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पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 19 / 31

1 शमूएल 19

1अतः शाऊल ने अपने पुत्र, योनातान तथा अपने सब कर्मचारियों से दाऊद की हत्या करने को कहा। परन्तुु शाऊल का पुत्र, योनातान दाऊद से अत्यधिक प्रसन्न था।

2योनातान ने दाऊद को बताया कि, “मेरा पिता, शाऊल तेरी हत्या करने का अवसर खोज रहा है। इसलिए, तू प्रातःकाल सावधान रहना, किसी गुप्त स्थान में जा छिपना।

3तब जिस मैदान में तू छिपा रहेगा वहां मैं अपने पिता के पास खड़ा होऊंगा, और उससे तेरे विषय में बात करूंगा। यदि मुझे कुछ मालूम हो जाए तो तुझे बता दूंगा।”

4तब योनातान ने अपने पिता, शाऊल से दाऊद की प्रशंसा करते हुए कहा, “राजा अपने दास दाऊद के विरुद्ध पाप न करे, क्योंकि उसने तेरे विरुद्ध पाप नहीं किया है, और उसके सब काम तेरे हित में रहे है।

5क्योंकि उसने अपने प्राण पर खेलकर उस पलिश्ती को मार डाला, और यहोवा ने समस्त इस्राएल का महान् छुटकारा करवाया जिसको देखकर तू आनन्दित हुआ था तब दाऊद को अकारण मारकर तू निर्दोष के खून का पाप क्यों करे!”

6शाऊल ने योनातान की बात मानकर शपथ खाई, “यहोवा के जीवन की शपथ, वह मार डाला न जाएगा।”

7तब योनातान ने दाऊद को बुलाकर ये सब बातें बता दी। फिर योनातान दाऊद को शाऊल के पास लाया, और वह उसकी उपस्थिति में पहले के समान रहने लगा।

8जब फिर युद्ध छिड़ गया। तब दाऊद ने जाकर पलिश्तियों से युद्ध किया, और उन्हें बड़ी मार से मारा, जिससे कि वे उसके सामने से भाग गए।

9जब शाऊल हाथ में भाला लिए हुए घर में बैठा था, और दाऊद अपने हाथ से वीणा बजा रहा था। तब यहोवा की ओर से शाऊल में एक दुष्टात्मा समाई।

10शाऊल ने भाला मारकर दाऊद को दीवार में वेध देने का प्रयास किया परन्तु वह शाऊल के सामने से खिसक गया जिससे भाला जाकर दीवार में जा घुसा। तब दाऊद भागकर उस रात बच गया।

11तब शाऊल ने दाऊद के घर घात लगाने के लिए दूत भेजे कि वे सवेरे उसकी हत्या कर दे। परन्तु दाऊद की पत्नी, मीकल ने उसे बता दिया, “यदि आज रात तू अपने प्राण न बचाए तो कल तू मार डाला जाएगा।”

12अतः मीकल ने दाऊद को खिड़की से बाहर उतार दिया। तब वह भागकर बच गया।

13फिर मीकल ने गृह-देवता की मूर्ति को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके सिरहाने बकरी के बाल वाला तकिया रख कर, उसे कपड़े से ढक दिया।

14जब शाऊल ने दाऊद को पकड़ लाने के लिए दूत भेजे तब वह बोली, “वह तो बीमार है।”

15तब शाऊल ने दूतों को दाऊद को देखने के लिए यह कह कर भेजा, “उसे चारपाई सहित मेरे पास ले आओ कि मैं उसे मार डालू।”

16तब दूतों ने प्रवेश किया तो देखा कि बिस्तर पर गृह-देवता की मूर्ति पड़ी है और उसके सिरहाने बकरी के बाल वाला तकिया लगा है।

17तब शाऊल ने मीकल से कहा, “तूने मुझे ऐसा धोखा क्यों दिया और मेरे शत्रु को क्यों जाने दिया जिससे वह बच निकला है?” मीकल ने शाऊल को उत्तर दिया, “उसने मुझसे कहा, ‘मुझे जाने दे। मैं तुझे क्यों मार डालूं’?”

18तब दाऊद बचकर भाग गया, और रामा में शमूएल के पास आकर उसको वह सब बताया जो शाऊल ने उससे किया था। फिर वह और शमूएल नायोत में जाकर रहे।

19तब शाऊल को बताया गया, “देख, दाऊद रामा के नायोत में है।”

20तब शाऊल ने दाऊद को पकड़ लाने के लिए दूत भेजे। परन्तु जब उन्होंने नबियों के दल को नबूवत करते और शमूएल को उनकी अगुवाई करते देखा तो शाऊल के दूतों पर भी परमेश्वर का आत्मा उतरा, और वे भी नबूवत करने लगे।

21जब शाऊल को इसकी सूचना दी गई तब उसने अन्य दूत भेजे, और वे भी नबूवत करने लगे। फिर शाऊल ने तीसरी बार दूत भेजे और वे भी नबूवत करने लगे।

22तब वह स्वयं रामा गया, और सेकू-स्थित बड़े कुएं के पास पहुंचकर पूछने लगा, “शमूएल और दाऊद कहां हैं?” और किसी ने उससे कहा, “सुन, वे रामा के नायोत में है।”

23तब वह रामा के नायोत की ओर आगे बढ़ा, और परमेश्वर का आत्मा उस पर भी उतर आया जिससे वह नबूवत करते हुए रामा के नायोत में पहुंचा।

24वहां पहुंच कर उसने भी अपने वस्त्र उतार फेंके, और शमूएल के सामने उसने भी नबूवत की। फिर वह सारे दिन और सारी रात निर्वस्त्र पड़ा रहा। इसलिए, वे कहते है, “क्या शाऊल भी नबियों में से है?”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)