पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 22 / 31
1 शमूएल 22
1अतः दाऊद ने वहां से भागकर अदुल्लाम की गुफा में शरण ली। जब उसके भाइयों ने और उसके पिता के समस्त घराने ने यह सुना तब वे वहां उसके पास गए।
2और जितने संकट में पड़े थे, और जितने कर्जदार थे और जितने असंतुष्ट थे, वे सब उसके पास एकत्रित हुए और वह उन सबका प्रधान बन गया। वहां उसके साथ लगभग चार सौ पुरुष हो गए।
3वहां से दाऊद ने मोआब के मिस्पा में जाकर, मोआब के राजा से कहा, “मेरे पिता और मेरी माता को आने, और तब तक अपने साथ रहने दे जब तक मैं यह न जान लूं कि परमेश्वर मेरे लिए क्या करेगा।”
4तब उसने उनको मोआब के राजा के पास छोड़ दिया, और वे उसके साथ उस समय तक रहे जब तक दाऊद उस गढ़ में रहा।
5फिर गाद नामक एक नबी ने दाऊद से कहा, “इस गढ़ में मत रह। इसको छोड़कर यहूदा के देश में जा।” अतः दाऊद चल कर हेरेत के जंगल में गया।
6तब शाऊल ने सुना कि दाऊद और उसके सब साथियों का पता लगा लिया गया है। उस समय शाऊल गिबा की पहाड़ी पर झाऊ-वृक्ष के नीचे हाथ में भाला लिए हुए बैठा था, और उसके सब कर्मचारी उसके चारों ओर खड़े थे।
7तब शाऊल ने अपने चारों ओर खड़े हुए कर्मचारियों से कहा, “हे बिन्यामीनियों, अब सुनो! क्या यिशै का पुत्र तुम सभों को खेत और दाख की बारियां देगा? क्या वह तुम सभों को सहस्रपति और शतपति बनाएगा?
8तुम सभों ने तो मेरे विरुद्ध षड्यंत्र रचा है। इसलिए किसी ने भी मुझे नहीं बताया कि मेरे पुत्र ने यिशै के पुत्र के साथ वाचा बांधी है, तुममें से किसी ने मेरे लिए शोकित होकर मुझे यह नही बताया िक मेरे ही पुत्र ने मेरे कर्मचारी को मेरे विरुद्ध घात में बैठने के लिए भड़काया है, जैसा कि आज है।”
9तब एदोमी दोएग ने, जो शाऊल के कर्मचारियों के पास खड़ा था, कहा, “मैंने यिशै के पुत्र को नोब में अहीतूब के पुत्र अहीमेलेक के पास आते देखा,
10और उसने उसके लिए यहोवा से पूछा, और उसको भोजन वस्तुएं तथा पलिश्ती गोलियत की तलवार भी दी।”
11तब राजा ने अहीतूब के पुत्र, अहीमेलेक याजक, उसके पिता के समस्त घराने तथा नोब के याजकों को बुलवा भेजा। वे सब राजा के पास आए।
12तब शाऊल ने कहा, “हे अहीतूब के पुत्र सुन!” उसने उत्तर दिया, “स्वामी, क्या आज्ञा?”
13फिर शाऊल ने उससे कहा, “क्या कारण है कि तूने यिशै के पुत्र के साथ मिलकर मेेरे विरुद्ध षड्यंत्र रचा? तूने उसे रोटी और तलवार दी, और उसके लिए परमेश्वर से पूछा भी जिससे कि वह मेरे विरुद्ध उठे और आज के दिन, छिपकर मेरे लिए घात लगाए?”
14तब अहीमेलेक ने राजा को उत्तर दिया, “तेरे कर्मचारियो में तेरे दामाद दाऊद के तुल्य विश्वासयोग्य कौन है? वह तो तेरे अंग-रक्षकों का प्रधान, और तेरे राज-घराने में अत्यधिक, प्रतिष्ठित है।
15मैंने क्या आज ही उसके लिए परमेश्वर से पूछना आरम्भ किया? यह मुझ से दूर रहे! राजा अपने दास पर, अथवा उसके पिता के घराने में से किसी पर भी ऐसा कोई दोष न लगाए, क्योंकि तेरा दास इन सब बातों के विषय में कुुछ भी नहीं जानता।”
16परन्तु राजा ने कहा, “अहीमेलेक, तू और तेरे पिता का समस्त घराना निश्चय ही मरेगा।”
17तब राजा ने उन अंग-रक्षकों को, जो उसकी सेवा में खड़े थे, आज्ञा दी, “आगे बढ़कर यहोवा के याजकों को मौत के घाट उतार दो। क्योंकि उन्होंने भी दाऊद की सहायता की! वे जानते थे कि दाऊद भाग रहा है फिर भी उन्होंने मुझ पर प्रकट नहीं किया।” परन्तु राजा के सेवक यहोवा के याजकों का वध करने के लिए हाथ बढ़ाने को तैयार नहीं थे।
18तब राजा ने दोएग से कहा, “तू आगे बढ़ और याजकों को मार!” तब एदोमी दोएग ने आगे बढ़कर याजकों को मारा। उस दिन उसने पचासी पुरुषों को मार डाला, जो महीन मलमल के एपोद पहने हुए थे।
19फिर उसने याजकों के नगर नोब पर तलवार से आक्रमण किया, और उसके स्त्री-पुरुषों, बाल-बच्चों, दूध पीते बच्चों, गाय-बैलों, गदहों, भेड़-बकरियों को भी तलवार के घाट उतार दिया।
20परन्तु अहीतूब के पुत्र अहीमेलेक का एब्यातार नामक पुत्र बच निकला, और दाऊद के पास भाग गया।
21एब्यातार ने दाऊद को बताया कि शाऊल ने यहोवा के याजकों को मार डाला है।
22तब दाऊद ने एब्यातार से कहा, “जिस दिन एदोमी दोएग वहां था उसी दिन मैं समझ गया कि वह शाऊल को अवश्य बताएगा। तेरे पिता के समस्त घराने की मृत्यु का कारण मैं ही हुआ।
23मेरे साथ रह। मत डर, क्योंकि जो मेरे प्राण का खोजी है वही तेरे प्राण का भी खोजी है। तू मेरे साथ सुरक्षित है।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)