पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 18 / 31
1 शमूएल 18
1जब वह शाऊल से बातें कर चुका तो योनातान का मन दाऊद के मन से मिल गया, और योनातान दाऊद को अपने ही समान प्रेम करने लगा।
2और उस दिन शाऊल उसे ले गया, और उसे उसके पिता के पास लौटने नहीं दिया।
3तब योनातान ने दाऊद से वाचा बांधी क्योंकि वह उसे अपने समान प्यार करता था।
4फिर योनातान ने अपना बागा उतारकर दाऊद को दे दिया। साथ ही अपना कवच, अपनी तलवार, अपना धनुष और कमरबन्द भी दे दिया।
5अतः शाऊल दाऊद को जहां कहीं भेजता, वह जाता और सफलता प्राप्त करता था। अतः शाऊल ने उसे योद्धाओं के ऊपर अधिकारी नियुक्त कर दिया। वह बात समस्त प्रजा और शाऊल के कर्मचारियों की दृष्टि में भली थी।
6जब दाऊद पलिश्ती को मारकर लौट रहा था तब स्त्रियां इस्राएल के सब नगरों से निकलकर वाघयंत्रों और डफ की ताल में आनन्द के साथ नाचती-गाती हुई शाऊल राजा से भेंट करने आ निकली।
7वे स्त्रियां नाचती और यह गीत गाती गईं: “शाऊल ने मारा हज़ारों को, दाऊद ने मारा लाखों को।” शाऊल की शत्रुता का आरम्भ
8तब शाऊल अति क्रोधित हुआ क्योंकि यह कहावत उसको बहुत बुरी लगी। उसने कहा, “दाऊद को तो उन्होंने लाखों का श्रेय दिया है, परन्तु मुझ को केवल हज़ारों का। अब उसको राज्य के अतिरिक्त और क्या मिलना शेष रह गया है?”
9उस दिन शाऊल दाऊद को सन्देह की दृष्टि से देखने लगा।
10दूसरे ही दिन ऐसा हुआ कि परमेश्वर की ओर से एक दुष्टात्मा शाऊल पर प्रबलता से उतरी, और वह अपने घर के बीच में चीखने-चिल्लाने लगा। शाऊल के हाथ में भाला था, और दाऊद प्रतिदिन के समान अपने हाथ से वीणा बजा रहा था।
11तब शाऊल ने यह सोचकर भाला फेंक कर मारा कि, “मैं दाऊद को दीवार में बेध दूंगा।” परन्तु दाऊद उसके सामने से दोनों बार हट गया।
12इससे शाऊल दाऊद से डरने लगा क्योंकि यहोवा दाऊद के साथ था, परन्तु शाऊल के पास से अलग हो गया था।
13इसलिए, शाऊल ने उसे अपने पास से अलग करके सहस्रपति नियुक्त कर दिया और वह प्रजा के सामने आने-जाने लगा।
14दाऊद अपने सब कामों में अत्यधिक सफल होता जाता था क्येांकि यहोवा उसके साथ था।
15जब शाऊल ने देखा कि दाऊद अत्याधिक सफल होता जा रहा है तब वह उससे बहुत भयभीत रहने लगा।
16परन्तु सब इस्राएल और यहूदा के समस्त लोग दाऊद से प्रेम करते थे, और वह युद्ध में उनकी अगुवाई करता था।
17तब शाऊल ने दाऊद से कहा, “यह मेरी बड़ी पुत्री मेरब है। उसे मैं तेरी पत्नी होने के लिए दे दूंगा। तू मेरे लिए केवल इतना कर कि वीर पुरुष बनकर यहोवा का संग्राम लड़।” क्योंकि शाऊल ने सोचा, “मैं अपना हाथ उस पर नहीं उठाऊंगा। पलिश्तियों ही का हाथ उस पर पड़े।”
18परन्तु दाऊद ने शाऊल से कहा, “मैं कौन हूं? मेरा जीवन क्या है? या, इस्राएल में मेरे पिता का परिवार क्या है कि मैं राजा का दामाद बनूं?”
19तब ऐसा हुआ कि जिस समय शाऊल की पुत्री मेरब का विवाह दाऊद के साथ होना चाहिए था, तो वह महोलत-वासी अद्रीएल को ब्याह दी गई।
20अब शाऊल की पुत्री, मीकल, दाऊद से प्रेम करने लगी। जब इसका समाचार शाऊल को दिया गया तब वह सहमत हो गया।
21शाऊल ने सोचा, “मैं उसे उसको दे दूंगा जिससे कि वह उसका फन्दा बने, और पलिश्तियों का हाथ उसके विरुद्ध उठे।” इसलिए, शाऊल ने दाऊद से कहा, “आज तेरा यह दूसरा अवसर है कि तू मेरा दामाद बने।”
22तब शाऊल ने अपने कर्मचारियों को आदेश दिया, “दाऊद से गुप्त रूप से कहो कि ‘सुन, राजा तुझसे प्रसन्न है, और उसके सब कर्मचारी तुझसे प्रेम करते है। इसलिए अब तू राजा का दामाद बन जा’।”
23अतः शाऊल के कर्मचारियों ने दाऊद के कानों में ये बातें कही। परन्तु दाऊद ने उत्तर दिया, “मैं तो निर्धन हूं, और नगण्य समझा जाता हू। उस दशा में क्या तुम्हारी दृष्टि में राजा का दामाद बनना कोई छोटी बात मालूम होती है?”
24शाऊल के कर्मचारियों ने शाऊल से दाऊद की बातों को जैसा उसने कहा था बता दिया।
25तब शाऊल ने फिर कहा, “तुम दाऊद से यह कहना, ‘राजा पलिश्तियों की एक सौ खलड़ियों के अतिरिक्त तुझसे कुछ भी दहेज नहीं चाहता कि वह अपने शत्रुओं से बदला ले सके’।” इसमें शाऊल की योजना यह थी कि दाऊद को पलिश्तियों के हाथ मरवा डाले।
26जब उसके कर्मचारियों ने दाऊद को ये बातें सुनाईं तब राजा का दामाद बनना दाऊद की दृष्टि में अनुकूल प्रतीत हुआ। दिन अभी पूरे नहीं हो पाए थे
27कि दाऊद ने अपने सैनिकों के साथ प्रस्थान किया, और जाकर पलिश्तियों में से दो सौ पुरुषों को मार डाला। तब दाऊद उनकी खलड़ियां लेकर आया, और सबकी सब राजा को दी जिससे कि वह राजा का दामाद बन सके। अतः शाऊल ने अपनी पुत्री मीकल को उसकी पत्नी होने के लिए दे दिया।
28अब जब शाऊल ने देखा और जान लिया कि यहोवा दाऊद के साथ रहता है, तथा मेरी पुत्री मीकल उससे प्रेम करती है,
29तब दाऊद से शाऊल और भी अधिक डरने लगा। इस प्रकार दाऊद से शाऊल निरन्तर शत्रुता करने लगा।
30फिर पलिश्तियों के सेनापति युद्ध के लिए पुनः निकल आए, और ऐसा हुआ कि जब-जब वे निकल आते तब-तब दाऊद शाऊल के अन्य कर्मचारियों से बढ़कर बुद्धिमानी से आचरण करता था। अतः उसका नाम अत्यधिक सम्मानित हो गया। योनातान दाऊद के लिए विनय करता है
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)