पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 24 / 31
1 शमूएल 24
1जब शाऊल पलिश्तियों का पीछा करने के बाद लौटा तब उसको यह समाचार मिला कि, दाऊद एनगदी के जंगल में है।
2तब शाऊल समस्त इस्राएलियों में से तीन हज़ार चुने हुए पुरुषों को साथ लेकर दाऊद और उसके साथियों को ‘जंगली बकरों की चट्टान’ के सामने खोजने के लिए गया।
3मार्ग में वह भेड़शालाओं के समीप पहुंचा। वहीं एक गुफा थी जिसमें शाऊल शौच के लिए गया। इसी गुफा के भीतर कोने में दाऊद और उसके साथी छिपे बैठे थे।
4दाऊद के साथियों ने उससे कहा, “सुन, आज ही वह दिन है जिसके विषय यहोवा ने तुझसे कहा कि मैं तेरे शत्रु को तेरे हाथ में कर दूंगा, जिससे तू उसके साथ अपनी इच्छा के अनुसार कर सकेगा।” तब दाऊद उठा और उसने शाऊल के बागे की छोर में से चुपके से कुछ काट लिया।
5उसके बाद दाऊद का विवेक उसको काटने लगा, क्योंकि उसने शाऊल के बागे की छोर काट ली थी।
6अतः उसने अपने साथियों से कहा, “यहोवा के कारण यह मुझसे दूर हो कि मैं यहोवा के अभिषिक्त अर्थात अपने स्वामी के साथ ऐसा करूं कि उसके विरुद्ध अपना हाथ बढ़ाऊ। वह तो यहोवा का अभिषिक्त है।”
7इन वचनों से दाऊद ने अपने साथियों को समझाया। और शाऊल के विरुद्ध उठने न दिया। फिर शाऊल वहां से उठा, और गुफा से निकलकर अपने मार्ग पर चला गया।
8उसके बाद, दाऊद उठकर गुफा से निकला, और शाऊल को पुकार कर कहा, “हे मेरे स्वामी! हे राजा!” जब शाऊल ने पीछे मुड़कर देखा तो दाऊद ने मुंह के बल गिरकर दण्डवत् किया।
9और दाऊद ने शाऊल से कहा, “जो मनुष्य कहते हैं कि दाऊद तेरी हानि चाहता है, उनकी तू क्यों सुनता है?
10देख, आज तू ने अपनी आंखों से देख लिया है कि यहोवा ने गुफा में आज तुझको मेरे हाथ कर दिया था। किसी-किसी ने तो तुझे मार डालने के लिए कहा, परन्तु मुझे तुझपर तरस आया। मैंने कहा, ‘मैं अपने स्वामी पर हाथ नहीं चलाऊंगा क्योंकि वह यहोवा का अभिषिक्त है।’
11अब हे मेरे पिता, देख ले! सचमुच, अपने बागे की छोर मेरे हाथ में देख! मैंने तेरे बागे की छोर तो काट ली पर तेरी हत्या नहीं की। अब इस से जानले और अपनी आंखों से देख ले कि मेरे मन में न बुराई है न अपराध। यघपि तू मेरे प्राण लेने की घात में लगा है फिर भी मैंने तेरे विरुद्ध कोई पाप नहीं किया।
12यहोवा मेरे तेरे बीच न्याय करे, और यहोवा तुझसे मेरा बदला ले। पर मेरा हाथ तेरे विरुद्ध नहीं उठेगा।
13प्राचीनों की कहावत है ‘दुष्टता दुष्ट से ही निकलती है,’ पर मेरा हाथ तेरे विरुद्ध नहीं उठेगा।
14इस्राएल का राजा किसका पीछा करने निकल आया है? तू किसका पीछा करता फिर रहा है? एक मरे कुत्ते का? एक पिस्सू मात्र का?
15इसलिए यहोवा न्याय करे। मेरे और तेरे बीच वही निर्णय करे। वह ध्यान दे और मेरे पक्ष में लड़े, और मुझे तेरे हाथ से बचाए।”
16जब दाऊद येे वचन शाऊल से कह चुका, तब शाऊल ने कहा, “हे मेरे बेटे दाऊद, क्या यह तेरी आवाज़ है?” तब शाऊल चिल्ला-चिल्लाकर रोने लगा।
17उसने दाऊद से कहा, “तू मुझसे अधिक धर्मी है। तूने तो मेरे साथ भलाई की है, जबकि मैंने तेरे साथ बुराई की।
18आज तूने प्रकट कर दिया है कि तूने मेरे साथ भला व्यवहार किया है। यहोवा ने तो आज मुझे तेरे हाथ में कर दिया था, फिर भी तूने मुझे घात नहीं किया।
19भला, कोई अपने शत्रु को पाकर उसको सकुशल जाने देता है? इसलिए आज जो तू ने मेरे साथ किया है इसके प्रतिफल में यहोवा तेरा भला ही करे।
20और अब देख, मैं जानता हूं कि तू निश्चय ही राजा हो जाएगा, और इस्राएल का राज्य पूर्णरूप से तेरे हाथ में आ जाएगा।
21अब मुझसे यहोवा की शपथ खा कि मैं तेरे बाद तेरे वंश को नष्ट नहीं करूंगा, और कि मैं तेरा नाम तेरे पिता के घराने से मिटा न डालूँगा।”
22तब दाऊद ने शाऊल से शपथ खाई। फिर शाऊल तो अपने घर लौटा, परन्तु दाऊद अपने साथियों सहित गढ़ में चला गया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)