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पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 26 / 31

1 शमूएल 26

1तब जीपवासियों ने गिबा में शाऊल के पास आकर कहा, “क्या दाऊद यशीमोन के सामने हकीला की पहाड़ी में नहीं छिपा है?”

2अतः शाऊल उठा और जीप के जंगल में गया। वह इस्राएल के तीन हज़ार चुने हुए पुरुष साथ लेकर दाऊद को खोजने के लिए जीप के जंगलों में गया।

3वहां उसने हकीला के पर्वत पर यशीमोन के सामने मार्ग के किनारे पड़ाव किया। इस समय दाऊद जंगल में टिका था। जब उसे मालूम हो गया कि शाऊल मेरा पीछा करने जंगल में आ चुका है,

4तब दाऊद ने भेदिये भेजकर पता लगाया कि शाऊल निस्सन्देह आ रहा है।

5तब दाऊद उठकर उस स्थान को आया जहां शाऊल ने पड़ाव किया था। वहां दाऊद ने उस स्थान को देखा जहां शाऊल अपने सेनाध्यक्ष, नेर के पुत्र अब्नेर के साथ आराम कर रहा था। शाऊल तो पड़ाव में सो रहा था और सब सैनिक उसके चारों ओर घेरा डाले पड़े थे।

6तब दाऊद ने हित्ती अहीमेलेक, और सरूयाह के पुत्र योआब के भाई अबीशै से कहा, “शाऊल के डेरे में मेरे साथ कौन चलेगा?” अबीशै ने उत्तर दिया, “मैं तेरे साथ चलूंगा।”

7अतः दाऊद और अबीशै रात को सैनिको के पास गए, और देखो, शाऊल पड़ाव के बीच में सोया पड़ा था। उसका भाला उसके सिरहाने भूमि में गड़ा था। अब्नेर और उसके सैनिक उसके चारों ओर सोए हुए थे।

8तब अबीशै ने दाऊद से कहा, “आज यहोवा ने तेरे शत्रु को तेरे हाथों में कर दिया है। इसलिए, मुझे भाला मारने दे, कि मैं एक ही वार में ऐसा मारूं कि भाला उसे वेधकर भूमि में गड़ जाए। और मुझे दूसरी बार उसे मारना न पड़े।”

9परन्तु दाऊद ने अबीशै से कहा, “उसे नष्ट मत कर, क्योंकि यहोवा के अभिषिक्त पर हाथ चलाकर कौन निर्दोष ठहर सकता है?”

10फिर दाऊद ने कहा, “यहोवा के जीवन की शपथ। यहोवा ही उसे मारेगा, या उसकी मृत्यु का दिन आ जाएगा, या वह युद्ध में मारा जाएगा।

11यहोवा न करे कि मैं यहोवा के अभिषिक्त पर हाथ चलाऊ। परन्तु अब उसके सिरहाने गड़ा हुआ भाला और पानी की सुराही उठा ले, और हम चले जाए।”

12अतः दाऊद ने शाऊल के सिरहाने से भाले और सुराही को उठा लिया और वहां से चले गए। परन्तु इसे किसी ने न तो देखा, न जाना और न कोई जागा, क्योंकि वे सब सोए हुए थे, क्योंकि यहोवा की ओर से गहरी नींद उन पर आई हुई थी।

13तब दाऊद दूसरी ओर निकल गया, और पर्वत की चोटी पर खड़ा हुआ। उनके बीच बहुत दूरी थी।

14और तब दाऊद ने उन लोगों तथा नेर के पुत्र, अब्नेर को पुकार कर कहा, “हे अब्नेर! क्या तू नहीं सुनता?” तब अब्नेर ने उत्तर दिया, “तू कौन है जो राजा को पुकारता है?”

15अतः दाऊद ने अब्नेर से कहा, “क्या तू पुरुष नहीं? इस्राएल में तेरे समान और कौन है? फिर तूने अपने स्वामी राजा की रक्षा क्यों नहीं की? क्योंकि एक व्यक्ति तेरे स्वामी राजा को नष्ट करने गया था।

16तूने यह ठीक नहीं किया। यहोवा के जीवन की शपथ, तुम लोग मारे जाने के योग्य हो। क्योंकि तुमने यहोवा के अभिषिक्त, अपने स्वामी की रक्षा नहीं की। अब देख, राजा का भाला और पानी की सुराही जो उसके सिरहाने थी, कहां है?”

17तब शाऊल ने दाऊद की आवाज़ पहचान ली और कहा, “हे मेरे पुत्र दाऊद, क्या यह तेरी आवाज़ है?” और दाऊद ने उत्तर में कहा, “हां, हे मेरे स्वामी राजा यह मेरी ही आवाज़ है।”

18फिर उसने कहा, “मेरा स्वामी अपने सेवक के पीछे क्यों पड़ा है? मैंने क्या किया है? या मैंने क्या बुराई की है?

19इसलिए, अब मेरा स्वामी, राजा अपने दास के वचन सुने। यदि यहोवा ने तुझे मेरे विरुद्ध उकसाया है तो यह बलिदान ग्रहण करे। यदि मनुष्यों ने ऐसा किया है तो वे यहोवा के सामने शापित हैं, क्योंकि आज उन्होंने मुझे इसलिए भगा दिया है कि मैं यहोवा की मीरास में कोई भाग न पाऊ। उन्होंने कहा है, ‘जा, अन्य देवताओं की उपासना कर।’

20फिर मेरा लहू यहोवा की उपस्थिति से दूर भूमि पर न बहने दे, क्योंकि इस्राएल का राजा एक पिस्सू की खोज में ऐसा लगा है जैसा कोई पर्वत पर तीतर के अहेर में लगा हो।”

21तब शाऊल ने उत्तर दिया, “मैंने पाप किया है। हे मेरे बेटे दाऊद, लौट जा, अब मैं तेरी हानि नहीं करूंगा, क्योंकि आज के दिन मेरा जीवन तेरी दृष्टि में अनमोल ठहरा है। देख, मैंने बड़ी मूर्खता और भयंकर भूल की है।”

22दाऊद ने कहा, “राजा के भाले को देख! अब कोई जवान यहां आकर इसे ले जाए।

23यहोवा प्रत्येक व्यक्ति को उसकी धार्मिकता और विश्वासयोग्यता के अनुसार प्रतिफल देगा। आज यहोवा ने तुझको मेरे हाथ में कर दिया था, परन्तु मैंने यहोवा के अभिषिक्त के विरुद्ध हाथ बढ़ाने से इनकार कर दिया।

24अब देख, आज तेरा प्राण जैसे मेरी दृष्टि में बहुमूल्य ठहरा, वैसे ही मेरा प्राण यहोवा की दृष्टि में बहुमूल्य ठहरे, और वह मुझे सब संकटों से छुटकारा दे।”

25तब शाऊल ने दाऊद से कहा, “हे मेरे बेटे दाऊद! तू धन्य है। तू बड़े-बड़े काम करेगा और निश्चय प्रबल होगा।” तब दाऊद ने अपना मार्ग लिया, और शाऊल अपने स्थान को लौट गया।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)