पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 23 / 31
1 शमूएल 23
1तब लोगों ने दाऊद को बताया कि पलिश्ती कीला नगर के विरुद्ध युद्ध कर रहे हैं, और खलिहानों को लूट रहे है।
2अतः दाऊद ने यहोवा से पूछा, “क्या मैं जाकर इन पलिश्तियों को मारूं?” और यहोवा ने दाऊद से कहा, “जा, पलिश्तियों को मार और कीला को मुक्त कर।”
3परन्तु दाऊद के साथियों ने उससे कहा, “देख, हम यहां यहूदा में ही डरे हुए है अब यदि हम कीला में जाकर पलिश्तियों की सेना का सामना करें तो और भी अधिक क्यों न डरेंगे?”
4तब दाऊद ने यहोवा से फिर पूछा। यहोवा ने उसको उत्तर दिया, “उठ, कीला को जा। क्योंकि मै पलिश्तियों को तेरे हाथ में दे दूंगा।”
5अतः दाऊद और उसके साथियों ने कीला जाकर, पलिश्तियों से युद्ध किया और उनका महा संहार किया। उनके सब पशुओं को वह हांक लाया। इस प्रकार, दाऊद ने कीला निवासियों का छुटकारा किया।
6जब अहीमेलेक का पुत्र एब्यातार कीला में दाऊद के पास भाग आया तो वह अपने हाथ में एपोद लेकर आया था।
7जब शाऊल को बताया गया कि दाऊद कीला में आया है, तब शाऊल ने कहा, “परमेश्वर ने इसे मेरे हाथ में कर दिया है क्योंकि इसने ऐसे नगर में प्रवेश किया है जिसमें द्वार और छड़ दोनों है। इसने तो अपने आप को बन्द कर लिया है।”
8अतः शाऊल ने सब लोगों को युद्ध के लिए बुलवाया कि वे कीला को जाकर दाऊद और उसके साथियों को घेर ले।
9दाऊद तो जानता था कि शाऊल मेरे विरुद्ध हानि की योजना बना रहा है। अतः उसने एब्यातार याजक से कहा, “एपोद यहां ले आ।”
10फिर दाऊद ने कहा, “हे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा, तेरे दास ने निश्चित सुना है कि शाऊल मेरे कारण कीला नगर को नष्ट करने के लिए आने का प्रयास कर रहा है।
11क्या कीला निवासी मुझे उसके हाथ सौंप देंगे? क्या जैसा तेरे दास ने सुना है, शाऊल सचमुच यहां आएगा? हे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा, कृपा करके अपने दास को यह बता।” तब यहोवा ने उत्तर दिया, “हां, वह आएगा।”
12तब दाऊद ने पूछा, “क्या कीला-निवासी मुझे और मेरे साथियों को शाऊल के हाथ सौंप देंगे?” और यहोवा ने उत्तर दिया, “हां वे सौंप देंगे।
13तब दाऊद और उसके लगभग छः सौ साथी कीला से भाग निकले, और जहां-कहीं जा सके, चले गए। जब शाऊल को बताया गया कि दाऊद कीला से निकल भागा है तब उसने पीछा करना छोड़ दिया।
14दाऊद जंगल के गढ़ों में रहने लगा। वह जीप के जंगलों के पहाड़ी प्रदेश में रहा। शाऊल दिन-प्रतिदिन उसकी खोज में लगा रहा, परन्तु परमेश्वर ने उसे उसके हाथों में नहीं पड़ने दिया।
15जब दाऊद जीप के जंगलों में होरेश में था तो उसे मालूम हुआ कि शाऊल मेरे प्राण की खोज में निकल आया है।
16शाऊल का पुत्र योनातान उठकर, दाऊद के पास होरेश गया, और उसने परमेश्वर में उसको प्रोत्साहित किया।
17उसने उससे कहा, “मत डर, क्योंकि तू मेरे पिता शाऊल के हाथ में न पड़ेगा, तू इस्राएल का राजा होगा और दूसरा स्थान मेरा होगा। मेरा पिता शाऊल भी यह बात जानता है”
18फिर उन दोनों ने यहोवा के सामने वाचा बांधी। तब दाऊद वहीं होरेश में रहा, पर योनातान अपने घर चला गया।
19इसके बाद, जीपी लोगों ने गिबा में शाऊल के पास आकर कहा, “क्या दाऊद हमारे पास होरेश के गढ़ों में, यशीमोन के दक्षिण की ओर हकीला पहाड़ी पर छिपा नहीं रहता?
20इसलिए, हे राजा, अपनी इच्छा के अनुसार जब आना चाहे, आ। और उसको राजा के हाथ में पकड़वाना हमारा काम होगा।
21शाऊल ने कहा, “यहोवा की आशीष तुम पर हो। तुमने मुझ पर तरस खाया है।
22अब जाओ, और ठीक-ठीक निश्चय करो। ठीक से खोज करके अडóे का पता लगाओ और यह भी कि किसने उसको वहां देखा है। मुझे बताया गया है कि वह बहुत ही चालाक है।
23अतः देखकर पता लगा लो कि वह कहां कहा छिपता है। निश्चय करके मेरे पास लौट आओ, तो मैं तुम्हारे साथ जाऊंगा। यदि वह उस देश में कहीं भी हो तो मैं यहूदा के हज़ारों में से उसे खोज निकालूंगा।
24तब वे उठकर शाऊल से पहले जीप को चले गए। इस समय दाऊद और उसके साथी माओन के जंगल में थे जो यशीमोन की दक्षिणी ओर अराबा में है।
25जब शाऊल और उसके लोग उसकी खोज में निकले, तो इसका समाचार दाऊद को मिला। और वह पहाड़ी पर से उतरकर माओन के जंगल में रहा। यह सुन शाऊल ने माओन के जंगल में दाऊद का पीछा किया।
26शाऊल तो पर्वत के एक ओर, तथा दाऊद और उसके साथी पर्वत के दूसरी ओर गए। दाऊद तो शाऊल से दूर भागने की जल्दी कर रहा था क्योंकि शाऊल और उसके लोग दाऊद और उसके साथियों को पकड़ने के लिए घेरा डाल रहे थे।
27परन्तु एक सन्देशवाहक ने शाऊल के पास आकर कहा, “जल्दी चल! पलिश्तियों ने देश पर हमला कर दिया है।”
28अतः शाऊल, दाऊद का पीछा करना छोड़कर पलिश्तियों का सामना करने चला गया। इसलिए उन्होंने उस स्थान का नाम सेला-हम्महलकोत रखा।
29अब दाऊद वहां से निकलकर एनगदी के गढ़ों में रहने लगा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)