना होगा। जिसके लिए मैं कहूँ, उसी का मेरे लिए अभिषेक करना।”

4अतः शमूएल ने वही किया जो यहोवा ने कहा था। फिर वह बैतलहम गया। नगर के प्राचीन थरथराते हुए उससे मिलने आए, और कहा, “क्या तू मित्रभाव से आया है?”

5उसने कहा, “हां मित्रभाव से। मैं यहोवा के लिए बलिदान चढ़ाने आया हूँ। अपने आप को पवित्र करो, और बलिदान चढ़ाने मेरे साथ चलो।” उसने यिशै और उसके पुत्रों को भी पवित्र करके बलिदान में आमन्त्रित किया।

6जब वे भीतर आए तो उसने एलीआब को देखकर सोचा, “निश्चय, यहोवा का अभिषिक्त उसके सामने है।”

7परन्तु यहोवा ने शमूएल से कहा, “उसके रूप को मत देख, न उसके कद की ऊंचाई पर ध्यान दे, क्योंकि मैंने उसको अस्वीकार किया है, क्योंकि परमेश्वर का देखना मनुष्य के समान नही। मनुष्य तो बाहरी रूप को देखता है, परन्तु परमेश्वर हृदय को देखता है।”

8तब यिशै ने अबीनादाब को बुलाया और उसको शमूएल के सामने होकर जाने दिया। उसने कहा, “यहोवा ने इसको भी नहीं चुना है।”

9इसके बाद यिशै ने शम्मा को सामने से निकलने को कहा, तब उसने कहा, “यहोवा ने इसको भी नहीं चुना है।”

10इस प्रकार यिशै ने अपने सात पुत्रों को शमूएल के सामने होकर जाने दिया और शमूएल ने कहा, “यहोवा ने इनको नहीं चुना।”

11तब शमूएल ने यिशै से कहा, “क्या सब बच्चे ये ही है?” उसने कहा, “सबसे छोटा तो अभी रह गया है, और सुन, वह तो भेड़ें चरा रहा है।” तब शमूएल ने यिशै से कहा, “उसे बुलवा भेज, क्योंकि जब तक वह यहां न आए तब तक हम नहीं बैठेंगे।”

12अतः वह उसे बुलवाकर भीतर ले आया। उसके तो लाली झलकती थी। उसकी आंखें सुन्दर और चेहरा रूपवान था। तब यहोवा ने कहा, “उठ, अभिषेक कर। यही है वह।”

13तब शमूएल ने तेल भरा सींग लेकर उसके भाइयों के बीच में उसका अभिषेक किया। उसी दिन से यहोवा का आत्मा दाऊद पर बल से उतरता रहा। शमूएल उठकर रामा को चला गया।

14अब यहोवा का आत्मा शाऊल पर से उठ गया, और यहोवा की ओर से एक दुष्ट आत्मा उसको सताने लगी।

15तब शाऊल के कर्मचारियो ने उससे कहा, “सुन, परमेश्वर की ओर से एक दुष्ट आत्मा तुझे सताती है।

16हमारा प्रभु अपने सामने उपस्थित कर्मचारियों को आज्ञा दे कि वे ऐसा व्यक्ति खोजें जो वीणा-वादन में निपुण हो। जब कभी परमेश्वर की ओर से दुष्ट आत्मा तुझमें प्रवेश करे तब वह अपने हाथ से वीणा बजाएगा और तू अच्छा हो जाएगा।”

17अतः शाऊल ने अपने कर्मचारियों से कहा, “ठीक है, मेरे लिए अब एक निपुण वादक का प्रबन्ध करो और उसे मेरे पास ले आओ।”

18तब एक युवक ने उत्तर देते हुए कहा, “सुन, मैंने बैतलहमी यिशै के एक पुत्र को देखा है जो निपुण संगीतज्ञ है। वह साहसी सामर्थी योद्धा है, बात करने में बुद्धिमान् और रूपवान है। यहोवा उसके साथ रहता है।”

19अतः शाऊल ने दूत भेजकर यिशै से कहा, “अपने पुत्र दाऊद को जो भेड़-बकरियों के साथ रहता है, मेरे पास भेज दे।”

20तब यिशै ने एक गदहे पर रोटियां, एक सुराही दाखमधु और एक बकरी का बच्चा अपने पुत्र दाऊद के हाथ से शाऊल के पास भेज दिया।

22तब शाऊल ने यिशै के पास कहला भेजा, “अब दाऊद को मेरी सेवा में रहने दे क्योंकि मैं उससे अति प्रसन्न हूँ।”

23अतः जब कभी दुष्ट आत्मा परमेश्वर की ओर से शाऊल पर उतरती, दाऊद वीणा लेकर अपने हाथ से बजाता था और शाऊल चैन प्राप्त कर अच्छा हो जाता था, और दुष्ट आत्मा उससे दूर हो जाती थी।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)